हिंदुत्व की भ्रामक अवधारणा के बरक्स भारत की विवेकवादी परंपरा

प्रकृति और मानव शरीर के सजग निरीक्षक के रूप में भारत के प्रारंभिक वैज्ञानिकों और दार्शनिकों ने मानवीय ज्ञानेन्द्रियों का अध्ययन किया, स्वप्न, स्मरण शक्ति और चेतना का विश्लेषण किया। उनमें जो सर्वश्रेष्ठ थे उन्होंने प्रकृति के द्वंद को गुणात्मक और परिमाणात्मक दोनों रूप से समझा तथा आधुनिक परमाणु सिद्धांत के एक प्रारंभिक ढांचे की भी परिकल्पना कर ली। यह तर्कवादी आधार ही था जिस पर भारतीय सभ्यता पल्लवित हुई।

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हिंदुत्‍व की सांस्‍कृतिक गुलामी से आज़ादी का रास्‍ता पेरियार ललई सिंह से होकर जाता है

ललई सिंह जी ने अपने वक्तव्य, कृतित्व, रचना, और प्रयासों से हजारों साल की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गुलामी से मुक्ति का रास्ता प्रशस्त किया। 80 और 90 के दशक तथा इक्कीसवीं सदी में उनके वारिसों ने उसके खिलाफ जाते हुए पूरी तरह से उस सामाजिक आंदोलन एवं जन जागरूकता के लंबे कार्यक्रम को रोक सा दिया है।

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