इस पर कम लोगों का ध्यान गया कि भारत में जेन-जी का चर्चित छात्र आंदोलन बहुजन युवाओं ने शुरू किया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके दलित परिवार से आते हैं। संगठन के आरंभिक पदाधिकारियों में भी बहुजन समुदायों की भागीदारी प्रमुख थी। अनेक सिख और मुस्लिम युवा, जैसे मोहम्मद जुनैद, आंदोलन में प्रमुख सहयोगी भूमिकाओं में थे। द्विज पृष्ठभूमि के युवा बाद में पदाधिकारी के रूप में जुड़े।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की शुरुआत 16 मई 2026 को हुई थी। 3 जून 2026 को सौरव दास, विजेता दहिया[i] और आशुतोष रांका को सीजेपी प्रवक्ता बनाया गया। 27 जून 2026 को वैष्णवी गौर, आफरीन नवाज, दीपक बालियान और रत्ना सिंह प्रवक्ता-टीम में शामिल हुए।
6 अगस्त 2026 की राष्ट्रीय कार्यसमिति में अभिजीत दिपके राष्ट्रीय संयोजक बने। सौरव दास और आशुतोष रांका सह-संयोजक बनाए गए। दीपक बालियान को सह-संगठन प्रभारी और उत्तर क्षेत्र प्रभारी बनाया गया। आफरीन नवाज राष्ट्रीय सचिव, रत्ना सिंह कानूनी मामलों की प्रभारी और वैष्णवी गौर शोध एवं नीति प्रभारी बनीं।
सीजेपी के इन आरंभिक पदाधिकारियों में से अधिकांश न सिर्फ अद्विज तबकों (दलित-ओबीसी) से आते हैं, बल्कि इनमें से अधिकांश की वैचारिकी पर भी फुले-आंबेडकरवाद का प्रभाव है।
आरंभिक पदाधिकारी और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि
| नाम | घोषणा | पद और बाद की स्थिति | जाति/समुदाय | नाम |
| अभिजीत दिपके | 16 मई 2026 | संस्थापक; 6 अगस्त से राष्ट्रीय संयोजक | दलित; प्रकाशित स्रोतों के अनुसार मातंग | दलित पहचान स्वयं घोषित; मातंग समुदाय से होने की संभावना अधिक है, कुछ जगहों पर उनके महार होने का दावा भी किया गया है |
| सौरव दास | 3 जून 2026 | मुख्य प्रवक्ता; 6 अगस्त से सह-संयोजक | अद्विज | बंगाली मूल के पुडुचेरी निवासी। बंगाल में ‘दास’ कई समुदायों में मिलता है, जिनमें कायस्थ, नामशूद्र, कैवर्त, माहिष्य, वैद्य व अन्य दलित जातियाँ शामिल हैं। |
| विजेता दहिया | 3 जून 2026 | प्रवक्ता; 21 जुलाई को सभी जिम्मेदारियों से हटाया गया | जाट | सोनीपत, हरियाणा निवासी। उन्होंने एक वीडियो में स्वयं अपनी जाति बताई है और कहा है कि “मुझे जाट होने पर गर्व नहीं है” |
| आशुतोष रांका | 3 जून 2026 | प्रवक्ता; 6 अगस्त से सह-संयोजक | जैन-ओसवाल व्यापारी समुदाय | जयपुर निवासी। ‘रांका’ जैन और कुछ व्यापारी समुदायों में प्रचलित उपनाम है |
| वैष्णवी गौर | 27 जून 2026 | प्रवक्ता; 6 अगस्त से शोध एवं नीति प्रभारी | ब्राह्मण | देहरादून निवासी। ‘गौर/गौड़’ उपनाम उत्तराखंड में ब्राह्मण लिखते हैं। |
| आफरीन नवाज | 27 जून 2026 | प्रवक्ता; 6 अगस्त से राष्ट्रीय सचिव | मुस्लिम; बिरादरी अज्ञात | बेंगलुरु निवासी। मुस्लिम महिला; पहचान स्पष्ट; बिरादरी की जानकारी नहीं |
| दीपक बालियान | 27 जून 2026 | प्रवक्ता; 6 अगस्त से सह-संगठन प्रभारी और उत्तर क्षेत्र प्रभारी | जाट | अलवर निवासी किसान परिवार से। ‘बालियान/बलियान’ जाट समुदाय का एक गोत्र है |
| रत्ना सिंह | 27 जून 2026 | प्रवक्ता; 6 अगस्त से कानूनी मामलों की प्रभारी | निश्चित नहीं | लखनऊ, उत्तर प्रदेश निवासी। ‘सिंह’ उपनाम राजपूत, दलित, पिछड़े, सिख और अन्य समुदायों में प्रयुक्त |
अभिजीत दिपके दलित हैं। ज्यादातर प्रकाशित स्रोतों में उन्हें मातंग समुदाय का बताया गया है, लेकिन कुछ जगहों पर उनके महार होने का दावा भी किया गया है। उनके जाति-संबंधी विचारों पर हम आगे विस्तार से बात करेंगे।
पेशे से खोजी पत्रकार रहे सौरव दास बंगाली हैं।[ii] वे अद्विज (गैर-सवर्ण) पृष्ठभूमि से आते हैं। बंगाल में ‘दास’ उपनाम का उपयोग करने वाली अद्विज जातियों में कायस्थ, नामशूद्र, कैवर्त, माहिष्य, वैद्य व अन्य दलित जातियाँ शामिल हैं।
