एक घटना को छुपाने के लिए दूसरी को अंजाम देने का उदाहरण है गिरधारी एनकाउंटर: रिहाई मंच

बलिया के सिकंदरपुर थाने में दलित युवक की बेरहमी से पिटाई, कासगंज में अपराधियों द्वारा पुलिस को बंधक बनाकर हत्या-घायल करना, आज़मगढ़ में बीडीसी आलम की दिन दहाड़े हत्या, जौनपुर में कृष्णा यादव की हिरासत में मौत के बाद राजधानी में गिरधारी का एनकाउंटर यूपी में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था का उदाहरण है.

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BDC मोहम्मद आलम के हत्या के दोषियों के खिलाफ सरकार करे सख्त कार्रवाई: रिहाई मंच

आलम जुमे को ध्यान में रखते हुए बाजार गए और वहां से जब वे अपनी एक्टिवा गाड़ी चार पहिया वाली जो विकलांगों के लिए होती है उससे लौट रहे थे तो रास्ते में कुछ लोगों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. वे बताते हैं कि बनकट बाजार से ही उनका पीछा वे लोग कर रहे थे.

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किसान नेताओं पर मुकदमे थोप कर खुद को मुश्किल में डालेगी सरकार: रिहाई मंच

आंदोलन को हिंसक कह कर पहले मीडिया ट्रायल करना और उसके बाद शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले किसान नेताओं पर एफआईआर दर्ज किया जाना आंदोलन के दमन की सुनियोजित साज़िश है।

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किसानों को 10 लाख का नोटिस भेजकर योगी सरकार ने संवैधानिक अनुबंध की अवमानना की है: रिहाई मंच

राजीव यादव ने कहा कि प्रदेश के कई जनपदों में किसानों और किसान नेताओं को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 111 और 149 के तहत नोटिस भिजवाए जा रहे हैं. इस प्रकार का नोटिस भेजकर सरकार आंदोलन का समर्थन करने वाले किसानों पर फर्जी मुकदमे लादकर आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर होने वाली किसान परेड के कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करना चाहती है.

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मऊ: डेढ़ साल पहले दलित प्रधान को मारा, अब भतीजे की हत्या, बहन ने लगाया सियासी संरक्षण का आरोप

राहुल सिंह ने करीब डेढ़ साल पहले अरविंद के चाचा व ग्राम प्रधान मुन्ना राम की हत्या कर दी थी, लेकिन राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण राहुल सिंह की गिरफ्तारी तक नहीं हुई थी।

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UP: किसान विरोधी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा, नोटिस तत्काल वापस ले योगी सरकार- रिहाई मंच

सीतापुर में संगतिन किसान मज़दूर संगठन की नेत्री और एनएपीएम कि राष्ट्रीय संयोजक ऋचा सिंह को लखनऊ आते हुए रास्ते में पुलिस द्वारा बिना कोई कारण बताए रोक लिया जाना और उसके बाद बिना किसी कानूनी औपचारिकता पूरी किए अवैध तरीके से उनको उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया जाना इसी दमनात्मक कार्रवाई का हिस्सा है।

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‘लव जिहाद’ कानून का शिकार हो रहे हैं दलित-पिछड़े: रिहाई मंच

मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से बताया गया कि धर्मांतरण विरोधी नए कानून के तहत तीन लोगों बालचंद्र, गोपाल प्रजापति और नीरज कुमार की गिरफ्तारी डीह कैथोली गांव से रविवार को हुई। तीनों धर्मांतरण कराने के इरादे से त्रिभुवन यादव के घर आए थे।

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साइड के लिए गाड़ी का हॉर्न बजाने पर सामंतों ने दलित मजदूर की बेरहमी से की पिटाई

गांव वालों ने बताया कि दबंगों की दबंगई अभी भी जारी है. सुबह से लेकर शाम तक मोटरसाइकिल से राउंड कर रहे हैं. आते-जाते गालियां दे रहे हैं, जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. पूरा गांव न्याय की मांग कर रहा है.

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तारिक कासमी को उम्रकैद का फैसला तथ्यों से परे: रिहाई मंच

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि 25 मई 2007 को गोरखपुर में हुई घटना के महीनों बाद 12 दिसंबर 2007 को तारिक़ का यूपी एसटीएफ ने आजमगढ़ से अपहरण किया था. इस बात को यूपी सरकार द्वारा गठित आरडी निमेष आयोग ने भी सही ठहराते हुए दोषी पुलिस वालों के खिलाफ करवाई की सिफारिश की थी.

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सड़क से सलाखों तक: CAA विरोधी आंदोलन की पहली बरसी पर मऊ में हुए दमन की रिपोर्ट

16 दिसंबर 2019 को मऊ शहर में भी व्यापक तौर पर विरोध दर्ज किया गया। यूपी में मऊ पहला जिला था जहां से आम जनता इस असंवैधानिक नागरिकता कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरी जिसके बाद देखते-देखते पूरा सूबा आंदोलन में शामिल हो गया। आन्दोलन की बढ़ती व्यापकता से डर कर योगी सरकार ने गैंगेस्टर, गुंडा एक्ट, जिलाबदर, रासुका जैसे हथियार इस्तेमाल किए।

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