क्या मोदी बनारस में पार्टी और प्रधानमंत्री पद का भविष्य योगी के हाथों में सौंपने पहुंचे थे?

कोरोनाकाल की दूसरी लहर के दौरान भगीरथी गंगा द्वारा अपने कोमल शरीर पर बहती हुई लाशों की यंत्रणा बर्दाश्त कर लिए जाने के बाद अपनी पहली यात्रा में प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के कोरोना प्रबंधन को अभूतपूर्व घोषित करते हुए इतनी तारीफ़ की कि वहां उपस्थित मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भी भौचक्के रह गए होंगे।

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स्कूली शिक्षा का गहराता संकट और डिजिटल स्पेस में लटके बच्चों का भविष्य

जब ऑनलाइन कक्षाओं के सुचारू संचालन के दावे केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा बड़े जोर-शोर से लगातार किए जा रहे हैं तब यह यह दुःखद एवं चिंतनीय स्थिति कैसे बन गयी है?

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टीबी ने बढ़ाया आदिवासियों में कोरोना का खतरा, राष्ट्रीय औसत से भी अधिक आंकड़ा

भोपाल के एक चिकित्सा विषेशज्ञ नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहते हैं कि कोरोना और टीबी के लक्षण समान होने से भी गलफत हो जाती है। वे बतलाते हैं कि भारत में दुनिया के 26 फीसदी टीबी मरीज हैं जिनमें से अधिकांश आदिवासी अथवा खनन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। कोरोना की दोनों लहरों ने इन मरीजों के इलाज और संदिग्‍ध मरीजों की पहचान को बुरी तरह प्रभावित किया है।

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तन मन जन: कोरोना की तीसरी लहर के लिए कितना तैयार हैं हम?

सवाल है कि इस महामारी से जूझते हुए लगभग डेढ़ वर्ष के तजुर्बे के बाद भी क्या हम देश की जनता को यह आश्वासन दे सकते हैं कि हमारी सरकार एवं यहां की चिकित्सा व्यवस्था महामारी से जनता को बचाने एवं निबटने में सक्षम है?

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बनारस: जान जोखिम में डाल के लोगों को बचाने वाले ग्रामीण चिकित्सकों और पत्रकारों का सम्मान

जब सरकारी अस्पतालों और बड़े अस्पतालों में बेड और आक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ था उस समय दूरदराज के गाँवों में चिकित्सकजन ने बड़े ही जिम्मेदारी से पीड़ित और संक्रमित लोगों को चिकित्सा सुलभ करायी। इन चिकित्सकों के पास प्रायः बड़ी डिग्री नहीं होती लेकिन इनका विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज करने का अनुभव कहीं बहुत ज्यादा है और यही कारण था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इन चिकित्सकों ने ग्रामीण क्षेत्र में हजारों लोगों की जान बचायी।

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जलवायु, कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकट से निपटने में G7 देशों की तैयारी नाकाफ़ी

यदि ये नेतागण अक्टूबर में होने वाली G20 बैठक तक एकजुट नहीं होते हैं, तो COP26 बैठक का विफल होना तय है। फ़िलहाल सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा अब COP26 से पहले G7 नेताओं के लिए महत्वपूर्ण तारीख के रूप में निर्धारित की गयी है।

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तन मन जन: महामारी का राजनीतिक अर्थशास्त्र और असमानता का वायरस

जब लॉकडाउन में सभी जगह का उत्पादन बन्द था, पेट्रोल, डीजल की बिक्री भी बाधित थी, दुकानें बन्द थीं, गोदामों में तैयार माल डम्प थे, जीडीपी का ग्राफ नीचे जा रहा था तब इन अरबपतियों की सम्पत्ति दिन दूनी रात चौगुनी कैसे बढ़ रही थी? यह सवाल हर किसी की जिज्ञासा है।

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क्या तीसरी लहर से पहले खुल पाएंगे ग्रामीण PHC और CHC में लटके ताले?

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर नहीं है, वहां मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल रहा है। जो लोग गरीब हैं वो शहरों में जाकर इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में उनके पास एक ही चारा है झोलाझाप डॉक्टर। गांव के गरीब परिवारों का इलाज तो इन्हीं के भरोसे है। कोरोना के दौरान गांव में जैसे हालात बन रहे हैं, उसके दबाव में कोई इन झोलाझाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं कर सकता।

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क्या UP में कोविड मौतों की वास्तविक संख्या छुपायी गयी? कांग्रेस ने जारी किये चौंकाने वाले आँकड़े!

विशेषज्ञों का मानना है कि पहली लहर के दौरान आंकड़ों को सार्वजनिक न करना दूसरी लहर में इतनी भयावह स्थिति पैदा होने का एक बड़ा कारण था। जागरूकता का साधन बनाने की बजाय सरकार ने आँकड़ों को बाज़ीगरी का माध्यम बना डाला।

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अवसाद की महामारी: पहले बीमारी का डर, बाद में इलाज के खर्च का दोतरफा तनाव

लोग यह सोच-सोच कर परेशान और अवसादग्रस्त हो रहे हैं कि अगर लाख सावधानी के बावजूद भी उनको कोविड-19 हो गया तो क्या समय पर उनके इलाज के लिए साधन उपलब्ध हो पाएंगे और क्या वह इससे निजात पा सकेंगे।

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