सौरव दास के लेखन और वक्तव्यों में सबसे अधिक जोर नागरिक अधिकारों की रक्षा पर दिखाई देता है। जाति और आरक्षण के सवाल पर उनका झुकाव सामाजिक न्याय के पक्ष में है। वे आंबेडकर को संविधान, ईमानदार संस्थाओं और सत्ता की जवाबदेही से जोड़कर देखते हैं। धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और नफ़रती भाषणों का प्रश्न भी उनकी चिंताओं में शामिल है।[iii]
विजेता दहिया हरियाणा के सोनीपत की निवासी हैं और जाट समुदाय से आते हैं। उनके जातिवाद-विरोधी विचार बहुत ही मुखर हैं। सीजेपी आंदोलन के दौरान सामने आए एक वीडियो में विजेता दहिया अपनी जाति जाट बताते हैं, लेकिन साथ ही कहते हैं कि उन्हें जाट होने पर कोई गर्व नहीं है। उनका तर्क है कि किसी जाति में जन्म लेने में व्यक्ति का अपना कोई योगदान नहीं होता, इसलिए उस पर गर्व करने का भी कोई कारण नहीं है।
इसी वीडियो में वे कहते हैं कि इस देश के निर्माण में सबसे बड़ा योगदान शूद्रों का है। घड़े से लेकर मंदिरों की मूर्तियों तक, ज्यादातर चीजें शूद्रों ने बनाई हैं। वे ही इस देश के अन्नदाता भी हैं। जाट समुदाय के कुछ लोगों ने उनके इस वक्तव्य का विरोध किया, लेकिन वे अपनी बात पर अडिग रहे।[iv]
आरक्षण के सवाल पर भी उनका रुख स्पष्ट है। वे कहते हैं, “जातिवाद बीमारी है और आरक्षण उसकी दवा। पहले जातिवाद समाप्त कीजिए, आरक्षण अपने आप समाप्त हो जाएगा।” उनके अनुसार “आरक्षण गरीबी दूर करने की कोई सामान्य योजना या कमजोर समझे जाने वाले लोगों को दी गई कृपा नहीं है। यह जातिगत भेदभाव के कारण पीछे धकेल दिए गए समुदायों को प्रतिनिधित्व देने का माध्यम है। आरक्षण की जरूरत इसलिए बनी हुई है, क्योंकि समाज में जातिगत असमानता अब भी मौजूद है।” वे यह भी मानते हैं कि “आरक्षण इस समस्या का पूरा समाधान नहीं, बल्कि उसके उपचार का एक जरूरी उपाय है।”[v]
राजस्थान के अलवर निवासी दीपक बालियान भी जाट पृष्ठभूमि से हैं। बालियान जाट समुदाय का एक गोत्र है। वे अपना पूरा नाम ‘चौधरी दीपक बालियान’ लिखते हैं।[vi] बालियान के विचारों में सबसे प्रमुख स्थान किसानों, ग्रामीण समाज, शोषितों, वंचितों और उपेक्षित लोगों का है। वे संविधान और आंबेडकर के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं तथा आदिवासी अस्मिता और जंगल बचाने के आंदोलनों के साथ खड़े दिखाई देते हैं।[vii]
आशुतोष रांका जैन/ओसवाल व्यापारी समुदाय से आते हैं। उन्होंने आईआईटी से पढ़ाई की है तथा एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी मैकिंज़ी की उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर राजनीति में आए हैं। सार्वजनिक जीवन में उनके विचार भी स्त्री सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के पक्ष में रहे हैं। एक्स पर अपनी एक पोस्ट में वे लिखते हैं कि “जय भीम दलितों का नारा नहीं है। जय भीम समानता में विश्वास रखने वाले हर सच्चे भारतीय का नारा है।”[viii] जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान अपने संबोधन में वे अपने जेन-जी साथियों से अपील करते देखे गए थे कि “अबसे हम नारेबाजी के लिए सिर्फ चार नारों का ही इस्तेमाल करेंगे. ये नारे होंगे ‘भारत माता की जय’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘जय भीम’ और ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’।”[ix] अपनी एक पुरानी फेसबुक पोस्ट में वे कहते हैं कि “मैं इसी जन्म में साबित करके दिखाऊँगा कि बिना जाति के भी राजनीति की जा सकती है, और जीती भी जा सकती है।”[x]
वैष्णवी गौर उत्तराखंड की ब्राह्मण हैं। जाति-विमर्श पर उनकी कोई उल्लेखनीय राय सार्वजनिक वक्तव्यों में दिखाई नहीं देती, लेकिन शिक्षा और अवसर की समानता को लेकर उनका रुख स्पष्ट है। सीएनएन से बातचीत में उन्होंने शिक्षा को भारत में “पीढ़ीगत उन्नति का निर्णायक आधार” बताया। वे शिक्षा की बढ़ती लागत, घटते रोजगार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर जोर देती हैं तथा गाँवों तक जाकर युवाओं की समस्याएँ समझने की बात करती हैं।[xi]
