बहुजन समाज के आईने में COVID-19 से बनती दुनिया और कार्यभारों का एक अध्ययन

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और विश्व असमानता डेटाबेस, पेरिस के सह-निदेशक थॉमस पिकेटी का अनुमान है कि 2020 की यह कोविड-19 महामारी दुनिया के अनेक देशों में बड़े परिवर्तनों का वाहक बनेगी। मुक्त-व्यापार और बाजार की गतिविधियों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाये जाने संबंधी विमर्श को चुनौती मिलेगी और इनकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की मांग समाज से उठेगी।

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COVID-19: सांख्यिकी, विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना पर एक जिरह

कोविड से होने वाली मौतों से संबंधित आधिकारिक आँकड़े किस क़दर झूठे और भ्रामक हैं, इसके प्रमाण अन्य अध्ययनों में भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन ने स्वीकार किया है कि उसके आँकड़े अतिशयोक्तिपूर्ण थे। आँकड़ा जमा करने की ग़लत पद्धति के कारण उन लोगों की मौत को भी कोविड से हुई मौत में जोड़ दिया गया जिनकी मौत की मुख्य वजह कुछ और ही थी।

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COVID-19: कथित कांस्पिरेसी थ्योरी किसके खिलाफ है?

इन प्रतिबंधों का विरोध करने वालों की राजनीति चाहे जो भी हो, लेकिन हमें यह तो देखना ही चाहिए कि यह किसके खिलाफ है। साथ ही यह भी समझने की कोशिश भी करनी चाहिए कि एक वैचारिक समूह के रूप में हम किसके पक्ष में खड़े हो रहे हैं।

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सच्ची रामायण और हिंदी का कुनबावाद: संदर्भ ललई सिंह यादव

श्री यादव ने खुद को उत्तर भारत के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता ललई सिंह का अनन्य भक्त और घोर समर्थक सिद्ध करने की कोशिश की है, हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि उनकी इस भक्ति का मूल आधार क्या है?

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