लॉकडाउन के तले सरकार ने मजदूरों को उनकी औकात दिखाने का काम किया है

पूर्ण रोजगार की एक नीति के सभी विचारों को नीतिगत चर्चा से दूर रखा जाता है और बेरोजगारी एवं विनाश को बढ़ने दिया जाता है. यह कदम मजदूरी को लेकर मोलभाव करने की मजदूरों की शक्ति को कमजोर करने की नीयत से सिर्फ मजदूरों की एक आरक्षित सेना नहीं बनाये रख रहा है, बल्कि मज़दूरों की उनकी औकात भी दिखाता है.

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मजदूर संकट के इस ऐतिहासिक दौर में केंद्रीय श्रम मंत्री की गुमनामी का सबब क्या है?

हैरानी इस बात की है कि वे ख़बरों से ग़ायब क्यों हैं. वह भी उस वक़्त में जब देशभर में करोड़ो श्रमिक कोरोना से ज़्यादा भूख से तड़प रहे हैं

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आधी रात खेला यूपी सरकार ने दांव, काग़ज़ी जंग में फंस गयीं कांग्रेस की बसें, मजदूर सड़क पर

16 मई को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के भेजे पत्र पर यूपी सरकार केवल काग़ज़ी खानापूर्ति करने में लगी थी

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सरकार जानती है, मजदूर बुरा नहीं मानते। लौट कर आएंगे, और कहां जाएंगे!

हर आने वाली सरकार ने श्रम कानूनों को लघु से लघुतर बनाया है. कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं के अभाव में दुर्घटनाओं में मजदूरों का मरना बदस्तूर जारी है. बुनियादी सुविधाओं की मांग, हड़ताल, यूनियन, सब जैसे बीते जमाने की बातें हो गयीं. श्रमिक जीवन उतरोत्तर बदतर होता गया, लेकिन किसी सरकार या समाज के लिए यह कभी मुद्दा नहीं रहा.

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इंसानियत का लॉकडाउनः मिनिसोटा से सीतापुर वाया आनंद विहार

हमारी सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक व्यवस्था में अगर इतनी बुनियादी इंसानियत होती तो इस लॉकडाउन में अनगिनत इंसानों और इंसानियत का दम वैसे नहीं घुटता जैसे इस वक़्त घुट रहा है।

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लॉकडाउन के दौरान देश भर में गरीबों-वंचितों की मदद कर रहे लोगों और संगठनों की सूची

आजीविका ब्यूरो इसी तरह के सभी संगठनों और व्यक्तियों की अद्यतन सूची जारी कर रहा है। रोज़ाना इस तरह के संगठनों और लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। उसी हिसाब से सूची में भी रोज़ परिवर्तन किए जा रहे हैं।

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