आफरीन नवाज बेंगलुरु की मुस्लिम महिला हैं, लेकिन उनकी बिरादरी की जानकारी उपलब्ध नहीं है। वे एमबीए-शिक्षित उद्यमी हैं। द प्रिंट के अनुसार उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र छोड़कर छात्रों और युवाओं से संबंधित मुद्दों पर काम करना शुरू किया। उनकी राजनीति का मुख्य आधार रोजगार, शिक्षा और युवा-भागीदारी है।[xii] वे आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी को लेकर मुखर रही हैं। उनका कहना है, “इतिहास हमें उस उद्देश्य के लिए याद रखे, जिसके लिए हम खड़े हुए; और जंतर-मंतर पर कदम रखने वाली हर महिला जिस उद्देश्य के लिए खड़ी हुई, उसे भी याद रखा जाए।”[xiii]
रत्ना सिंह उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली हैं। वे वकील और पूर्व कानूनी पत्रकार रही हैं। उनकी जाति केवल उपनाम के आधार पर तय नहीं की जा सकती। ‘सिंह’ उपनाम राजपूत, दलित, पिछड़े, सिख और अनेक समुदायों में प्रयुक्त होता है। जाति, आरक्षण आदि पर रत्ना सिंह का कोई स्पष्ट स्वतंत्र सार्वजनिक वक्तव्य अभी तक उपलब्ध नहीं है, लेकिन उनके वक्तव्यों में सबसे अधिक जोर शिक्षा और रोजगार में समान अवसर, असहमति की स्वतंत्रता और महिलाओं की बराबर राजनीतिक भागीदारी पर दिखता है।[xiv]
इन पदाधिकारियों की जाति का विवरण उनकी पहचान को उनकी जाति तक सीमित करने के लिए नहीं बताया गया है। इसका उद्देश्य संगठन की सामाजिक बनावट को समझना है। यह इसलिए भी आवश्यक हो जाता है क्योंकि मीडिया के एक धड़े द्वारा इसे सवर्ण नेतृत्व वाला आंदोलन बताया जा रहा है तथा दलित-पिछड़े समुदायों में भी इस आंदोलन को लेकर एक भ्रम की स्थिति है।
टीवी 9 की एक रिपोर्ट दावा करती है कि इसके पदाधिकारियों में सबसे अधिक ब्राह्मण हैं।[xv] कई सोशल मीडिया पोस्टों में आंदोलन के सफल होने के बाद इसे सवर्ण समाज की जीत बताया जा रहा है। मसलन, सवर्ण और ब्राह्मण हितों की राजनीति और “आरक्षण हटाओ आंदोलन” से जुड़े दिल्ली के एसके चौबे ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया है कि नेतृत्व के सवर्ण होने के कारण ही लोग इस आंदोलन के साथ आए। उनका कहना है “सवर्णों की संख्या कम जरूर है लेकिन समाज के प्रति जो समर्पण इनका रहा है उसके लिए पूरा समाज सवर्णों के लिए खड़ा हो जाता है।’’ वे लिखते हैं कि इस आंदोलन के सफल होने के बाद “अब सरकार को सोचना होगा कि यूजीसी जैसे कानून को थोपना है या इसे खत्म करना है।”[xvi] जाहिर है, ये दावे न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, बल्कि एक छलपूर्ण मंशा से गढ़े गए हैं। आप देखेंगे बाद में रांची में इन्हीं मुद्दों पर अनशन पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो भी कुड़मी/कुरमी-महतो (ओबीसी) समुदाय से हैं और सामाजिक न्याय की विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं।
जाति, आरक्षण और आंबेडकर
सीजेपी ने आरंभ में ही स्वयं को “धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक और जाति-विरोधी संगठन” घोषित कर दिया था और अपनी विचारधारा को गांधी, आंबेडकर और नेहरू से प्रेरित बताया था।[xvii] इसमें विवेकानंद, सावरकर या तिलक जैसे प्रतीकों के लिए जगह नहीं थी। उस समय अभिजीत दिपके की जाति सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं थी।
21 मई 2026 को एक्स पर एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि सीजेपी आरक्षण, दलित प्रश्नों और सामाजिक न्याय पर अपना रुख स्पष्ट क्यों नहीं करती। दिपके ने जवाब दिया:
“I am a Dalit myself. I hope that will answer all your questions.”
