एक सज़ायाफ्ता बौद्धिक के हक़ में एक अमेरिकी कॉलेज का प्रतिरोध

भारत के उच्च अध्ययन संस्थानों की अपनी नैतिक शक्ति इतनी कमजोर रही है कि वे ऐसे मामले में चूं तक नहीं बोल पाते हैं जबकि ब्रॉकपोर्ट कॉलेज ने अपनी स्वायत्तता के पक्ष में राजनीतिज्ञों और शासक कौम का डट कर मुकाबला किया।

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इतिहास में किस रूप में याद की जाएंगी लता मंगेशकर?

दुनिया में आज तक किसी विचारहीन कलाकार ने इतिहास में स्थान नहीं बनाया है, चाहे वह अपने जीवन-काल में कितना भी महान क्यों न लगता रहा हो। लता के गीत भले ही कुछ अरसे तक जीवित रहें, लेकिन एक कलाकार के रूप में लता इतिहास के कूड़ेदान में वैसे ही जाएंगी, जैसे कोई टूटा हुआ सितार जाता है, चाहे उसने अपने अच्छे दिनों में कितने भी सुंदर राग क्यों न निकाले हों।

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संक्रमण काल: साहित्य का नया रास्ता

वर्चुअल दुनिया से संबंधित इन कविताओं और अक्कड़-बक्कड़ जैसे पॉडकास्टों व साहित्य और तकनीक के सम्मिश्रण के लिए जारी अनेकानेक कोशिशों से गुजरते हुए आशा बनती है कि पुराने मिजाज का हिंदी साहित्य भी देर-सबेर साहित्य के नए रास्तों को स्वीकार करेगा।

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संक्रमण काल: उत्तर-मानववाद की आहट

आज हम उत्तर सत्य और उत्तर मानववाद (Post Truth & Post Humanism) के ज़माने में हैं। समाज में जो हाशिए के लोग हैं, मेहनतक़श लोग हैं, उन्हें ख़त्म कर देने की कोशिशें हो रही हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी रणनीति को नए विचारों और सन्दर्भों में निरंतर मांजते रहें।

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संक्रमण काल: महामारी के दौर में डॉक्टरों की भूमिका, सीमाएं और प्रोटोकॉल के कुछ सवाल

कोविड जानलेवा नहीं है। अधिकांश मामलों में हमारा शरीर उससे लड़ सकता है और परास्त कर सकता है। मानवजनित अफरातफरी, जिसके सुनियोजित होने की पूरी आशंका है, ने उसे जानलेवा बना दिया है।

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डिजिटल और सोशल मीडिया के नए नियम क्या कहते हैं?

इन नए नियमों में नागरिकों की प्राइवेसी की कोई चर्चा नहीं है, जो दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, न ही यह स्थानीय मीडिया संस्थानों की मेहनत को हड़पने वाले इन मध्यवर्ती प्लेटफार्मों को किसी प्रकार के भुगतान के लिए बाध्य करता है।

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बहुजन समाज के आईने में COVID-19 से बनती दुनिया और कार्यभारों का एक अध्ययन

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और विश्व असमानता डेटाबेस, पेरिस के सह-निदेशक थॉमस पिकेटी का अनुमान है कि 2020 की यह कोविड-19 महामारी दुनिया के अनेक देशों में बड़े परिवर्तनों का वाहक बनेगी। मुक्त-व्यापार और बाजार की गतिविधियों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाये जाने संबंधी विमर्श को चुनौती मिलेगी और इनकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की मांग समाज से उठेगी।

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COVID-19: सांख्यिकी, विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना पर एक जिरह

कोविड से होने वाली मौतों से संबंधित आधिकारिक आँकड़े किस क़दर झूठे और भ्रामक हैं, इसके प्रमाण अन्य अध्ययनों में भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन ने स्वीकार किया है कि उसके आँकड़े अतिशयोक्तिपूर्ण थे। आँकड़ा जमा करने की ग़लत पद्धति के कारण उन लोगों की मौत को भी कोविड से हुई मौत में जोड़ दिया गया जिनकी मौत की मुख्य वजह कुछ और ही थी।

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COVID-19: कथित कांस्पिरेसी थ्योरी किसके खिलाफ है?

इन प्रतिबंधों का विरोध करने वालों की राजनीति चाहे जो भी हो, लेकिन हमें यह तो देखना ही चाहिए कि यह किसके खिलाफ है। साथ ही यह भी समझने की कोशिश भी करनी चाहिए कि एक वैचारिक समूह के रूप में हम किसके पक्ष में खड़े हो रहे हैं।

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सच्ची रामायण और हिंदी का कुनबावाद: संदर्भ ललई सिंह यादव

श्री यादव ने खुद को उत्तर भारत के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता ललई सिंह का अनन्य भक्त और घोर समर्थक सिद्ध करने की कोशिश की है, हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि उनकी इस भक्ति का मूल आधार क्या है?

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