गाज़ा: नरसंहार के 1000 दिन और कुर्बानियों की दास्तानें

काव्यात्मक शुरुआत के बाद सभा को कुछ कड़वे और कठोर तथ्यों तथा मुनाफ़े की भूखी साम्राज्यवादी ताकतों के छिपे हुए राजनीतिक मंसूबों से अवगत कराया गया, जिनके कारण फ़िलिस्तीन की सुंदर धरती और जीवन, तबाही और संकट में बदल गया है। गोआ से आए वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रंजन सोलोमन इस दिन के मुख्य वक्ता थे।

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बांडुंग से ब्रिक्स: अमेरिकी साम्राज्यवाद के विकल्प की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

प्रो. मनोरंजन मोहंती के व्याख्यान और उसके बाद हुई चर्चा ने हमारे आसपास रोज़ घटित हो रहे इन महत्त्वपूर्ण घटनाक्रमों पर अनेक महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टियाँ सामने आयीं। प्रो. मोहंती 16 जून 2026 को दिल्ली के अजय भवन में जोशी-अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज़ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में “बांडुंग से ब्रिक्स तक: नयी चुनौतियाँ” विषय पर बोल रहे थे।

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अमेरिका से दोस्ती मने जी का जंजाल: अतीत से कुछ वैश्विक सबक

अमरीका से दोस्ती बढ़ाकर हम पाकिस्तान के अंजाम को भूल गए हैं। उसने पाकिस्तान का जो हाल किया है वह किसी से छुपा नहीं है। आज पाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है। वहां चारों ओर आतंकवाद की वह फसल लहलहा रही है जिसके बीज 70 व 80 के दशक में अमरीका ने ही बोये थे।

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अमेरिकी साम्राज्यवाद की साज़िश को उजागर करें अपनी आज़ाद नज़र से: सईद नक़वी

विख्यात पत्रकार सईद नक़वी ने जोशी-अधिकारी इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज दिल्ली द्वारा “अफ़ग़ानिस्तान- कल, आज और कल” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के बारे में हमें वही समाचार दिखाये जा रहे हैं जो साम्राज्यवाद के स्वामित्व वाली विदेशी समाचार एजेंसियां दिखाना चाहती हैं।

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बीसवीं सदी के इतिहास में फिदेल की विरासत और उसका महत्व

बीसवीं सदी के इतिहास में क्यूबा की क्रांति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसने यह दिखाया कि किस तरह युवा लड़ाके गुरिल्ला छापामार युद्ध के द्वारा सत्ता में बदलाव कर सकते हैं। अमेरिका के विरोध के बावजूद क्रांतिकारी सफल हुए। अमेरिका ने क्रांति के बाद काफ़ी कोशिशें कीं लेकिन वह क्यूबा में फ़िदेल के शासन और प्रभाव को ख़त्म नहीं कर पाया।

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