ओडिशा: खनन कंपनियों का विरोध कर रहे नेताओं की गिरफ्तारी पर सरोकारी नागरिकों का निंदा बयान


भुवनेश्वर, ओडिशा : 10 सितंबर 2026 को शाम लगभग 4:30 बजे, नियमगिरि सुरक्षा समिति के डोंगरिया कोंध नेता लद सिकाका एक मामले में लांजीगढ़ न्यायालय से जमानत मिलने के बाद अपने वकील और छह मित्रों के साथ अपने गांव लौट रहे थे। तभी कल्याणसिंहपुर के पास एक सशस्त्र पुलिस दल ने उनके वाहन को रोक लिया। कल्याणसिंहपुर थाने के आईआईसी, केसिंगा के एसडीपीओ और बिस्वनाथपुर थाने के आईआईसी के नेतृत्व वाली पुलिस टीम उन्हें जबरन अपने साथ ले गई। इस घटना के दो घंटे के भीतर वेदांत की सिजिमाली बॉक्साइट खनन परियोजना का विरोध कर रहे दो प्रमुख गांवों—काशीपुर प्रखंड के कांटामाल और थुआमूल रामपुर प्रखंड के तालामपदर—में सशस्त्र पुलिस बल तैनात कर दिया गया। गांवों में भय और आतंक फैल गया।

हम, कंसर्न्ड सिटिज़न्स फोरम के रूप में, वकीलों, मानवाधिकार संगठनों, ट्रेड यूनियनों, नागरिक समूहों और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों के साथ, ओडिशा पुलिस द्वारा आदिवासी नेता लद सिकाका की हिंसक गिरफ्तारी और सिजिमाली के गांवों में पुलिस की सशस्त्र मौजूदगी की कड़ी निंदा करते हैं तथा लद सिकाका की तत्काल रिहाई और इन दोनों गांवों से पुलिस की घेराबंदी हटाने की मांग करते हैं।

यह अत्यंत चिंताजनक है कि 24 घंटे बीत जाने के बाद भी लद सिकाका को रायगड़ा न्यायालय में पेश नहीं किया गया था। उन्हें कहां रखा गया है, इसकी भी कोई सूचना जारी नहीं की गई थी। घटना के समय मौजूद उनके वकील और मित्रों ने रायगड़ा के एसपी को लिखित शिकायत दी, लेकिन उन्हें केवल इंतजार करवाया गया। पूरा समुदाय चिंता में था। फिर खबर आई कि सिकाका को कई स्थानों के बीच ले जाया गया और 10 सितंबर की रात 10:30 बजे उन्हें अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। यह उल्लेखनीय है कि नौ वर्ष पुराने एक मामले (संख्या 349/2017) के आधार पर 15 मार्च को लांजीगढ़ जेएमएफसी ने लद सिकाका को फरार घोषित कर दिया था और कल्याणसिंहपुर थाने के प्रभारी को उनकी संपत्ति जब्त करने का निर्देश दिया था। लद सिकाका ने ओडिशा उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने एफआईआर रद्द कर दी थी।



जनता के अधिकारों और उनके सामूहिक आंदोलन पर इस ताजा हमले की पृष्ठभूमि में यह याद रखना जरूरी है कि फरवरी 2023 में वेदांत कंपनी को सिजिमाली बॉक्साइट ब्लॉक का खनन पट्टा दिए जाने के बाद जुलाई 2023 से कालाहांडी जिले के थुआमूल रामपुर प्रखंड और रायगड़ा जिले के काशीपुर प्रखंड के ग्रामीण मां माटी माली सुरक्षा मंच के नेतृत्व में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सभी स्तरों के अधिकारियों को अनगिनत आवेदन और ज्ञापन दिए हैं। उनकी बात सुनने के बजाय स्थानीय प्रशासन, कंपनी के गुर्गों के साथ मिलकर, लोगों के बीच विभाजन पैदा कर उनकी एकता तोड़ने और आंदोलन को दबाने का काम कर रहा है। शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए ग्रामीणों के सामूहिक संकल्प को नष्ट करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि लोगों और आंदोलन को मनगढ़ंत मामलों के जरिये लगातार अपराधी बनाया जा रहा है।

