राष्ट्र एक व्यक्ति में बदल जाए, उससे पहले एक आंदोलन क्या राजनीतिक विपक्ष बन पाएगा?

यह बात अभी विपक्ष की समझ से परे है कि किसी एक बिंदु पर पहुँचकर अगर किसान आंदोलन किन्हीं कारणों से ख़त्म भी हो जाता है तो जो राजनीतिक शून्य उत्पन्न होगा उसे कौन और कैसे भरेगा। किसान राजनीतिक दलों की तरह पूर्णकालिक कार्यकर्ता तो नहीं ही हो सकते। और यह भी जग-ज़ाहिर है कि कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन को विपक्षी दलों का तो समर्थन प्राप्त है, किसानों का समर्थन किस दल के साथ है यह बिलकुल साफ़ नहीं है। टिकैत ने भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को सार्वजनिक तौर पर उजागर नहीं किया है।

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संसद खुलने पर आज किसानों के समर्थन में विपक्ष करेगा राष्ट्रपति के भाषण का बहिष्कार

इन दलों ने एक संयुक्‍त बयान जारी किया है। बयान में 26 जनवरी को दिल्‍ली में हुई घटनाओं को दुर्भाग्‍यपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि अगर उसकी निष्‍पक्ष जांच हुई तो केंद्र सरकार की मिलीभगत सामने आ जाएगी।

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