यानी, “मैं स्वयं दलित हूँ। उम्मीद है कि इससे आपके सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा।”[xviii]
उनकी दलित पहचान सामने आते ही जातिगत टिप्पणियाँ शुरू हो गईं। उन्हें ‘मेरिट-विरोधी’ कहा गया। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीति में जाति का कार्ड खेल दिया है। बाद में दिपके ने इन सवालों पर अधिक स्पष्टता से बात की। 3 अगस्त 2026 को छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान दिपके ने आरक्षण पर कहा:
“अगर किसी वंचित बच्चे को शिक्षा मिल रही है, तो इसमें गलत क्या है? हमारा लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा देना होना चाहिए।”
इसी बातचीत में उन्होंने कहा:
“हम यह क्यों कहते हैं कि आरक्षण के कारण सीटें कम हो गईं? हमें सरकार से सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग करनी चाहिए। लोग आरक्षण के विरुद्ध जितना बोलते हैं, उतना मैनेजमेंट कोटे के विरुद्ध क्यों नहीं बोलते?”[xix]
दिपके ने सीटों की कमी के लिए आरक्षित वर्गों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय सरकार से अवसर बढ़ाने की मांग की। उन्होंने प्रबंधन कोटे पर भी सवाल उठाया, जिसमें पैसे और सामाजिक हैसियत के आधार पर प्रवेश मिलता है। आरक्षण के मुकाबले इसका विरोध बहुत कम होता है। दिपके के लिए आरक्षण किसी समुदाय को दी गई रियायत नहीं है। वे इसे वंचित लोगों की शिक्षा, प्रतिनिधित्व और अवसर का साधन मानते हैं। अगस्त 2026 में इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा:
“मैं आंबेडकरवादी हूँ और आंबेडकरवादी बना रहूँगा।”[xx]
उनके अनुसार आंबेडकर किसी एक समुदाय के नहीं, पूरे भारत के नेता हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत को आकार दिया।
दिल्ली पहुँचते समय दिपके डॉ. आंबेडकर की पुस्तक ‘My Autobiography’ हाथ में उठाए हुए थे। जंतर-मंतर के प्रदर्शन में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि गांधी और आंबेडकर के नारे लगाए जा सकते हैं, लेकिन आंदोलन को धार्मिक राजनीति की ओर ले जाने वाले नारों से बचना चाहिए।[xxi]
तत्कालीन शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के समय दिपके ने डॉ. आंबेडकर का चित्र उठाया। ‘भारत माता की जय’ के बाद उन्होंने ‘जय भीम’ का नारा लगाया। बाद में उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की तस्वीर बदलकर भारत के संविधान की तस्वीर लगा दी।[xxii] आंबेडकर और संविधान उनके लिए निजी श्रद्धा के विषय भर नहीं हैं। दोनों उनके आंदोलन की सार्वजनिक राजनीतिक भाषा का हिस्सा हैं।
फ्रंटलाइन को दिए साक्षात्कार में दिपके ने कहा था:
“मैं एक दलित परिवार से आता हूँ। इसलिए डॉ. आंबेडकर का मेरे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव रहा है। आज मैं बोस्टन में बैठा हूँ तो इसलिए कि उन्होंने हमें समानता का अधिकार और गरिमा के साथ जीने का अधिकार दिलाया।”
उन्होंने अपने परिवार की आकांक्षाओं के बारे में कहा:
“हमारे सपने बहुत छोटे थे। हम बस इंजीनियरिंग या बीएससी करके किसी कंपनी में एक ठीक-ठाक नौकरी पाने का सपना देखते थे। हमारी आकांक्षाओं की सबसे ऊँची सीमा यही थी। क्या मैंने कभी सोचा था कि मैं बोस्टन पहुँचूँगा? नहीं।”
अपने पिता की कहानी बताते हुए उन्होंने कहा:
“मेरे पिता बहुत गरीब परिवार से थे। सत्तर के दशक में महाराष्ट्र में सूखा पड़ा था। मेरे परिवार के पास खाने के लिए भी पर्याप्त नहीं था। इसलिए उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। तीन साल बाद वे फिर स्कूल लौटे और डिप्लोमा किया। आरक्षण का लाभ मिलने के कारण वे अपने गाँव के पहले इंजीनियर बने। इसीलिए आज मैं अमेरिका में बैठा हूँ।”[xxiii]
अभिजीत अपनी सफलता का श्रेय केवल व्यक्तिगत मेहनत को नहीं देते। वे मानते हैं कि डॉ. आंबेडकर के संघर्ष, समानता के संवैधानिक अधिकार और आरक्षण से बने अवसरों ने उनके परिवार की यात्रा संभव की।
जुलाई 2026 में पुणे पहुँचकर दिपके ने ऐतिहासिक फुलेवाड़ा में महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को श्रद्धांजलि दी। सीजेपी के आंदोलन के दौरान सावित्रीबाई फुले का चित्र भी उन्हें भेंट किया गया।
एक और बात ध्यान देने लायक है। 20 जून 2026 से 25 जुलाई 2026 तक जंतर-मंतर पर चले सीजेपी के जेन-जी आंदोलन में ‘जय भीम’ के नारे और नीले झंडे ही प्रमुखता से दिखाई देते थे।
इस संबंध में जंतर-मंतर पर आंदोलन को कवर कर रहे न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार अवधेश कुमार का आकलन गौर करने लायक है। उन्होंने एक्स पर लिखा:
