सरकारी हिंदुत्व बनाम हिंदू धर्म: धर्म संसद के संदर्भ में कुछ विचारणीय प्रश्न

यदि विपक्षी पार्टियां भाजपा के अनुकरण में गढ़े गए हिंदुत्व के किसी संस्करण की मरीचिका के पीछे भागना बंद कर अपने मूलाधार सेकुलरवाद पर अडिग रहतीं तो क्या उनका प्रदर्शन कुछ अलग रहता- इस प्रश्न का उत्तर भी ढूंढा जाना चाहिए।

Read More

पंखे उतार देने से खुदकुशी नहीं टलती! असल सवाल मानसिक समस्या की स्वीकारोक्ति का है

भौतिक रूप से हमने काफ़ी तरक्की की है परन्तु वैचारिक रूप से हम अब भी यही मानते हैं कि मानसिक समस्याएं सिर्फ बड़ी उम्र के लोगों की समस्याएं हैं। इसी वैचारिक ढाँचे की वजह से हम युवाओं की मानसिक समस्याओं को स्वीकार ही नहीं कर पाते हैं। स्वीकारोक्ति किसी भी समस्या के समाधान की पहली सीढ़ी है।

Read More

रायपुर धर्म-संसद के आयोजकों में शामिल थे कांग्रेस के नेता! ऐसे कैसे लड़ेंगे हिन्दुत्व से राहुल?

चौंकाने वाली बात है मगर सच है कि राहुल गांधी की प्रगतिशील, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस पार्टी के समानांतर छत्‍तीसगढ़ में भूपेश बघेल की नाक के नीचे एक ‘संघी’ कांग्रेस भी ऑपरेट कर रही है। राजधानी रायपुर में आयोजित हुई धर्म संसद में इस ‘संघी’ कांग्रेस के कई विधायक और नेता न केवल मौजूद थे, बल्कि मुख्य आयोजक थे।

Read More

जलवायु परिवर्तन से उपजी चरम मौसमी घटनाओं ने 2021 में दुनिया के खरबों डॉलर डुबा दिए

दस सबसे महंगी घटनाओं में से चार एशिया में हुईं, जिसमें बाढ़ और आंधी-तूफान से हुए कुल नुकसान की लागत 24 बिलियन डॉलर थी। चरम मौसम का असर पूरी दुनिया में महसूस किया गया। ऑस्ट्रेलिया को मार्च में बाढ़ का सामना करना पड़ा, जिसमें 18,000 लोग विस्थापित हुए और 2.1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में बाढ़ से 7.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और 15,000 लोगों को अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ा।

Read More

बनारस के मुसहर गांवों में चिंता का सबब बन रहा है कुपोषण का दोहरा बोझ

यदि कुपोषित बच्चों को उनके आरंभिक जीवन में अपर्याप्त पोषण प्राप्त होता है, तो ऐसे बच्चों को कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण एनसीडी का ज्‍यादा खतरा होता है बजाय उनके जो पर्याप्त पोषण प्राप्त करते हैं। अवरुद्ध बच्चे, बाद में जीवन में यदि सामान्य पौष्टिक भोजन के बजाय उच्च वसा, नमक और चीनी वाले अनियमित अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन और पेय का सेवन करते हैं, तो मोटापे के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं और बाद में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों जैसे असंचारी कार्डियो-वैस्कुलर रोगों में एक या अन्य रूप का उन्‍हें सामना करना पड़ सकता है।

Read More

भारतीय लोकतंत्र में लगातार बढ़ रही आर्थिक असमानता पर चर्चा कब होगी?

अनेक अर्थशास्त्रियों को यह आशा थी कि नवउदारवाद और वैश्वीकरण जैसी आधुनिक अवधारणाएं भारतीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था से जातीय और लैंगिक गैरबराबरी को दूर करने में सहायक होंगी किंतु ऐसा हुआ नहीं।

Read More

आंदोलनकारियों का चुनावी राजनीति में जाना: अन्ना आंदोलन से किसान आंदोलन तक के अनुभव

एक आंदोलनकारी के रूप में हमने महसूस किया है कि आंदोलनकारी कुछ बुनियादी लक्ष्य को लेकर आंदोलन करते हैं जिनके मन में ढेर सारे सपने रहते हैं। ऐसे में जब यह चुनाव में उतरने का फैसला करते हैं तो उसी सपने या आदर्श को लेकर सामने आते हैं लेकिन उनके सामने वहां पर एक अलग तरह की परिस्थिति नजर आती है जो उनके आदर्श से बिल्कुल विपरीत रहती है।

Read More

सांप्रदायिकता की पिच पर ‘सेकुलरिज़्म’ के चतुर घोड़े की सवारी

? एक पवित्र किताब के इर्दगिर्द धर्म को परिभाषित करने की अब्राहमिक पंरपरा आखिर सिखों तक कैसे पहुंची? एक भगवान और उसके एक जन्‍मस्‍थल के इर्दगिर्द धर्म को परिभाषित करने की कवायदें अब हिंदुओं के बीच भी प्रचलित हो रही हैं, जबकि सनातन धर्म का ऐसा चरित्र कभी नहीं रहा। क्‍या इसे सांप्रदायिकता कहा जा सकता है? या यह विकृत धर्मनिरपेक्षता के कुफल हैं?

Read More

अल्पसंख्यक अधिकार दिवस: आंकड़ों और रिपोर्टों के आईने में मुसलमानों की तस्वीर

शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार ऐसे कितने ही मानक हैं जिन पर अभी मुस्लिम समुदाय बहुत पीछे है, इनके विषय में सामाजिक जागृति की जरूरत है। मुस्लिम समुदाय में भी सामाजिक पिछड़ापन है, धार्मिक कट्टरता है, अशिक्षा-अंधविश्वास और लैंगिक असमानता का बोलबाला है। इन कमजोरियों को दूर करने का काम भी मुस्लिम समाज के पढ़े लिखे और प्रगतिशील लोगों को करना होगा।

Read More

तेलंगाना सरकार की ‘कल्याण-लक्ष्मी/शादी-मुबारक’ योजना की सफलता और कुछ सवाल

भारतीय समाज में लड़की की शादी माता-पिता के लिए एक चुनौती होती है क्योंकि हमारे समाज में आज भी लड़की को एक बोझ के रूप में ही समझा जाता है। …

Read More