फ़ैसल खान की गिरफ़्तारी साझा संस्कृति के नये नारे की जरूरत को रेखांकित करती है

भारत के अन्दर तेजी से बदलता यह घटनाक्रम दरअसल सदिच्छा रखने वाले तमाम लोगों- जो तहेदिल से सांप्रदायिक सद्भाव कायम करना चाहते हैं, जहां सभी धर्मों के तथा नास्तिकजन भी मेलजोल के भाव से रह सकें- के विश्वदृष्टिकोण की सीमाओं को भी उजागर करता है।

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लखनऊ: CAA के बहाने मारपीट, हिरासत, होर्डिंग-पोस्टर और दमन का नया सिलसिला

रिहाई मंच इस पुलिसिया दमनात्मक कार्रवाई का विरोध करते हुए जैनब के परिजनों की सुरक्षा और तत्काल रिहाई की मांग करता है। बिना कारण बताए गैर-कानूनी तरीके से किसी को ले जाना गलत है। यह परेशान करने के मकसद से लोगों की आवाज़ का दमन करने के लिए किया जा रहा है।

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फैसल खान शांति एवं सद्भावना के लिए प्रतिबद्ध, उनका गिरफ्तार किया जाना दुखद

हम समाज से अपेक्षा करते हैं कि फैसल खान को ठीक से समझे और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के प्रयासों का साथ दे, न कि उनका जो समाज को अपने निहित स्वार्थ हेतु बांटना चाहते हैं। हम

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