सिक्किम: लॉकडाउन ने दो-तिहाई परिवारों की मासिक आय को आधे से भी कम कर दिया

हमारे नमूने में प्रति व्यक्ति 24 हजार रुपये से अधिक की मासिक आय वाले केवल दो परिवार हैं, लेकिन 40 फीसदी से ज्यादा (150 में से 62) उत्तरदाताओं ने बताया है कि घोषणा के दो महीने बाद भी लॉकडाउन के दौरान उन्हें मुफ्त राशन नहीं मिला है। केवल 7 उत्तरदाताओं ने बताया है कि उन्हें अपने जन-धन खाते में धन प्राप्त हुआ है।

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ओडिशा के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र कटक में लोग शहरी रोजगार गारंटी की मांग क्यों कर रहे हैं?

विभिन्न आय वर्गों के लिए लॉकडाउन से पहले मासिक प्रतिव्यक्ति आय और लॉकडाउन के दौरान मासिक प्रतिव्यक्ति आय के अनुपात को यदि हम देखें, तो हम पाते हैं कि यह अनुपात शीर्ष 20 फीसदी परिवारों के लिए महज 35 फीसदी है जबकि सबसे नीचे के 20 फीसदी परिवारों के लिए यह 85 फेससदी तक जाता है

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मजदूर ही देश की धुरी बनेंगे और नया रास्ता दिखाएंगे

सरकार की ओर से आने वाले समय में लोगों के रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा को लेकर कोई स्पष्टता दिखायी नहीं दे रही है

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एक महामारी और तीन तहों में बंटी ज़िंदगी की अपनी-अपनी बीमारी

जितने भी सुविधा के साधन हमने ईजाद किए हैं इस दौरान वे सभी फेल हो गए हैं। पैसे से लेकर मशीनरी तक।

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“कोरोना मने भूख से मरने की बीमारी”- दक्षिणी राजस्थान की आदिवासी औरतें ऐसा क्यों सोचती हैं?

हम यह देखने में चूक रहे हैं कि काम बंद नहीं हुआ है. बस अवैतनिक, अदृश्य और घर के भीतर महिलाओं द्वारा पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा काम किया जा रहा है

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एक काला पहाड़ के पापों का बोझ भी सबको बांटना ही पड़ेगा…

जब हरेक राज्य का मुख्यमंत्री दावा कर रहा है कि उसने हालात को बिल्कुल संभाल लिया है, तो स्थिति इतनी बेकाबू क्यों है

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