बात बोलेगी: ‘लोया हो जाने’ का भय और चुनी हुई चुप्पियों का साम्राज्य

तोड़ भी दीजिए चुप्पी! बोलिए, कहिए, सुनिए, सुनाइए, चिल्लाइए! दोस्तों के बीच, घर में, फोन करते वक़्त, दफ्तर में! और अगर इसका अभ्यास नहीं है तो आईने के सामने खड़े होकर खुद से खुद के लिए बोलिए… देखिएगा, अच्छा लगेगा फिर। हवा चलने लगेगी! रूत, बदलने लगेगी!

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बात बोलेगी: किरायेदारों के ज़ाती मकान नहीं होते…

आप तो इससे भी खुश हो जाएंगे कि किसी ने गुड फ्राइडे को गुड गवर्नेंस डे बना दिया। मज़ा आ गया। जबकि न आपको गुड फ्राइडे से मतलब था न गुड गवर्नेंस से। बस आपको कुछ ऐसा मिल गया जो आपको बताया गया कि यही आपके लिए सबसे अच्छा है। ब्रोकर यूं तो बाज़ार का हिस्सा हैं लेकिन यहाँ दिये गये उदाहरण में फिलहाल वो केवल आपको मकान दिलाने के काम आ रहे हैं।

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रफ़्तार: पिता दिवस पर एक लघुकथा

ट्रेन अपनी गति पकड़ चुकी थी। अब तक मुझे अपनी सीट नहीं मिल पायी थी। जो सीट मेरे लिए मुकर्रिर थी वो दूसरे कोच में थी। स्टेशन पर जब तक गाड़ी खड़ी रही मैं अपनी उसी सीट पर बैठा था। कुछ देर बाद एक बूढ़ा दंपत्ति मेरे पास आया…

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बात बोलेगी: बेग़म सावधान! मिर्ज़ा कल हवेली का सौदा करने जा रहा है…

गुलाबो सिताबो 12 जून को रिलीज़ हुई बहुचर्चित और बहुप्रशंसित फिल्म है जो प्राइम वीडियो पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है। इसमें एक आलसी, लालची, काइयाँ किस्म का व्यक्ति है …

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बात बोलेगी: स्मृतियाँ जब हिसाब मांगेंगीं…

एक ज़िंदगी कई घटनाओं का बेतरतीब संकलन होती है। हर रोज़ कुछ घटता है। उस घटने को लोग देखते हैं, महसूस करते हैं, उसके अच्छे-बुरे परिणाम भुगतते हैं। घटनाएँ बीत …

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सुनो सरकार! वन अधिकार मान्यता कानून में वन विभाग को ‘नोडल एजेंसी’ नहीं बनाया जा सकता

छत्तीसगढ़ सरकार ने नए आदेश में कहा है कि वन अधिकार (मान्यता) कानून 2006 के तहत वन ससाधनों पर अधिकारों को मान्य करने के लिए वन विभाग ‘नोडल एजेंसी’ होगा

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बात बोलेगी: ‘लोकल’ से ‘बोकल’ को समझने की एक कोशिश!

लबरा और दौंदा में से किसी एक को अपनी ताकत सिद्ध करना थी या मुक़ाबला उनके बीच होना था। यहां तो एक ही व्यक्ति में दोनों मौजूद हैं।

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