UP: सरकार से ब्राह्मण वोटर की नाराजगी का मुद्दा क्या फर्जी है?

ब्राह्मण वोटर सामान्‍यत: मंदिर निर्माण, हिंदुत्व, अनुच्‍छेद 370 के जम्‍मू-कश्‍मीर से हटाए जाने, तीन तलाक, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर काफी उत्साहित नजर आते हैं। कई ऐसे ब्राहमण हैं जो बीजेपी सरकार की बहुत सी नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी से काफी नाराज भी हैं, लेकिन वोट के सवाल पर मुद्दा बदल जाता है।

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एक उदार समाजवादी विचारधारा ही भाजपा की काट हो सकती है: अखिलेश यादव

प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समाजवाद की उदार विचारधारा और अपने पिछले कार्यकाल के ठोस कामों में भरोसा जताते हैं। उनका मानना है कि इस बार का चुनाव 2017 की तरह फर्जी नहीं, असली मुद्दे पर होगा। लखनऊ में तमाम मुद्दों पर उनके साथ वरिष्‍ठ पत्रकार अरुण कुमार त्रिपाठी की हुई लंबी बातचीत के महत्‍वपूर्ण अंश।

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किसान संसद में विद्युत संशोधन विधेयक का अंतिम प्रस्ताव जारी, तमिलनाडु से भी आ रहे हैं किसान

भारतीय संसद के समानांतर किसान संसद के 8वें दिन, विद्युत संशोधन विधेयक पर बहस और कार्यवाही जारी रही। यह संयोग से भारत सरकार द्वारा विरोध कर रहे किसानों को औपचारिक वार्ता के दौरान आश्वासन देने के बावजूद कि वह विद्युत संशोधन विधेयक को वापस ले लेगी, संसद के मानसून सत्र के कार्यावली में सूचीबद्ध है। किसान संसद द्वारा अनजाने में, इस पर एक प्रस्ताव संसद के सातवें दिन जारी किया गया था, लेकिन एक पूर्ण बहस और विचार-विमर्श पर आधारित अंतिम प्रस्ताव आज जारी किया गया है।

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हरियाणा भाजपा की तिरंगा यात्रा-किसानों को भड़काने और बदनाम करने की साज़िश है: SKM

संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा के किसानों से भाजपा की साज़िश में न फसने की अपील की। एसकेएम ने कहा कि भाजपा की हरियाणा इकाई की प्रस्तावित “तिरंगा यात्रा” मुख्य रूप से किसानों को भड़काने के लिए है। एसकेएम ने किसानों से आग्रह किया कि वे भाजपा की इस कूटनीति को समझें और राष्ट्रीय ध्वज की आड़ में इस गंदी रणनीति को सफल न होने दें। एसकेएम ने कहा कि इस यात्रा का विरोध नहीं किया जाएगा और राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा भी सुनिश्चित की जाएगी। एसकेएम ने स्पष्ट किया कि भाजपा, जजपा और उनके नेताओं के खिलाफ बहिष्कार/काले झंडे के विरोध के अन्य सभी कार्यक्रम जारी रहेंगे।

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शहीद उधम सिंह के शहादत दिवस को ‘साम्राज्यवाद विरोधी दिवस’ के रूप में मनाया गया: SKM

किसानों पर तरह-तरह के झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाने के बाद, “अय्याशजीवी” एक नया प्रयास है – लाखों मेहनती, शांतिपूर्ण और दृढ़ किसानों की सच्चाई इन प्रयासों से दबाया नहीं जा सकता है – किसानों के सत्य पर आधारित यह आंदोलन विजयी होगा।

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उत्तर प्रदेश में विपक्ष क्या संगठित होकर चुनाव को चेहरे से हटा कर मुद्दों पर खड़ा कर पाएगा?

अगला चुनाव बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा होगा जिसमें जीत कम सीटों के फासले से होगी, हालांकि भाजपा की जीत की संभावना प्रबल है लेकिन बिना अथक प्रयास किये यह भी आसान नहीं है।

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राग दरबारी: मुसलमान ही नहीं, कई जातियों को बीजेपी ने अछूत बना दिया है

सवाल यह नहीं है कि लोकतांत्रिक पद्धति में मुसलमानों की हैसियत खत्म हो गयी है या नहीं हो पायी है। सवाल यह है कि मुसलमानों की हैसियत कितनी रह गयी है? और इसका जवाब यह है कि मुसलमानों की हैसियत पिछले सात वर्षों में बिहार व उत्तर प्रदेश के यादवों, हरियाणा के जाटों, महाराष्ट्र के महारों और उत्तर प्रदेश के जाटवों से थोड़ी ज्यादा ही बुरी है।

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SKM ने किया मिशन UP और उत्तराखंड का ऐलान, 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में महापंचायत

इस मिशन के तहत संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले संघर्षरत इन दो प्रदेशों के किसान संगठन सहित पूरे देश के किसान संगठन अपनी पूरी ऊर्जा इन दो प्रांतों में आंदोलन की धार तेज करने पर लगाएंगे। इस मिशन का उद्देश्य होगा कि पंजाब और हरियाणा की तरह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी हर गांव किसान आंदोलन का दुर्ग बने, कोने-कोने में किसान पर हमलावर कॉरपोरेट सत्ता के प्रतीकों को चुनौती दी जाए, और किसान विरोधी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों का हर कदम पर विरोध हो।

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राग दरबारी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती फैक्टर

बीजेपी के लिए परिस्थिति अगर विपरीत हुई और जो जाति या समुदाय भाजपा या सपा से सहज महसूस नहीं कर पा रहा है, अगर उसका छोटा सा तबका भी बसपा की तरफ शिफ्ट कर जाता है तो उत्तर प्रदेश के मुसलमान बीजेपी को हराने वाले उम्मीदवार को वोट देने से नहीं हिचकेंगे क्योंकि वह ऐसा समुदाय है जिसका एकमात्र लक्ष्य हर हाल में भाजपा को हराना होता है!

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अधूरी विजय-यात्रा में सम्पन्न होते अश्वमेध यज्ञ का भय

भाजपा अब अपनी आगे की यात्रा सिर्फ़ पुरानी भाजपा के भरोसे नहीं कर सकती! उसे अपनी पुरानी चालों और पुराने चेहरों को बदलना पड़ेगा। चेहरे चाहे किसी योगी के हों या साक्षी महाराज, गिरिराज सिंह, साध्वी प्राची, प्रज्ञा ठाकुर या उमा भारती के हों। इसका एक अर्थ यह भी है कि राजनीति में सत्ता का बचे रहना ज़रूरी है, व्यक्तियों का महत्व उनकी तात्कालिक ज़रूरत के हिसाब से निर्धारित किया जा सकता है।

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