हिन्दी अखबारों में ब्राह्मण-बनिया गठजोड़ का संविधान-विरोधी और किसान-विरोधी चेहरा

आज के संपादकीय, संपादकीय पेज (यह हिन्दी का पहला अखबार है जहां इसके मालिक संजय गुप्ता संपादक की हैसियत से हर रविवार को कॉलम लिखते हैं) और ऑप-एड पेज ‘विमर्श’ पर छपे लेखों को देखें। वहां से जातिवाद की दुर्गंध भभका मारकर बाहर निकल रही है।

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नफ़रत फैलाने वाले विज्ञापन मीडिया में देने के खिलाफ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अपील

निराशा भरे इस वातावरण में कुछ कॉरपोरेट्स ने अपने उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार से एक नई आशा का संचार किया है। उन्होंने निर्णय किया है कि जो मीडिया चैनल घृणा और आपसी भेद-भाव फैलाते हैं, उन्हें वह अपने विज्ञापन नहीं देंगे। इस पहल और साहस के लिए वह प्रशंसा के पात्र हैं।

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