दूरदर्शी विचारक और बड़े संगठनकर्ता थे पी.सी. जोशी – कॉमरेड डी. राजा
उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में “वर्ग संघर्ष” का अर्थ है आर्थिक शोषण, सामाजिक असमानता और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई, बेरोज़गारों व महिलाओं के रोजगार के लिए लड़ाई।
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उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में “वर्ग संघर्ष” का अर्थ है आर्थिक शोषण, सामाजिक असमानता और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई, बेरोज़गारों व महिलाओं के रोजगार के लिए लड़ाई।
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रैली को संबोधित करते हुए मनरेगा मजदूर यूनियन की रेनू पटेल ने कहा कि संविधान पर जितना खतरा बढ़ेगा उतना ही बाबा साहब का मान बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि बाबा साहब की जयंती आज समाज के सभी वर्गों के लोग मना रहे हैं। हम लोग लोगों को लगातार संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं जो कि आगे भी जारी रहेगा।
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में अमर उजाला के पत्रकारों के खिलाफ पेपर लीक प्रकरण में हुआ मुकदमा और मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पत्रकारों व रंगकर्मी को थाने में हिरासत में अर्धनग्न परेड करवाए जाने का मामला अब केंद्रीय मानवाधिकार आयोग के पास पहुंच गया है। दोनों ही मामलों को मानवाधिकार जन निगरानी समिति ने आयोग में दर्ज करवाया है।
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भारत के उच्च अध्ययन संस्थानों की अपनी नैतिक शक्ति इतनी कमजोर रही है कि वे ऐसे मामले में चूं तक नहीं बोल पाते हैं जबकि ब्रॉकपोर्ट कॉलेज ने अपनी स्वायत्तता के पक्ष में राजनीतिज्ञों और शासक कौम का डट कर मुकाबला किया।
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भारत लगभग 15 मिलियन मोटे बच्चों का घर है। यह चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। औसतन 15 प्रतिशत भारतीय बच्चे किसी न किसी रूप में मोटापे का सामना कर रहे हैं।
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बीते पचास वर्षों से एक परिवार हिंदी की इस 128 साल पुरानी महान संस्था पर क़ब्ज़ा जमाये बैठा था। इस निर्णय के बाद संस्था को उस शिकंजे से मुक्ति मिल गयी है। इस बीच संस्था में बौद्धिक संपदा और ज़मीन-जायदाद के घपले से जुड़ी ख़बरें समय-समय पर प्रकाश में आती रही हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की भी इस संस्था पर नज़र बनी रही है और पिछले बरस उसने यहाँ हुए चुनावों की जाँच का आदेश स्थानीय न्यायालय को दे रखा था।
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नाहिदा आरिफ ने कहा कि आजादी के आंदोलन और उससे भी सैकड़ों साल पहले से भारत साझी विरासत और मेल जोल की परंपरा को समेटे हुए निर्मित हुआ है जिसे आज कुछ ताकतें खत्म कर देना चाहती हैं। हमें इनसे सावधान रहना होगा।
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एक पँक्ति में एजाज अहमद का परिचय यह है कि वो हमारे समय के अग्रणी मार्क्सवादी विचारकों में एक थे। उनकी किताब ‘इन थियरी…’ को साहित्य के सैद्धान्तिक विमर्शों की एक जरूरी किताब माना जाता है। मार्क्सवादी विचारकों से प्रभावित हम जैसे नौजवानों के लिए एजाज अहमद एक रोलमॉडल की तरह थे।
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एक एक्टिविस्ट के रूप में मुझे इस बात की खुशी है कि इलाहाबाद में- जो जनवादी कार्यकर्ताओं का मुख्य केन्द्र है- वहां पर ऐसी कई महिला एक्टिविस्ट हैं जिन्होंने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अपना एक अलग मुकाम बनाया है। उनके लिए शिक्षा केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का जरिया न रहकर ज्ञान प्राप्ति और समाज परिवर्तन का भी माध्यम बना।
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कॉमरेड गोविंद पानसरे की स्मृति में प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई द्वारा आयोजित बैठक में विनीत ने कहा कि यह विडंबना ही है कि कॉमरेड पानसरे को देश में उनकी मृत्यु के बाद ही पहचाना जा सका जबकि महाराष्ट्र में तो उनके जनसंघर्षों और लेखन की वजह से उन्हें सभी जानते हैं।
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