बीते 16 अक्टूबर, 2026 की रात लगभग 10:45 बजे कालाहांडी जिले के भवानीपटना से डॉ. रैंडल सिक्वेरा और लक्ष्मण नायक को गिरफ्तार कर लिया गया। लक्ष्मण नायक ‘मा माटी माली सुरक्षा मंच’ और समाजवादी जन परिषद के प्रमुख दलित कार्यकर्ता हैं। वे रायगड़ा जिले में मार्शल आर्ट सिखाते हैं। डॉ. रैंडल सिक्वेरा कालाहांडी और रायगड़ा जिलों में आदिवासी समुदायों के बीच काम करते रहे हैं। उन्होंने एमबीबीएस के बाद जनरल मेडिसिन में एमडी की डिग्री प्राप्त की। वे मेडिको फ्रेंड्स सर्कल और जन स्वास्थ्य अभियान के सदस्य भी हैं। दोनों ही खनन और औद्योगीकरण के कारण पैदा हुए विस्थापन तथा संकट के खिलाफ संघर्षरत जन आंदोलनों के समर्थन और इंसानी रिहाइशों की रक्षा के लिए समर्पित हैं।
दक्षिण ओडिशा में अपनी जमीन, जंगल और जल-संसाधनों, झरनों, पहाड़ों और अपनी पहचान की रक्षा के लिए संघर्षरत आदिवासी और दलित समुदायों पर राज्य का दमन लगातार जारी है। जन आंदोलनों का समर्थन करने वाले खनन-विरोधी कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। ये गिरफ्तारियां उसी दमन चक्र का हिस्सा हैं।
दोनों को भवानीपटना के हिल टाउन स्थित डॉ. रैंडल के आवास से गैरकानूनी तरीके से उठाया गया। पुलिस की दो जीपों ने उनके आवास को घेर लिया। पुलिसकर्मियों में कई सादे कपड़ों में और कुछ वर्दी में थे। टाउन पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक (आइआइसी) प्रद्युम्न कुमार महापात्र के नेतृत्व में लगभग छह पुलिसकर्मी बिना कोई कारण बताए और बिना किसी वारंट या नोटिस के डॉ. रैंडल के घर में घुस गए। उन्होंने दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और उन्हें आधी रात को भवानीपटना के टाउन पुलिस थाने जबरन ले गए।
वकीलों, परिवार के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने उनके बारे में जानकारी हासिल करने तथा उनकी गिरफ्तारी का कारण जानने के लिए बार-बार प्रयास किए और पुलिस से अनुरोध किया, लेकिन कालाहांडी और रायगड़ा पुलिस ने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। 17 अक्टूबर की सुबह छह बजे से लेकर शाम 6:30 बजे तक उनके ठिकाने की कोई खबर किसी को नहीं थी, जब तक कि उन्हें रायगड़ा में उप-मंडलीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) के समक्ष पेश नहीं किया गया। दोनों को पूरी रात थाने में ही हिरासत में रखा गया था। इस दौरान उन्हें अपने वकीलों या परिवार के सदस्यों से मिलने अथवा संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई थी।
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17 अक्टूबर की दोपहर डॉ. रैंडल के आवास पर भेजे गए सूचना नोटिस में गलत उल्लेख किया गया कि उन्हें सुबह 10 बजे गिरफ्तार किया गया था। इसमें रात भर की उनकी गैरकानूनी हिरासत और उसके बाद उन्हें रायगड़ा जिले के काशीपुर ले जाए जाने का कोई उल्लेख नहीं था। लक्ष्मण नायक के मामले में उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें गिरफ्तारी संबंधी ऐसा कोई नोटिस उपलब्ध ही नहीं कराया गया। एसडीजेएम, रायगड़ा के समक्ष पेश किए जाने तक उनके ठिकाने और हिरासत में लिए जाने के कारण के बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं थी।
डॉ. रैंडल और लक्ष्मण नायक को काशीपुर पुलिस थाने में दर्ज केस 85/2026 के सिलसिले में एसडीजेएम, रायगड़ा के समक्ष पेश किया गया था। यह मुकदमा 6 और 7 अप्रैल की दरमियानी रात रायगड़ा जिले के कंटामाल गांव में हुई घटनाओं से संबंधित है जब भारी संख्या में पुलिसबल ने गांव में घुसकर अंधाधुंध लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे थे, जिसके चलते अनेक ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
इस घटना की एफआइआर में न तो लक्ष्मण नायक और न ही डॉ. रैंडल नामजद हैं। इसके बावजूद काशीपुर पुलिस ने दोनों के खिलाफ सिसिलेवार गंभीर धाराएं लगाई हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), धारा 191(2) और 191(3) (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना), धारा 310(2) (डकैती या सशस्त्र लूट), धारा 351(3) (मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने की धमकी देकर आपराधिक भयादोहन) सहित अन्य धाराएं- 126(1), 127(2), 132, 121(2), 296 और 190- शामिल हैं। इनके अलावा राज्य ने शस्त्र अधिनियम की धारा 27 भी लगाई है, जो गैरकानूनी गतिविधियों के लिए हथियारों और गोला-बारूद के कब्जे या इस्तेमाल से संबंधित है।
