‘मृत्यु अचानक बंद हुआ दरवाजा नहीं…’ : कवि ऋतुराज की स्मृति में कुछ आत्मीय बातें
आज ऋतुराज जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके साथ बिताए समय को याद करते हुए उनकी अनुपस्थिति का अर्थ और गहरा हो जाता है। किसी व्यक्ति के जाने के बाद उसकी कमी केवल इसलिए महसूस नहीं होती कि अब उससे मुलाकात नहीं होगी। कमी इस बात की भी होती है कि बातचीत के वे अवसर समाप्त हो गए, जिनमें नए प्रश्न उठते थे, विचारों का आदान-प्रदान होता था और जीवन को देखने की दृष्टि कुछ और व्यापक बनती थी।
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