“20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एक बात लगातार ध्यान खींच रही थी. वो थी जय भीम के नारे. वे इक्का-दुक्का नहीं थे, कनॉट प्लेस में जब पुलिस छात्रों पर लाठीचार्ज और पत्थर चला रही थी तो बड़ी संख्या में वे नारे सुनाई दे रहे थे. फिर भी इस आंदोलन की चर्चा पेपर लीक, लाठीचार्ज और पॉलिटिक्ल टकराव के फ्रेम में हुई। शायद ही किसी ने इसे दलित नज़रिए से पढ़ने की कोशिश की. यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी करने वाली आबादी में आखिर किन सामाजिक समूहों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है? सरकारी नौकरी किन समुदायों के लिए सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और उस पीढ़ी से एक कदम आगे बढ़ने का रास्ता है? ..मुझे लगता है कि शायद इसी वजह से उस दिन जय भीम के नारे इतने बुलंद थे. यह सिर्फ एक पेपर लीक का आंदोलन नहीं था. इस आंदोलन को अवसर, बराबरी और न्याय की लड़ाई के रूप में भी देखे जाने की जरूरत है।”[xxiv]
वास्तव में, जेन-जी के आंदोलनों में मीडिया पर जो हमले हुए, उनके बहुजन परिप्रेक्ष्य को भी समझा जाना चाहिए। मुख्यधारा का भारतीय मीडिया सवर्ण-बहुल रहा है, यह बात अनिल चमड़िया और इन पंक्तियों के लेखक के सर्वेक्षण से भी वर्षों पहले सामने आ चुकी है। कांशीराम से लेकर विभिन्न दलित-पिछड़े राजनेता, जैसे लालू प्रसाद, मायावती और अखिलेश यादव, समय-समय पर इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।
मीडिया पर हुए हमले और बहिष्कार उसकी ब्राह्मणवादी विचारधारा के विरोध में हैं, इसे गहराई से समझे जाने की जरूरत है। मीडिया के प्रति लोगों की नफ़रत का मूलभूत कारण मीडिया द्वारा एक ऐसी राजनीतिक शक्ति का समर्थन करना है, जो सवर्ण वर्चस्ववाद की पोषक है।
सामाजिक आधार और ऐतिहासिक संदर्भ
बहरहाल, इन चीजों का भारतीय राजनीति में एक गहरा ऐतिहासिक महत्व है, जिस पर गौर किया जाना चाहिए। भारतीय राजनीति में संभवतः पहली बार ऐसा छात्र-मंच दिखाई दिया, जिसका नेतृत्व एक दलित के हाथ में है और वह अगड़े-पिछड़े सभी युवाओं का मंच है, जिसकी सार्वजनिक टीम किसी एक छोटे सामाजिक समूह तक सीमित नहीं दिखती। दलित, पिछड़े, जाट, मुस्लिम, जनजातीय और संभवतः सवर्ण पृष्ठभूमि के लोग एक ही मंच पर हैं।
पहले के आंदोलनों पर नज़र डालें तो डॉ. आंबेडकर के साथ अनेक गैर-दलित बुद्धिजीवी और सहयोगी थे। लेकिन सवर्ण समाज के किसी बड़े समूह ने उन्हें अपने राजनीतिक नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया। उन्हें संविधान निर्माता के रूप में सम्मान मिला, लेकिन सामाजिक बराबरी और जाति-विनाश की उनकी राजनीति को व्यापक द्विज समर्थन नहीं मिला। गैर-दलित लोग उनके सहयोगी हो सकते थे, पर आंदोलन का नेतृत्व और प्रमुख सामाजिक आधार दलित समाज के भीतर था।
बाद में रिपब्लिकन पार्टी ने भी स्वयं को केवल दलितों की पार्टी तक सीमित नहीं रखा। उसका दावा सभी शोषित समुदायों की राजनीति करने का था। फिर भी उसका वास्तविक जनाधार मुख्यतः दलितों में रहा, विशेष रूप से महाराष्ट्र के नवबौद्ध समुदाय में।
कांशीराम का आंदोलन बहुजन समाज की स्वतंत्र राजनीतिक चेतना पर खड़ा हुआ था। उसके शुरुआती दौर में सवर्ण जातियाँ उसका सामाजिक आधार नहीं थीं। बाद में बहुजन समाज पार्टी ने ‘सामाजिक इंजीनियरिंग’ के तहत ब्राह्मणों और दूसरी सवर्ण जातियों को साथ लिया। लेकिन वह मुख्यतः चुनावी साझेदारी थी। उसमें टिकट, प्रतिनिधित्व, सत्ता और राजनीतिक लाभ का गणित था। उसका चरित्र उस स्वाभाविक सामाजिक स्वीकृति से अलग था, जिसकी संभावना आज कॉकरोच आंदोलन में दिखाई देती है।
कॉकरोच जनता पार्टी के मामले में परिस्थिति अलग है। विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों के युवा किसी खास दलित प्रश्न पर दलितों का समर्थन करने मात्र नहीं आए हैं। वे बेरोज़गारी, परीक्षाओं की गड़बड़ियों, शिक्षा, लोकतंत्र और जवाबदेही जैसे साझा प्रश्नों पर एक दलित संस्थापक के नेतृत्व वाले मंच से जुड़े हैं।
यदि यह जुड़ाव जाति की सीमाएँ पार कर रहा है, तो ये युवा केवल दलित समुदाय के ‘सहयोगी’ नहीं हैं। वे आंदोलन और उसके नेतृत्व को अपना मान रहे हैं। आरक्षण पर दिपके और उनके साथियों का बयान इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्होंने सवर्ण युवाओं की लोकप्रिय भावना को संतुष्ट करने के लिए आरक्षण-विरोधी रुख नहीं अपनाया। उन्होंने आरक्षण का समर्थन किया, वंचित बच्चों की शिक्षा का प्रश्न उठाया और सरकार से सीटें बढ़ाने की मांग की। यह आंदोलन के सामाजिक चरित्र की महत्वपूर्ण परीक्षा थी, लेकिन अंतिम परीक्षा नहीं।
सीजेपी नया और तेजी से बदलता आंदोलन है। उसके सामाजिक चरित्र पर अंतिम फैसला देना जल्दबाजी होगी। फिर भी सवाल महत्वपूर्ण है: क्या यह केवल एक राजनीतिक आंदोलन है, या भारतीय समाज में किसी गहरे बदलाव की आहट भी है?

प्रमोद रंजन लेखक, पत्रकार और शिक्षाविद् हैं। उन्होंने वर्ष 2009 में बिहार के मीडिया की जाति का सर्वेक्षण किया था, जो ‘मीडिया में हिस्सेदारी’ शीर्षक से एक पुस्तिका के रूप में प्रकाशित है। जनपथ पर प्रमोद रंजन के सभी लेख संक्रमण काल स्तम्भ के अंतर्गत पढे जा सकते हैं।
उद्धृत स्रोत
ANI [@ANI]. “#WATCH | Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra | Cockroach Janta Party….” X, 3 Aug. 2026. x.com/ANI/status/…. Accessed 14 Aug. 2026.
