भारत में किसान और मजदूर के व्यावहारिक रिश्ते को सही तरीके से समझे जाने की ज़रूरत है

आज देश के कोने-कोने से मजदूर, कामगार, मेहनतकश और तमाम तरह से रोजी-रोटी के इंतजाम में शहरों में आए लोगों का कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थितियां पैदा होने पर गाँव भाग कर जानें के लिए मजबूर होना यह दर्शाता है कि इनका संबंध अभी भी निश्चित रूप से खेती-किसानी और किसान से है और इसलिए अब जरूरी हो जाता है कि उस रिश्ते को सही तरीके से समझा जाए।

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क्या किसानों को तबाह कर के पूरी की जाएगी भारतमाला परियोजना?

बिना ठोस तैयारी के सरकारें योजना तो शुरू कर देती हैं मगर बाद में जब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं तो फिर सरकार सख्ती पर उतरती है और किसान बगावत पर।

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लागत तो दूर, महंगाई की भी भरपाई नहीं करता यह समर्थन मूल्य: किसान सभा

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने मोदी सरकार पर किसानों के साथ कोरोना संकट में भी धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है

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