मध्य प्रदेश: वनाधिकार कानून में महिलाओं के साथ जारी ‘ऐतिहासिक अन्याय’ का प्रश्न

यदि भूमि पर वास्तविक नियंत्रण पुरुषों के हाथ में है, यदि महिलाएँ निर्णय प्रक्रिया से बाहर हैं, यदि सामुदायिक अधिकारों में उनकी भूमिका सीमित है—तो यह कहना कठिन होगा कि ऐतिहासिक अन्याय पूरी तरह समाप्त हो गया है। बल्कि कई बार ऐसा लगता है कि वह नए प्रशासनिक और सामाजिक रूपों में जारी है।

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बात बोलेगी: आदिम शिकारियों के कानूनी जंगल में ‘मादा’ जद्दोजहद के दो चेहरे

मूल कथा भले ही एक शेरनी (टी-12) के इर्द-गिर्द बुनी गयी है, लेकिन यह दो मादाओं (स्त्रीलिंग) की बराबर जद्दोजहद भी है जिसमें उन्हें ही खेत होना है। एक महिला के लिए हमारा समाज, हमारी राजनीति, हमारी नौकरशाही ठीक वही रवैया अपनाती है जो एक शेरनी के लिए शिकारी अपनाता है, यह बात बिना किसी उपदेश के इस फिल्म में सतह पर आ जाती है।

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पंचतत्व: वनों का प्रबंधन स्थानीय समुदायों के हाथ में देने से कौन रोक रहा है?

उत्तराखंड की खासियत है कि हर वन पंचायत स्थानीय जंगल के उपयोग, प्रबंधन और सुरक्षा के लिए अपने नियम खुद बनाती है. ये नियम वनरक्षकों के चयन से लेकर बकाएदारों को दंडित करने तक हैं. सरमोली के विर्दी गांव में, जंगल की सुरक्षा के पंचायती कानून के तहत जुर्माना 50 रुपये से 1,000 रुपये तक है.

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