Baliyan, Deepak. “चौधरी दीपक बालियान.” Facebook. facebook.com/deepak.balyan.18/. Accessed 14 Aug. 2026.
Baliyan, Deepak [@choudhary_deepak_baliyan]. “कल एक ऐतिहासिक दिन रहा—देशभर से आए आदिवासी किसान और कबीलाई साथियों के साथ एक अहम अधिवेशन में शामिल….” Instagram, 26 May 2025. instagram.com/p/DKGhkYkxi8v/. Accessed 14 Aug. 2026.
Baliyan, Deepak [@choudhary_deepak_baliyan]. “संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन में आदरणीय चौधरी राकेश टिकैत जी एवं समस्त SKM नेतृत्व द्वारा….” Instagram, 28 July 2026. instagram.com/p/DbVIZDZxFd3/. Accessed 14 Aug. 2026.
Chand, Sakshi. “Cockroach Janta Party Sacks Vijeta Dahiya as Spokesperson after Viral Video.” The Indian Express, 21 July 2026. indianexpress.com/article/cities/delhi/cockroach-janta-party-vijeta-dahiya-spokesperson-burger-viral-video-10796877/. Accessed 14 Aug. 2026.
Chaubey, Shravan Kr. “#सवर्णों_का_विरोध_का_नतीजा_एक_विकट_गया.” Facebook. facebook.com/sk.choubey.35/posts/…. Accessed 14 Aug. 2026.
Das, Saurav. “Contrary to SC’s Rules of Assignment, at Least 8 Politically Sensitive Cases Moved to One Judge in 4 Months.” Article 14, 7 Dec. 2023. tribe.article-14.com/post/contrary-to-sc-s-rules-of-assignment-at-least-8-politically-sensitive-cases-moved-to-one-judge-in-4-months-65713ae124602. Accessed 14 Aug. 2026.
Das, Saurav. “Pune Police Evade the Law by Dodging Questions on Use of Israeli Spyware on Indian Citizens.” Article 14, 3 May 2022. tribe.article-14.com/post/pune-police-evade-queries-on-pegasus-use-in-koregaon-elgar-case-6270550ec920c. Accessed 14 Aug. 2026.
Das, Saurav. “Takedown of Hate Tracker Highlights Secrecy around Modi Govt’s Internet Censorship Practices.” Article 14, 9 Feb. 2024. tribe.article-14.com/post/takedown-of-hate-tracker-highlights-secrecy-around-modi-govt-s-internet-censorship-practices-65c59c3549d5a. Accessed 14 Aug. 2026.
Dipke, Abhijeet [@abhijeet_dipke]. “I Am a Dalit Myself. I Hope That Will Answer All Your Questions.” X, 21 May 2026. x.com/abhijeet_dipke/status/2057346693176107394. Accessed 14 Aug. 2026.
Ellis-Petersen, Hannah. “‘What If All Cockroaches Came Together?’ The Youth Movement Threatening to Shake Up India’s Politics.” The Guardian, 8 June 2026. www.theguardian.com/world/2026/jun/08/cockroach-janta-party-youth-movement-india-politics. Accessed 14 Aug. 2026.
Frontline. “Abhijeet Dipke on Ambedkar’s Impact in His Life.” YouTube. www.youtube.com/shorts/iYAjbpLzP54. Accessed 14 Aug. 2026.
Gaur, Vaishnavi. Interview by Lynda Kinkade. “Cockroach Party Claims Victory as Education Minister Quits.” One World, CNN, 27 July 2026, 11:40–11:50. transcripts.cnn.com/show/ow/date/2026-07-27/segment/01. Accessed 14 Aug. 2026.
HT News Desk. “‘DMs Filled with Death Threats’: CJP’s Ratna Singh Says She Relies on Lessons from Jantar Mantar Protest.” Hindustan Times, 29 July 2026. www.hindustantimes.com/india-news/dms-filled-with-death-threats-cjps-ratna-singh-says-she-relies-on-lessons-from-jantar-mantar-protest-101785338630812.html. Accessed 14 Aug. 2026.
India Today [@indiatoday]. “CJP Founder Abhijeet Dipke Said Dr. B. R. Ambedkar Is Not Just a Leader of One Community….” Instagram, 31 July 2026. www.instagram.com/reel/DbdtkgQEiFt/. Accessed 14 Aug. 2026.
Jha, Sugandha. “You Can Stop Our Voice, but You Can’t Erase Us: CJP Founder Abhijeet Dipke.” The Times of India, 7 June 2026. timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/you-can-stop-our-voice-but-you-cant-erase-us-dipke/articleshow/131557756.cms. Accessed 14 Aug. 2026.
Joshi, Mallica. “Anna to Delhi via Boston: The ‘Cockroach’ Who Sparked a Metamorphosis.” The Times of India, 26 July 2026. timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/anna-to-delhi-via-boston-the-cockroach-who-sparked-a-metamorphosis/articleshow/132635532.cms. Accessed 14 Aug. 2026.
