तिर्यक आसन: फ़ोटो-पोस्टर में जीवन काटती कमबलियों की आवारा फौज

आवारा फौज के कुछ सदस्य भोजन करने जाते हैं, अछूतों के घर। जब वे अछूतों के घर भोजन करने जाते हैं, तब अखबार में उनकी उदारता, सहिष्णुता के फोटो आते हैं। अगले दिन ‘फैक्ट चेक’ भी आता है- भोजन बाहर से मंगवाया गया था।

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तिर्यक आसन: परिवार और सामुदायिकता में लगा परजीवी स्टेट का कीड़ा

अपने प्रतिनिधियों की सरकार और अपने आविष्कारों पर जनता की निर्भरता देख स्टेट चिंतामुक्त हो गया है। हमारी चेतना पर वो तमाम पट्टियाँ बाँध चुका है। एक पट्टी खुलती है, तब तक राजनीति और धर्म के प्रतिनिधियों के सहयोग से नई पट्टी बाँध देता है।

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तिर्यक आसन: विश्वगुरु इंजीनियर्स का डीएनए टेस्टिंग लैब और ‘छोड़िए’ का दर्शन

हमने सदियों पहले ही दिमाग वाली मशीन बना ली है। हमारे यहाँ वो मशीनें आदम कही जाती हैं। आदम मशीनों के समूह में कोई आदम जाता है, तो मशीनें चिल्लाने लगती हैं- मारो, राक्षस आया। मशीन जाती है, तो स्वागत होता है- भाई आया। भाई आया।

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तिर्यक आसन: कवि प्रोफेसर डॉक्टर मौलिक जी और उनके चार अंगरक्षक

चुम्बक सिर्फ धातुओं को आकर्षित करता है। स्वार्थ ऐसा शक्तिशाली चुम्बक है जो हाड़-माँस से बने आदमियों को एक दूसरे से जोड़े रखता है। सात जन्मों की गाँठ सात दिन में टूट सकती है; स्वार्थ की गाँठ स्वार्थ की सिद्धि होने के बाद टूटती है।

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तिर्यक आसन: प्रौढ़ों के सेटलमेंट और नवढ़ों के स्‍टार्ट-अप वाला ‘न्यू इंडिया’ वाया बनारस

अमुक धर्म खतरे में है भी एक व्यवसाय है। स्टार्ट-अप का एक रूप है। इस व्यवसाय के माध्यम से जो सेटल हुए हैं, जिनको रोजगार मिला है, उनकी ठीक-ठीक संख्या बता पाना मुश्किल है क्योंकि इस स्टार्ट-अप से सेटल होने वालों की संख्या स्थिर होने का नाम ही नहीं ले रही।

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तिर्यक आसन: ‘हिन्दू खतरे में’ का लिंक और आहत देव का प्रसाद

उनकी एक दुकान है- मेंस सलोन। दुकान के बाहर नवढ़ों को वे ‘’हिंदू खतरे में है’’ का लिंक देते हैं। दुकान के अंदर मुसलमान कारीगरों से बाल-दाढ़ी बनवाते हैं। फेशिअल, ब्लीच कराते हैं। मसाज भी कराते हैं।

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तिर्यक आसन: गाँधी के अपभ्रंश और हाइजीनिक वैष्णवों का ब्लूप्रिन्ट

अफीम के डर से चाय मना कर दी थी। अंदाजा नहीं था कि बातों की अफीम खानी पड़ेगी। वो जारी रहा- महात्मा गांधी ने कहा था- पाप से घृणा करो, पापी से नहीं। तुम उल्टा करते हो। पापी से घृणा करते हो, पाप से नहीं। हमने महात्मा गांधी के कथन को पूरी तरह अपनाया है। हम पापी से घृणा नहीं करते। न ही पाप से। अधिक सहिष्णु कौन हुआ?

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तिर्यक आसन: विश्‍व का सबसे बड़ा गरीब गुंडा बनने के छोटे-छोटे नुस्‍खे

विकास के नाम पर जनता से लूट ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का भारतीय संस्करण है। लूट जितनी बढ़ेगी, रैंकिंग उसी अनुपात में सुधरेगी। लाखों करोड़ का कर्ज बट्टे खाते में डाल देने और कर्जदारों को दिवालिया घोषित करने से बिजनेस ‘ईजी’ हो जाता है।

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तिर्यक आसन: ठगी को भी रोजगार का दर्जा दिया जाए!

साधो, अपनी सरकार से नाराज होने वालों को मनाने के लिए नरेंद्र मोदी की जबान के जखीरे में रामबाण हथियार हैं। जिनका वार न जाए खाली। इसलिए प्रधानमंत्री कड़वी दवा देने से हिचकते नहीं हैं।

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तिर्यक आसन: विकास की रेसिपी और अपनी बीट से पौधे उगाने का अस्तित्‍ववादी हुनर

कभी रुपये की कीमत गिरने से प्रधानमंत्री अपनी गरिमा खोते थे, अब नहीं खोते। कभी जनता और विपक्ष पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की आग से झुलस जाते थे, अब नहीं झुलसते। पेट्रोल की धीमी आँच पर पक रही विकास की रेसिपी में अखिल भारतीय मंत्रिमंडल के खानसामों द्वारा प्रतिदिन डाले जाने वाले धर्म के चटपटे मसालों ने कीमतों को पचाना सिखा दिया है।

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