बच्चों के लिए भारत का सरल-सचित्र संविधान, जो बड़ों के लिए भी उतना ही कारगर है

यह किताब सही मायनों में बच्चों को बहुत सरल भाषा में चित्रों के माध्यम से संविधान के बारे में बताती है और सालों से पूछे जाने वाले अनेकों सवालों के जवाब भी प्रदान करती है. इसमें संविधान का सरलीकृत परिचय है कि आखिर संविधान की जरूरत क्यों है, इसका महत्व क्या है, यह अस्तित्व में कैसे आया, इसमें क्या शामिल है इत्यादि.

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लगातार चलती ‘गरम हवा’ और नब्बे साल के एम. एस. सथ्यू: एक पुनरावलोकन

कलात्मक दृष्टि और सामाजिक अंतर्दृष्टि के साथ गरम हवा ने न केवल कामगार वर्ग की कई प्रमुख वास्तविकताओं की पहचान की, बल्कि यह भी सुझाया कि इन वास्तविकताओं से उत्पन्न समस्याओं का सम्मान और साहस के साथ कैसे सामना किया जा सकता है।

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बीहड़ में साइकिल: चंबल के गुमनाम क्रांतिवीरों और बागियों की एक तलाश

आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले चंबल के गुमनाम नायकों को अकेले जानने के लिए ही नहीं, इस इलाके की सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक स्थिति को भी समझने के लिए ‘बीहड़ में साइकिल’ एक जरूरी दस्तावेज है। चंबल पर जो लोग गहन शोध करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह किताब एक आधार का काम करेगी।

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गुलाबो सिताबो: सामंतवाद की ढहती हवेली में इंसानी विडंबनाओं से साक्षात्कार

मनोवैज्ञानिक विल्हेम राइख़ ने अपने पर्चे ‘लिसेन लिटिल मैन’ (1945) में लिखा था- ‘लघु मानव, तुम मुझसे पूछते हो कि तुम कब एक अच्छा, व्यवस्थित जीवन जी सकोगे, मेरा उत्तर …

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कई चाँद थे सरे आसमां: हिन्द-इस्लामी तहज़ीब का एक सांस्कृतिक कोलाज

उपन्यास वज़ीर खानम की कहानी है जो दिल्ली की अपने समय की बेहद सुंदर और सुसंस्कृत स्त्री थीं। दाग देहलवी उन्हीं के पुत्र थे। कहानी 18वीं सदी के राजपूताने से …

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