गाज़ा: नरसंहार के 1000 दिन और कुर्बानियों की दास्तानें

काव्यात्मक शुरुआत के बाद सभा को कुछ कड़वे और कठोर तथ्यों तथा मुनाफ़े की भूखी साम्राज्यवादी ताकतों के छिपे हुए राजनीतिक मंसूबों से अवगत कराया गया, जिनके कारण फ़िलिस्तीन की सुंदर धरती और जीवन, तबाही और संकट में बदल गया है। गोआ से आए वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रंजन सोलोमन इस दिन के मुख्य वक्ता थे।

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विनीत तिवारी को फिलिस्तीन पर पुस्तक लेखन फेलोशिप का प्रलेस ने किया स्वागत

ग्रंथालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में विनीत तिवारी के योगदान की सराहना करते हुए कहा गया है, “एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता ने फिलिस्तीन पर सार्वजनिक विमर्श को समृद्ध करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। आपके कार्यों ने भारत के समकालीन लेखकों और कार्यकर्ताओं को गहराई से प्रेरित किया है।”

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बांडुंग से ब्रिक्स: अमेरिकी साम्राज्यवाद के विकल्प की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

प्रो. मनोरंजन मोहंती के व्याख्यान और उसके बाद हुई चर्चा ने हमारे आसपास रोज़ घटित हो रहे इन महत्त्वपूर्ण घटनाक्रमों पर अनेक महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टियाँ सामने आयीं। प्रो. मोहंती 16 जून 2026 को दिल्ली के अजय भवन में जोशी-अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज़ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में “बांडुंग से ब्रिक्स तक: नयी चुनौतियाँ” विषय पर बोल रहे थे।

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बहुत लड़े, बहुत हासिल किया, और बहुत लड़ाई बाक़ी है: NFIW का 72वाँ स्थापना दिवस

एनएफ़आईडब्ल्यू के 72वें स्थापना दिवस पर 4 जून 2026 को दिल्ली के राजेन्द्र भवन में लगभग आधे दिन तक चले केन्द्रीय इकाई के कार्यक्रम में शरीक होने का अवसर मुझे मिला और यह बहुत उम्मीद जगाने वाला तसलीबख्श अनुभव रहा।

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अत्यंत खतरनाक कीटनाशकों का संकट: हिमाचल प्रदेश को क्यों चाहिए एक सुरक्षित कृषि भविष्य

हिमाचल प्रदेश में यह संकट अन्य राज्यों की कृषि चुनौतियों से अलग है। सेब और बेमौसमी सब्जियों जैसी नकदी फसलों की खेती, तथा वर्षाकालीन मटर उत्पादन के लिए सामुदायिक और वन भूमि को शाकनाशियों के माध्यम से साफ करने की प्रथा, रासायनिक कृषि पर अत्यधिक निर्भरता पैदा करती है।

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भोपाल: व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की।

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पर्यावरण दिवस पर ओडिशा का नारा- ‘मिट्टी बेचने के लिए नहीं, पहाड़ मुनाफे के लिए नहीं’!

सिजिमाली का पूरा इलाका फरवरी के बाद से ही संघर्ष का क्षेत्र बन चुका था। आसमान में ड्रोन उड़ रहे थे, सड़कों पर पुलिस की गाड़ियां गश्‍त लगा रही थीं और गांवों में  पुलिस मार्च कर रही थी। सिजिमाली में वेदांता और कुटरुमाली में अदाणी को तीन साल पहले जब बॉक्साइट के भंडार पट्टे पर दिए गए थे, तभी से लोगों का लगातार दमन जारी है और उनके ऊपर मनगढ़ंत मुकदमे थोपे गए हैं।

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तटीय इलाकों में गहरा रहा है जलवायु परिवर्तन का संकट: रिपोर्ट

 महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाके एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संक्रमण के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इससे मुंबई उपनगर के गर्मियों के समय के अधिकतम तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है। यह गर्मी से बचने की योजनाओं की बढ़ती जरूरत पर जोर देता है।

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भोपाल गैस कांड: पर्यावरण मंत्री के बयान की पीड़ित संगठनों द्वारा कड़ी निंदा

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी ने कहा, “मंत्री का दावा सच्चाई से बहुत दूर है। वास्तविकता यह है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर से 400 मीट्रिक टन से भी कम जहरीला कचरा हटाया गया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह भोपाल में फैक्ट्री परिसर के अंदर और बाहर दबे कुल खतरनाक कचरे का मात्र 1 प्रतिशत है।”

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इंदौर: आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करता नाटक

नाटक 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर 1947 में देश की आजादी तक के कई आंदोलनों के बारे में दर्शकों को बताता है। नाटक आंदोलन के दौरान तीन अलग- अलग स्थानों पर जनता के संघर्ष की अनजानी सी पर सच्ची घटनाएं भी दर्शकों के सामने लाता है।

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