हिंदुत्‍व की सांस्‍कृतिक गुलामी से आज़ादी का रास्‍ता पेरियार ललई सिंह से होकर जाता है

ललई सिंह जी ने अपने वक्तव्य, कृतित्व, रचना, और प्रयासों से हजारों साल की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गुलामी से मुक्ति का रास्ता प्रशस्त किया। 80 और 90 के दशक तथा इक्कीसवीं सदी में उनके वारिसों ने उसके खिलाफ जाते हुए पूरी तरह से उस सामाजिक आंदोलन एवं जन जागरूकता के लंबे कार्यक्रम को रोक सा दिया है।

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