व्यक्ति से विरासत तक: भारत कला भवन पहली बार बना मानवाधिकार सम्मानों का संरक्षक

यह समर्पण केवल पदकों और प्रमाण-पत्रों का हस्तांतरण नहीं है। यह उन दशकों लंबे संघर्षों, जनसाक्ष्यों, पीड़ितों की आवाजों और मानवीय गरिमा के लिए किए गए प्रयासों की स्मृतियों को निजी संग्रह से निकालकर सार्वजनिक धरोहर में बदलने का महत्वपूर्ण कदम है।

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हल्द्वानी: महंगाई के विरोध में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन का प्रदर्शन

सभा से पहले सभी साथी अंबेडकर पार्क मंगल पड़ाव पर एकत्र हुए। वहाँ से जूलूस एसडीएम कार्यालय पहुंचा। वहाँ मुख्यमंत्री महोदय के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया। जूलूस वहाँ से आगे बुद्ध पार्क पहुंचा जहाँ महंगाई के विरोध में मंहगाई व पूंजीवादी व्यवस्था का पुतला दहन किया गया।

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ओडिशा: खनन कंपनियों का विरोध कर रहे नेताओं की गिरफ्तारी पर सरोकारी नागरिकों का निंदा बयान

हमारा दृढ़ विश्वास है कि लद सिकाका, लिंगराज आज़ाद और हीरामल नायक जैसे नेताओं की गिरफ्तारी, या कांटामाल और तालामपदर के ग्रामीणों की घेराबंदी, अलग-अलग या एक-दूसरे से असंबद्ध घटनाएं नहीं हैं; बल्कि ओडिशा में खनन और औद्योगीकरण को हर संभव तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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Lingraj Azad

ओडिशा : लिंगराज सहित अवैध गिरफ्तारियों और दमन के खिलाफ SKM का प्रतिवाद

पुलिस ने 25 मार्च 2026 को भवानीपटना से प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता लिंगराज आज़ाद को गिरफ्तार किया और तब से उन्हें जमानत का वैध अधिकार दिए बिना जेल में बंद रखा है। लिंगराज आज़ाद संयुक्त किसान मोर्चा, एनएपीएम, नियमगिरि सुरक्षा समिति और मां माटी माली सुरक्षा मंच सहित जन आंदोलनों से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों में अवैध भूमि अधिग्रहण और खनन परियोजनाओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है। एसकेएम अवैध गिरफ्तारियों और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की कड़ी मांग करता है।

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पुनर्वास नहीं, नर्कवास : केन-बेतवा परियोजना पर CPI के प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट

भारत सरकार और सर्वोच्च न्यायालय ने यह कहा  भी है कि विस्थापित लोगों का पुनर्वास इस प्रकार करना चाहिए कि उनसे जो जीवन छीना गया है, उनके लिए उससे बेहतर जीवन सुनिश्चित किया जा सके। केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना में बेहतर जीवन तो दूर की बात है, सामान्य मनुष्यों की तरह का जीवन भी उन लोगों को नहीं दिया गया है, जिनसे उनका जंगल, खेत, खलिहान, गाँव, सबकुछ सरकार ने विकास के नाम पर छीन लिया गया।

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बनारस: न्याय और मानवाधिकार के हक में उत्पीड़ितों ने उठाई सामूहिक आवाज

बीते 11 अगस्‍त को सामाजिक कार्यकर्ताओं के शिक्षक-प्रशिक्षक रहे अनिल चौधरी और बनारस के आंदोलनकारी पत्रकार सुशील त्रिपाठी की दोहरी स्‍मृति में पराड़कर भवन में सर्वाइवर एलायंस मीटिंग–2026 का आयोजन किया गया। खचाखच भरे सभागार वाले इस कार्यक्रम में पुनर्वास, न्याय और मानवाधिकारों के लिए सामूहिक आवाज बुलंद हुई।

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भारत-अमेरिका FTA के खिलाफ कई राज्यों से हजारों किसानों का दिल्ली कूच

देश बचाओ मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा किसानों, मजदूरों, दुग्ध उत्पादकों, छोटे व्यापारियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा किए बिना कोई भी समझौता न किया जाए।

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फरीदाबाद: देश की सबसे बड़ी परिधान एक्सपोर्ट कंपनी में श्रमिकों ने खोला मोर्चा

यह भारत की सबसे बड़ी गारमेंट निर्यातक कंपनियों में से एक शाही एक्सपोर्ट्स का मजदूरों के खिलाफ अपनाया नया हथकंडा है। सरकार ने जब न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की, तो कंपनी ने अपना मुनाफा बचाने के लिए मजदूरों का बोनस 20 फीसद से घटाकर सीधे 8 फीसद कर दिया। ध्यान रहे कि यह कंपनी फिल्म अभिनेता अनिल कपूर के समधी हरीश आहूजा की है।

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भारत के नागरिकों, छात्रों-युवाओं से भारत जोड़ो अभियान की अपील

हम देश के सभी विपक्षी दलों, जन आंदोलनों, संगठनों और नागरिकों, विशेषकर छात्रों और युवाओं से अपील करते हैं कि वे इस दिशा में चल रहे सभी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलनों का समर्थन करें तथा 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद भवन मार्च में शामिल हों।

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गाज़ा: नरसंहार के 1000 दिन और कुर्बानियों की दास्तानें

काव्यात्मक शुरुआत के बाद सभा को कुछ कड़वे और कठोर तथ्यों तथा मुनाफ़े की भूखी साम्राज्यवादी ताकतों के छिपे हुए राजनीतिक मंसूबों से अवगत कराया गया, जिनके कारण फ़िलिस्तीन की सुंदर धरती और जीवन, तबाही और संकट में बदल गया है। गोआ से आए वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रंजन सोलोमन इस दिन के मुख्य वक्ता थे।

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