Kateel, Avinash, and Sushim Mukul. “We Went to Cockroach Party’s Jantar Mantar Protest. This Is What We Saw.” India Today, 7 June 2026. www.indiatoday.in/india/story/cjp-cockroach-janta-party-protest-jantar-mantar-sonam-wangchuk-abhijeet-dipke-dharmendra-pradhan-2923061-2026-06-07. Accessed 14 Aug. 2026.
Kumar, Avdhesh [@ImAvdheshkumar]. “20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एक बात लगातार ध्यान खींच रही थी। वो थी जय भीम के नारे….” X, 31 July 2026. x.com/ImAvdheshkumar/status/2083251436247478587. Accessed 14 Aug. 2026.
Mishra, Esha. “An IITian, a Lawyer, a Journalist, a Farm Activist: Meet the Leaders of the CJP Movement.” ThePrint, 29 July 2026. theprint.in/india/an-iitian-a-lawyer-a-journalist-a-farm-activist-meet-the-leaders-of-the-cjp-movement/2999761/. Accessed 14 Aug. 2026.
Mishra, Esha. “Half of CJP Core Cockroaches Have AAP in Their Past.” ThePrint, 13 Aug. 2026. theprint.in/politics/half-of-cjp-core-cockroaches-have-aap-in-their-past/3012573/. Accessed 14 Aug. 2026.
Mishra, Manikant. “Women in the Tent: CJP’s Female Members Who Stood Their Ground.” The Tribune, 26 July 2026. www.tribuneindia.com/news/india/women-in-the-tent-cjps-female-members-who-stood-their-ground/. Accessed 14 Aug. 2026.
Mondal, Manisha. “Cockroach Janta Party Dalit Founder Abhijeet Dipke Faces Caste Attacks on X.” ThePrint, 21 May 2026. theprint.in/feature/cockroach-janta-party-dalit-abhijeet-dipke-caste-attacks/2937920/. Accessed 14 Aug. 2026.
NDTV. “CJP Chief Abhijeet Dipke Backs Reservation, Targets Management Quota.” NDTV, 3 Aug. 2026. www.ndtv.com/shorts/cjp-chief-abhijeet-dipke-backs-reservation-targets-management-quota-1137380. Accessed 14 Aug. 2026.
Ranka, Ashutosh. “जाति की राजनीति करना सबसे आसान काम होता है। और सबसे विनाशकारी भी। अपनी जाति का नारा पकड़ो….” Facebook. www.facebook.com/ashutosh.ranka/posts/pfbid02Vcq1NnYHJR4VKL1in3468mjUFwE8DsK7jwJnEyYZdipCUstAwwJGSxMLS1ZXHJFvl. Accessed 14 Aug. 2026.
Ranka, Ashutosh [@AshutoshRanka]. “जय भीम दलितों का नारा नहीं है। जय भीम समानता में विश्वास रखने वाले हर सच्चे भारतीय का नारा है।” X, 1 Aug. 2026. x.com/AshutoshRanka/status/2083405756817399830. Accessed 14 Aug. 2026.
Salt By Lutyens. “Reservation Is Medicine, Casteism Is the Disease! | Vijeta Dahiya.” YouTube, 11 Aug. 2026. youtu.be/SiyG_2ou9To. Accessed 14 Aug. 2026.
Sangbad Pratidin. “Cockroach Janta Party | পাকিস্তান নাকি ভারত? কে চালাচ্ছে ‘আরশোলা’র দল? Exclusive দলের মুখপাত্র সৌরভ.” YouTube, 3 June 2026. youtu.be/03nHNVnF2Q0. Accessed 14 Aug. 2026.
Talk with Parmindar. “मुझे जाट होने पर गर्व नहीं है | Vijeta Dahiya | Talk With Parmindar.” YouTube, 9 May 2026. youtu.be/kzcx541reOA. Accessed 14 Aug. 2026.
Trending Desk. “Cockroach Janta Party: Who Is the Founder, Website Link, Manifesto, and Why It’s Going Viral.” The Economic Times, 20 May 2026. economictimes.indiatimes.com/news/new-updates/cockroach-janta-party-explodes-on-social-media-who-is-the-founder-website-link-manifesto-leaders-and-why-its-going-viral/articleshow/131191686.cms. Accessed 14 Aug. 2026.
पांडे, अंकिता. “कॉकरोच जनता पार्टी ने बनाई 15 लोगों की नई टीम, इनमें किन जातियों का दबदबा है?” TV9 Bharatvarsh, 6 Aug. 2026. www.tv9hindi.com/india/cockroach-janta-party-new-working-committee-caste-equation-3873234.html. Accessed 14 Aug. 2026.
श्रीवास्तव, निमिषा. “CJP ने आंदोलन के तय किए केवल ये 4 नारे, आशुतोष रांका बोले, ‘वो बस मौका ढूंढ रहे हैं…’” ABP Live, 22 July 2026. www.abplive.com/states/delhi-ncr/delhi-protest-cjp-ashutosh-ranka-advices-students-to-stay-on-four-slogans-to-avoid-dispute-3163957. Accessed 14 Aug. 2026.
