इतिहास बहुत क्रूर होता है, प्रधानसेवक महोदय! जन्मदिन की शुभकामनाएं…

गडकरी की बात डराती है, सीएम और मिनिस्टर्स का डर डराता है, किसी को आपके अगले मूव, अगली चाल का पता न होना डराता है। सूचनाओं का एकतरफा प्रवाह डराता है, शासन का बिल्कुल केंद्रशासित हो जाना डराता है। आज ट्विटर पर हो रहे ख़तरनाक ट्रेंड डरा रहे हैं, एक गुट भक्तएंथम ट्रेंड कर रहा है, तो दूसरा अखंड पनौती दिवस ट्रेंड करवा रहा है, समाज का इतना तीखा बंटवारा डरा रहा है।

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NHRC ने राज्यों और अन्य प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर किसान आंदोलन की रिपोर्ट मांगी

आयोग ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, मुख्य सचिव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पुलिस आयुक्त, दिल्‍ली को नोटिस जारी कर उनसे संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

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हार्दिक पटेल के कांग्रेस में होने का मतलब क्या है?

यह किसी के भी समझ में न आनेवाली बात है कि आखिर कांग्रेस अपने संभावनाशील युवा नेताओं की कद्र क्यों नहीं कर पा रही। सुष्मिता देब, जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया का जाना कांग्रेस के लिए नुकसानदेह रहा, लेकिन जो बचे हैं उनमें हार्दिक पटेल जैसे क्षमतावान युवा नेता को ताकत देने के मामले में कांग्रेस की कंजूसी समझ से परे है। गुजरात में वैसे भी कांग्रेस के पास खोने को बाकी रहा क्या है!

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मुफलिसी और मिशन से अब वास्तविकता के भी परे जा चुकी हिंदी की पत्रकारिता

आज पत्रकारिता के कामकाज की दशाएं बदली हैं। आज पत्रकारिता में इस मिशन या समर्पण को बनाए रखने के लिए समाज के सहारे और व्यापक समर्थन की जरूरत है।

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बसपा के ब्राह्मण सम्मेलनों की आलोचना सतही और राजनीति से प्रेरित है

बसपा ब्राह्मणों को अपनी पार्टी से जोड़ रही है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह ब्राह्मणों के धर्म और दर्शन को स्वीकार करने जा रही है। वह चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकती, इसलिए कि यह उसके वजूद से जुड़ा हुआ प्रश्न है। अपने वजूद को बचाने के लिए बसपा कोई जोखिम तो ले सकती है लेकिन स्वयं अपने पैर में कुल्हाड़ी मारेगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

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हम ‘दिवस’ मना रहे हैं, हमारे शिक्षक मनरेगा में मजदूरी कर रहे हैं, ठेला लगा रहे हैं!

सरकारी और बड़े गैर-सरकारी स्कूलों के शिक्षक और छात्र दोनों डिजिटल हो चले थे, लेकिन छोटे गैर-सरकारी स्कूल और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले शिक्षक की वैसी किस्मत नहीं थी। राज्य सरकारें स्कूल खोलने का आदेश दे चुकी हैं पर कोरोना की मार ने कई स्कूलों को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही लाखों शिक्षक बेरोजगार हो चुके हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि खुद को और परिवार को जिंदा रखने के लिए वे कितनी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

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हजारों के घाटे में बर्बाद होते गन्ना किसान बनाम 6000 रुपये का पीएम किसान सम्मान!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिकांश किसानों के पास औसतन दस बीघा भूमि है। यानी इन किसानों को अब एक साल में 50,400 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। इस घाटे की भरपाई के लिए मोदी सरकार जितनी किस्तें दे रही है, वह किसी भी तरह से नाकाफी है।

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कलंकित अतीत और धुँधला भविष्य: न्याय की तलाश में विमुक्त जन

इन समुदायों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानिए। वे सब आपके भाई-बहन हैं, उनसे प्यार कीजिए। उनकी सहायता कीजिए। उनको हर तरह का न्याय मिले, इसमें मदद दीजिए।

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यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टियों की सीटवार चुनावी रणनीति और सपा-बसपा की दिक्कत

सपा-बसपा के पास एक ही काट है- अतिपिछड़ों को व्यापक प्रतिनिधित्व और सीटें देते हुए उनके मान-सम्मान व सुरक्षा हेतु एससी/एसटी एक्ट जैसे प्रावधान और लाभकारी योजनाओं में स्पेशल कम्पोनेंट जैसी विशेष योजनाएं संचालित करने का ऐलान।

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आरक्षण अर्थात घर में नहीं है खाने को, अम्मा चली…

सरकार क्योंकि विश्व बैंक-अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के ढांचागत समायोजन कार्यक्रम के क्रियान्‍वयन या उनसे कर्ज़ लेने पर लादी गयी शर्तों के अनुपालन में लगी हुई है जिसके तहत सरकारी क्षेत्र के आकार और उसके रोज़गार में कटौती की जाती है इसलिए उसने यह जानते हुए भी कि इस सरकारी क्षेत्र में रोज़गार पाने के अवसर ही नहीं बचे या बचने हैं, सबको खुश करने के लिए नौकरी का निमंत्रण पत्र बांटना शुरू कर दिया। वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग को खुश करने के लिए किया जाने वाला संशोधन इसी तरह का चुनावी प्रयास है।

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