पिछले तीन वर्षों में यहां कम से कम 43 पुलिस मामले दर्ज किए गए हैं और सौ से अधिक आदिवासी एवं दलित—महिलाएं और पुरुष दोनों—ओडिशा की जेलों में बंद किए गए हैं। उदाहरण के लिए, 8 मार्च 2026 से 8 अप्रैल 2026 के बीच केवल एक महीने में 24 लोगों को जेल भेजा गया, 217 लोगों को आरोपी बनाया गया और “अन्य” की संख्या कुल 1,140 रही। 7 अप्रैल को तड़के 3 बजे कांटामाल गांव में पुलिस द्वारा की गई अमानवीय और बर्बर ज्यादतियों ने केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया।

लोगों ने तथाकथित “विकास” के नाम पर राज्य की ताकत और दबाव का साहसपूर्वक सामना किया है और अब तक खनन कार्यों को रोकने में सफल रहे हैं।

वेदांत के साथ-साथ अदाणी की प्रस्तावित कुटरुमाली बॉक्साइट खनन परियोजना के खिलाफ भी व्यापक जन-विरोध हुआ है। अप्रैल 2026 में जब पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा की गई, तो स्थानीय निवासियों ने इस आधार पर इसका कड़ा विरोध किया कि उनकी उस मांग की अनदेखी की जा रही है जिसमें खनन को पूरी तरह बंद करने की बात कही गई थी। ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसे रद्द करना पड़ा।

नियमगिरि सुरक्षा समिति ने दक्षिण ओडिशा के सभी जन आंदोलनों के साथ मिलकर इन सभी आंदोलनों के प्रति लगातार एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया है तथा आदिवासी भूमि और पहाड़ियों, जंगलों, नदियों और जलधाराओं की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष की अपील की है। परिणामस्वरूप, नियमगिरि सुरक्षा समिति के सलाहकार और सोशलिस्ट पीपुल्स काउंसिल के राष्ट्रीय संपादक लिंगराज आज़ाद, जो सिजिमाली और कुटरुमाली दोनों में सक्रिय रहे हैं, 25 मार्च से अब भी भवानीपटना जेल में बंद हैं। उन्हें एक मामले में जमानत मिल चुकी है, लेकिन दूसरे झूठे मामले में उन पर ऐसी पाबंदियां लगाई गई हैं कि वे जेल से बाहर नहीं आ सकते।

थुआमूल रामपुर प्रखंड के माझीगांव निवासी और मां माटी माली सुरक्षा मंच के प्रमुख सदस्य हीरामल नायक को भी पुलिस ने 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। वे 2025 की शुरुआत में कुछ महीनों की जेल की सजा पहले ही काट चुके हैं। 11 सितंबर को थुआमूल रामपुर अदालत में उन्हें जमानत नहीं दी गई क्योंकि इसी तरह उन पर एक नया और मनगढ़ंत मामला डाल दिया गया।


ओडिशा: कालाहांडी में जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन, ज्ञापन

पर्यावरण दिवस पर ओडिशा का नारा- ‘मिट्टी बेचने के लिए नहीं, पहाड़ मुनाफे के लिए नहीं’!


हमारा दृढ़ विश्वास है कि लद सिकाका, लिंगराज आज़ाद और हीरामल नायक जैसे नेताओं की गिरफ्तारी, या कांटामाल और तालामपदर के ग्रामीणों की घेराबंदी, अलग-अलग या एक-दूसरे से असंबद्ध घटनाएं नहीं हैं; बल्कि ओडिशा में खनन और औद्योगीकरण को हर संभव तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल के महीनों में केंद्र और राज्य दोनों सरकारें पूर्वी घाट पर्वतमाला की बॉक्साइट खदानों को एक के बाद एक अलग-अलग कंपनियों को पट्टे पर दे रही हैं—मसलन, नंदापुर प्रखंड की बाल्दा बॉक्साइट खदान अदाणी को; नारायणपटना प्रखंड की कर्णपोडीकोंडा खदान और थुआमूल रामपुर की करलापाट खदान वेदांत को; तथा पट्टांगी सेरुबांधा खदान एनएएलसी को। रायगड़ा जिले के काशीपुर-टिकरी क्षेत्र में चार और बॉक्साइट खदानों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। ओडिशा के एल्युमिनियम क्षेत्र में अदाणी की 1.10 लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पूरे दौर में स्थानीय समुदाय, विशेषकर दलित और आदिवासी समूह, अपनी आजीविका, घरों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए इन खनन कंपनियों का विरोध कर रहे हैं और कई स्थानों पर उन्होंने सफलतापूर्वक खनन रोक दिया है। पर्यावरणविद, विभिन्न राजनीतिक समूह, ट्रेड यूनियन, लोकतांत्रिक संगठन और यहां तक कि सेवानिवृत्त नौकरशाह भी ओडिशा सरकार से खनन कार्य रोकने का आग्रह कर रहे हैं। इसलिए राज्य प्रशासन ने खनन कंपनियों की मदद करते हुए स्थानीय नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं और कांटामाल तथा तालामपदर जैसे संघर्ष के मजबूत केंद्रों वाले गांवों की घेराबंदी कर दी है। स्पष्ट उद्देश्य खनन-विरोधी आंदोलन को खत्म करना और साथ ही खनन को सुगम बनाने के लिए सड़क, रेलवे आदि जैसी लॉजिस्टिक अवसंरचना के तेजी से विस्तार की जमीन तैयार करना है। वे जो संदेश दे रहे हैं, वह साफ है: खनन कंपनियों के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है और उस आवाज को कुचल दिया जाएगा।

