कौन कर रहा है कोयले की दलाली में हाथ काले?

भारत के कोयला संकट को गहराने में जहां अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की भूमिका रही वहीं देश के भीतर मौजूद कारण भी इसकी वजह रहे जिसने खदानों से लेकर बिजली संयंत्रों तक सप्लाई की लय को गड़बड़ा दिया। कई राज्यों में कोयले की उपलब्धता में कमी आयी है।

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पेट पर लात और पीठ पर लाठी: लॉकडाउन में पुलिस उत्पीड़न का हाल बताती एक रिपोर्ट

कोविड-19 में पुलिस व्यवस्था पर कॉमन कॉज नामक स्‍वयंसेवी संस्‍था द्वारा किये गए एक अध्ययन में सामने आया है कि हर तीन पुलिसकर्मियों में से केवल एक ने लॉकडाउन के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों की जांच करते हुए कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया।

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लखीमपुर खीरी: यूपी सरकार और टिकैत के बीच हुई ‘डील’ को कैसे देखें?

टिकैत का उद्देश्य बीजेपी के खिलाफ चौतरफा युद्ध छेड़ने के बजाय कृषि कानूनों पर ध्यान केंद्रित रखना है, हालांकि इस बीच वह बीजेपी की क्षमता को कम करके आंकने की गलती कर सकते हैं तो दूसरी ओर वह लखीमपुर खीरी में हुई मौतों पर सिख किसानों के दुख को भी कम आंक सकते हैं।

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‘आत्मनिर्भर भारत’ में केंद्र से कर्ज लेकर घी पी रही है हिमाचल प्रदेश की सरकार!

खुद प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से इतना भी हासिल नहीं कर पाती कि वह अपने कर्माचारियों का वेतन दे सके। यहां तक कि आदिवासी व अनुसूचित जाति सब-प्लान, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मदों से भी बजट का पैसा बचाया जा रहा है। विकास कार्यों पर जितना पैसा खर्च किया जाता है लगभग उतना ही पैसा सरकार का ब्याज चुकाने में चला जाता है।

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लखीमपुर खीरी की घटना में निहित चेतावनी को अनदेखा न करें!

आने वाला समय किसान आंदोलन के नेतृत्व के लिए कठिन परीक्षा का है। उकसाने वाली हर कार्रवाई के बाद भी उसे आंदोलन को अहिंसक बनाए रखना होगा। किसान नेताओं को जनता को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि वे हर प्रकार की हिंसा के विरुद्ध हैं।

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राजनीतिक दलों में अपराधियों को शामिल करने की होड़ और चुनावी सफलता का जोड़

वर्ष 1993 में वोहरा समिति की रिपोर्ट और वर्ष 2002 में संविधान के कामकाज की समीक्षा करने के लिये राष्ट्रीय आयोग (NCRWC) की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि भारतीय राजनीति में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है।

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गाँधीवाद के सही पाठ का सवाल हमारी अस्तित्व-रक्षा से जुड़ा है!

हम गांधी की सीखों पर अमल न कर पाए और हमने स्वयं को हिंसा-प्रतिहिंसा एवं घृणा की लपटों में झुलसकर नष्ट होने के लिए छोड़ दिया है। गांधीवाद हमारी अस्तित्व रक्षा के लिए आवश्यक है और इससे हमारा विचलन हमें गंभीर सामाजिक विघटन की ओर ले जा सकता है।

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पंजाब-हरियाणा: पवार की राह पर कैप्‍टन, आंदोलन की नाव से पार उतरने की कोशिश में चौटाला!

किसान आंदोलन के दस महीने पूरे होने पर पंजाब और हरियाणा की राजनीति में जो उथल-पुथल देखी जा रही है, वो इस बात का गवाह है कि पंजाब और हरियाणा के शांतिपूर्ण किसानों की जिद के आगे सत्‍ता के गलियारों में भयंकर बेचैनी है। ये बेचैनी क्‍या शक्‍ल अख्तियार करेगी यह तो आने वाले दिन ही बताएंगे लेकिन दोनों राज्‍यों में हो रही सियासी हलचलों को समझना जरूरी है। दो अलग-अलग टिप्‍पणियों में पंजाब और हरियाणा के सियासी माहौल का जायज़ा ले रहे हैं वरिष्‍ठ टिप्‍पणीकार जगदीप सिंह सिंधु।

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कांग्रेस का आंतरिक संकट और नये दरबारियों से घिरे शीर्ष नेतृत्व की भटकन

भाजपा को आगामी लोकसभा चुनावों में पराजित करने की कोई भी रणनीति कांग्रेस की उपेक्षा करके अथवा उसे पूर्ण रूप से खारिज करके तैयार नहीं की जा सकती। यह भी एक ध्रुव सत्य है कि नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस अविभाज्य रूप से अन्तरसम्बन्धित हैं। एक के बिना दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती। यह रिश्ता इतना अनूठा और अपरिभाषेय है कि कांग्रेस की दुर्दशा के लिए नेहरू-गांधी परिवार को जिम्मेदार मानने वाले भी यह जानते हैं कि अगर कांग्रेस को सत्ता वापस कोई दिला सकता है तो वह नेहरू-गांधी परिवार ही है।

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हवाना सिन्ड्रोम: वायरस के बाद अब खुफिया माइक्रोवेव हथियारों के आतंक का नया अध्याय

पिछले दिनों सीआइए के निदेशक विलियम बर्न्‍स के साथ भारत आए उक्त अधिकारी में पाए गए इन लक्षणों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कम्प मचा हुआ है। सीआइए के अधिकारी इसे ‘‘अमरीका विरोधी साजिश’’ करार दे रहे हैं। एक महीने में यह दूसरी बार ऐसा हुआ है जिसमें अमरीका के दो खुफिया अधिकारी इस ‘हवाना सिन्ड्रोम’ के शिकार हुए हैं। पिछले महीने अमरीकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के वियतनाम दौरे में भी ऐसी ही घटना हुई थी।

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