ये आरोप बेहद गंभीर हैं, पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और वेदांता-अडाणी के कॉरपोरेट हितों के लिए काम कर रहे राज्य तथा पुलिस की गहरी दुर्भावनापूर्ण मंशा को उजागर करते हैं कि वे आदिवासी-दलित समुदायों के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाना चाहते हैं और जन आंदोलनों का मनोबल तोड़ना चाहते हैं।
यह एफआइआर 6 और 7 अप्रैल की दरमियानी रात ओडिशा पुलिस द्वारा कंटामाल में किए गए क्रूर दमन के बाद दर्ज किए गए कई मुकदमों में से एक है, जब ग्रामीणों ने निषेधाज्ञा का सामूहिक उल्लंघन करते हुए पुलिसिया कार्रवाई का प्रतिरोध किया था। मई 2026 से कंटामाल के ग्रामीणों द्वारा लगातार भेजी गई शिकायतों के बाद भी न तो इन घटनाओं की जांच हुई है और न ही पुलिस के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। यह आपत्तिजनक और अन्यायपूर्ण है।
यहां बताना जरूरी है डॉ. रैंडल पहले ही 7 अप्रैल को दर्ज केस 87/2026 में अग्रिम जमानत पा चुके हैं, जिसमें वे नामजद हैं। अब उसी घटना से संबंधित केस संख्या 85/2026 के आधार पर लक्ष्मण नायक और डॉ. रैंडल की गिरफ्तारी की गई है, जबकि इसमें दोनों नामजद नहीं हैं। यह इस बात की ओर संकेत करता है कि कालाहांडी-रायगड़ा जिलों में खनन का विरोध करने और लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध व्यक्त करने वालों की गिरफ्तारियां मनमाने ढंग से की जा रही हैं। इसके अलावा, 7 अप्रैल को हुई एक ही घटना के संबंध में तीन अलग-अलग एफआइआर- 85, 86 और 87- दर्ज किया जाना भी कानूनी दृष्टि से सवालों के घेरे में है।
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एसडीजेएम के समक्ष पेश किए जाने के दौरान दोनों से उनकी हिरासत की अवधि के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा गया जबकि हिरासत के दौरान हुई हिंसा या दुर्व्यवहार का पता लगाने की यह सामान्य प्रक्रिया है। हिरासत और गिरफ्तारी के दौरान दोनों के साथ दुर्व्यवहार के ब्योरे डॉ. रैंडल ने खुद ही अदालत को बताए, कि कैसे बिना किसी जब्ती मेमो और प्रोटोकॉल का पालन किए उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए। साथ ही यह भी बताया कि 17 अक्टूबर की सुबह छह बजे उन्हें भवानीपटना से ले जाया गया, लेकिन न तो उन पर लगाए गए आरोपों की जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। शाम 6:30 बजे एसडीजेएम, रायगड़ा के समक्ष पेश किए जाने तक उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। एसडीजेएम ने डॉ. रैंडल के इन बयानों को दर्ज नहीं किया। हमें शक है कि दोनों कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन के साथ छेड़छाड़ कर के उनके खिलाफ झूठे डिजिटल साक्ष्य गढ़े जा सकते हैं। लक्ष्मण नायक को भी बयान दर्ज कराने का अवसर नहीं दिया गया। न ही उनके परिवार को बीएनएसएस की धारा 48 के तहत गिरफ्तारी की सूचना देने वाले नोटिस की प्रति उपलब्ध कराई गई। बाद में दोनों को रायगड़ा की उप-जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील संगठनों, आंदोलनों तथा व्यक्तियों से हम अपील करते हैं कि जल, जंगल और जमीन के अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे ओडिशा के संघर्षरत लोगों के प्रति वे एकजुटता व्यक्त करते हुए उनके खिलाफ थोपे गए सभी आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की मांग करें।
भुवनेश्वर स्थित कनसर्न्ड सिटिज़ंस कमेटी की ओर से जारी वक्तव्य
18 अक्टूबर, 2026, रात 12 बजे
अनुमोदन
प्रो. स्वाधीन पटनायक
श्रीमती कृष्णा मोहंती
प्रफुल्ल सामंतराय
प्रो. सुमित्रा पटेल
रंजना पाढ़ी
देब प्रसाद राय
एड. विश्वप्रिय कानूनगो
डॉ. विश्वजीत
शरण्या
श्रीकांत मोहंती
देबरंजन
प्रमोदिनी प्रधान
श्रीमंत मोहंती
निगमानंद सारंगी
सिद्धार्थ कार
प्रकाश सामंतसिंघार
नरेंद्र मोहंती एवं अन्य
संपर्क: ccfodisha@gmail.com