हमें गहरी आशंका है कि खनन को सुगम बनाने के लिए सभी लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की ओडिशा सरकार की अपनाई जा रही राह और भी भयावह परिस्थितियों का संकेत देती है। वर्ष 2000 का काशीपुर और वर्ष 2006 का कलिंगनगर उन लोगों पर इस्तेमाल की गई पुलिस हिंसा की हद के गवाह हैं जो अपनी जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे। “विकास” के नाम पर संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित काशीपुर और थुआमूल रामपुर के क्षेत्र तेजी से संघर्ष क्षेत्रों में बदल रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेलगाम खनन से पूर्वी घाट पर्वतमाला की जैव-विविधता और जल संसाधनों को अपूरणीय क्षति होगी, जिसका असर पूरे ओडिशा पर पड़ेगा। ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है, यह देखना कठिन नहीं है कि निष्कर्षण-आधारित खनन उद्योग, जिसमें अत्यधिक मुनाफा राज्य से बाहर चला जाता है और केवल शक्तिशाली निजी हितधारकों के हिस्से में आता है, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को पूर्ण अंधकार में धकेल देगा।

हम सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और देश के कानून का सम्मान करने तथा इन पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में शांति और सह-अस्तित्व को शीघ्र बहाल सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।

हम, सरोकारी नागरिक निम्‍न मांगें करते हैं:

▪ लद सिकाका, लिंगराज आज़ाद और हीरामल नायक की तत्काल रिहाई।

▪ कांटामाल और तालामपदर गांवों से सशस्त्र पुलिस बलों की वापसी, ताकि ग्रामीण अपना दैनिक जीवन और नियमित आजीविका संबंधी गतिविधियां जारी रख सकें।

▪ सभी बॉक्साइट खनन पट्टों को रद्द किया जाए और इस प्रकार उन लोगों की जनमत का सम्मान किया जाए जिन्होंने सदियों से इस क्षेत्र की रक्षा की है और जो अपनी भूमि, पहाड़ियों, नदियों और देवताओं के इस खुले विनाश से कोई स्थायी लाभ नहीं देखते।


समर्थन/अनुमोदन देने वाले:

1. Prafulla Samantara, Environmentalist

2. Krishna Mohanty, Gandhian Leader

3. Sudhir Pattnaik, Journalist and Social Activist

4. Biswapriya Kanungo, Advocate and Human Rights Activist

5. Ranjana Padhi, Author and Feminist Activist

6. Anil Kumar Mallick, State Vice President, Bhim Army, Odisha

7. Dr. Biswajit, Gandhi Peace Foundation

8. Srimanta Mohanty, Secretary, Ganatantrik Adhikar Surakshya Sangathan (GASS)

9. Narendra Mohanty, Advocate and Convenor, Campaign against Fabricated Case and NAPM (Odisha)

10. Deba Ranjan, Film Maker and Social Activist.

11. Bharat Majhi, Poet

12. Pratap Nayak, State Secretary, AIKMS

13. Kedar Sabar, All India Adivasi Forum

14. Mahendra Parida, General Secretary, AICCTU

15. Dandapani Mohanty, General Secretary, Forest Workers Union

16. Comrade Hena, Basti Suraksha Manch

17. Comrade Pramila, AIRWO

18. Comrade Tuna, Adivasi Bharat Mahasabha

19. Comrade Parvati, MNREGA Workers Union

20. Comrade Bichitra Kumar Patra, TUCI

21. Comrade Ramchandra Badtiya, Odisha Construction Workers Union

22. Comrade Gobind Ram Sahu, All India Revolutionary Farmers Organization

23. Comrade Minati Bhoi, Domestic Workers Union

24. Comrade Shankar, Odisha State Secretary, CPI (ML) Red Star

25. Nirakar Nayak, State Secretary, Chaasi Mulya Sangha, Odisha, AIKMKS

26. Siddharth Kar, Teacher and Social Activist

27. Rajan, Solidarity Activist, People’s Movements

28. Sharanya, Solidarity Activist, Adivasi Movements, Koraput

29. Pranab Jena, CPDRS

30. Sushant Jena, State Co-Convenor, AIFTU (New)

31. Sini Soi, Adivasi Leader, Kalinganagar

32. Saroj Mohanty, Poet

33. Sameer Ranjan, Poet

34. Lenin Kumar, Poet

35. Rumita Kundu, Political Prisoners Committee

36. Pramodini Pradhan, PUCL

37. Gargy Satapathy, Journalist

38. Surendra Tapasu, Political Social Activist

39. Nigam, Author and Social Activist

40. Sangram Mallick, President, Ambedkar Lohia Vichar Manch

41. Prashant Paikrai, Spokesperson, Jindal-POSCO Pratirodh Sangram Samiti

42. Dhananjay Deep, All Odisha Scheduled Caste Federation

43. Digambar Duria, Advocate, Bhawanipatna (Dharamgarh)

44. Suresh Sangram, Samajwadi Jan Parishad, Bhawanipatna

45. Upendra Bag, People’s Movements Activist, Raygada

46. Bhabani Shankar Jena, INTUC, Raygada

47. Krushna Sikaka, Niyamgiri Suraksha Samiti

48. Har Baniya, Jai Kisan Andolan, Bargarh

49. Balabhadra Mallick, Chaasi Mulya Suraksha Samiti, Kandhamal

50. Purna Chandra Pradhan, Senior Advocate, Bhawanipatna

51. Babaji Charan Jena, Social Activist

52. Lilu Das, Bahujan Andolan

53. Prof. Surendra Kumar Jena

54. Sachidanand Majhi, Ma Mati Mali Suraksha Mancha

55. D. G. Pradhani, Adivasi Samaj

56. Deb Prasad Rai, Lohia Academy, Bhubaneswar

57. Tirupati Gomanga, Adivasi Sangharsh Morcha

58. Rajib Sagaria, Journalist

59. Satya Banchor, Lower Sukhtel Budi Anchal Sangram Parishad

60. Satya Mahar, Sachetan Nagrik Mancha, Kalahandi

61. Abani Gaya, Advocate, Berhampur

62. Khusiram Jani, Adivasi Rights Activist

63. Rajib Ratan, Journalist

64. Ananta, Lokmukti Sangathan, Jharsuguda

65. Gopinath Majhi, Campaign for Survival and Dignity, Odisha

66. Biranchi Bariha, Campaign for Survival and Dignity, Odisha

67. Bhishma Paangi, Campaign for Survival and Dignity, Odisha

68. Bijay Swain, Campaign for Survival and Dignity, Odisha

69. Dr Sricharan Behera, Researcher

70. Baghambar Pattnaik, Human Rights Activist

71. Damodar Behera, Left Activist

72. Subhash Sahu, Advocate

73. Bijay Kumar Panda, Advocate

74. Sharmishta Nath, Poet

75. Rashmi Ranjan Jena, Advocate

76. Khirod Rout, Advocate

77. T.S. Swaraj, Advocate, Odisha High Court

78. Bikas Swain, Advocate, Odisha High Court

79. Bismoy Rai, Advocate, Odisha High Court

80. Babita Mahapatra, Poet

81. Radhamohan, Social Activist

82. Prakash Kumar Samantsinghar, RTI Activist

83. Subhas Sendha, Social Activist

84. Bichitra Biswal, Columnist

85. Azad Swati, Social Activist

86. Anurag Das, Advocate

87. Swarup Kumar Pal, Advocate


(प्रेस विज्ञप्ति)

संपर्क ईमेल: ccfodisha@gmail.com


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

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