[i]Chand, Sakshi. “Cockroach Janta Party Sacks Vijeta Dahiya as Spokesperson after Viral Video.” The Indian Express, 21 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[ii]Sangbad Pratidin. “Cockroach Janta Party | পাকিস্তান নাকি ভারত? কে চালাচ্ছে ‘আরশোলা’র দল? Exclusive দলের মুখপাত্র সৌরভ.” YouTube, 3 June 2026. Accessed 14 Aug. 2026; Mishra, Esha. “An IITian, a Lawyer, a Journalist, a Farm Activist: Meet the Leaders of the CJP Movement.” ThePrint, 29 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[iii]Das, Saurav. “Pune Police Evade the Law by Dodging Questions on Use of Israeli Spyware on Indian Citizens.” Article 14, 3 May 2022. Accessed 14 Aug. 2026; Das, Saurav. “Contrary to SC’s Rules of Assignment, at Least 8 Politically Sensitive Cases Moved to One Judge in 4 Months.” Article 14, 7 Dec. 2023. Accessed 14 Aug. 2026; Das, Saurav. “Takedown of Hate Tracker Highlights Secrecy around Modi Govt’s Internet Censorship Practices.” Article 14, 9 Feb. 2024. Accessed 14 Aug. 2026.
[iv]Talk with Parmindar. “मुझे जाट होने पर गर्व नहीं है | Vijeta Dahiya | Talk With Parmindar.” YouTube, 9 May 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[v]Salt By Lutyens. “Reservation Is Medicine, Casteism Is the Disease! | Vijeta Dahiya.” YouTube, 11 Aug. 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[vi]Baliyan, Deepak. “चौधरी दीपक बालियान.” Facebook. Accessed 14 Aug. 2026.
[vii]Mishra, Esha. “An IITian, a Lawyer, a Journalist, a Farm Activist: Meet the Leaders of the CJP Movement.” ThePrint, 29 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026; Baliyan, Deepak [@choudhary_deepak_baliyan]. “संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन में आदरणीय चौधरी राकेश टिकैत जी एवं समस्त SKM नेतृत्व द्वारा…” Instagram, 28 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026; Baliyan, Deepak [@choudhary_deepak_baliyan]. “कल एक ऐतिहासिक दिन रहा—देशभर से आए आदिवासी किसान और कबीलाई साथियों के साथ एक अहम अधिवेशन में शामिल…” Instagram, 26 May 2025. Accessed 14 Aug. 2026.
[viii]Ranka, Ashutosh [@AshutoshRanka]. “जय भीम दलितों का नारा नहीं है। जय भीम समानता में विश्वास रखने वाले हर सच्चे भारतीय का नारा है।” X, 1 Aug. 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[ix]श्रीवास्तव, निमिषा. “CJP ने आंदोलन के तय किए केवल ये 4 नारे, आशुतोष रांका बोले, ‘वो बस मौका ढूंढ रहे हैं…’.” ABP Live, 22 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[x]Ranka, Ashutosh. “जाति की राजनीति करना सबसे आसान काम होता है। और सबसे विनाशकारी भी। अपनी जाति का नारा पकड़ो…” Facebook. Accessed 14 Aug. 2026.
[xi]Gaur, Vaishnavi. Interview by Lynda Kinkade. “Cockroach Party Claims Victory as Education Minister Quits.” One World, CNN, 27 July 2026, 11:40–11:50. Accessed 14 Aug. 2026.
[xii]Mishra, Esha. “Half of CJP Core Cockroaches Have AAP in Their Past.” ThePrint, 13 Aug. 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xiii]Mishra, Manikant. “Women in the Tent: CJP’s Female Members Who Stood Their Ground.” The Tribune, 26 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xiv]Ellis-Petersen, Hannah. “‘What If All Cockroaches Came Together?’ The Youth Movement Threatening to Shake Up India’s Politics.” The Guardian, 8 June 2026. Accessed 14 Aug. 2026; HT News Desk. “‘DMs Filled with Death Threats’: CJP’s Ratna Singh Says She Relies on Lessons from Jantar Mantar Protest.” Hindustan Times, 29 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026; Mishra, Manikant. “Women in the Tent: CJP’s Female Members Who Stood Their Ground.” The Tribune, 26 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xv]पांडे, अंकिता. “कॉकरोच जनता पार्टी ने बनाई 15 लोगों की नई टीम, इनमें किन जातियों का दबदबा है?” TV9 Bharatvarsh, 6 Aug. 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xvi]Chaubey, Shravan Kr. “#सवर्णों_का_विरोध_का_नतीजा_एक_विकट_गया.” Facebook. Accessed 14 Aug. 2026.
[xvii]Trending Desk. “Cockroach Janta Party: Who Is the Founder, Website Link, Manifesto, and Why It’s Going Viral.” The Economic Times, 20 May 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xviii]Dipke, Abhijeet [@abhijeet_dipke]. “I Am a Dalit Myself. I Hope That Will Answer All Your Questions.” X, 21 May 2026. Accessed 14 Aug. 2026; Mondal, Manisha. “Cockroach Janta Party Dalit Founder Abhijeet Dipke Faces Caste Attacks on X.” ThePrint, 21 May 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xix]ANI [@ANI]. “#WATCH | Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra | Cockroach Janta Party…” X, 3 Aug. 2026. Accessed 14 Aug. 2026; NDTV. “CJP Chief Abhijeet Dipke Backs Reservation, Targets Management Quota.” NDTV, 3 Aug. 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xx]India Today [@indiatoday]. “CJP Founder Abhijeet Dipke Said Dr. B. R. Ambedkar Is Not Just a Leader of One Community…” Instagram, 31 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xxi]Jha, Sugandha. “You Can Stop Our Voice, but You Can’t Erase Us: CJP Founder Abhijeet Dipke.” The Times of India, 7 June 2026. Accessed 14 Aug. 2026; Kateel, Avinash, and Sushim Mukul. “We Went to Cockroach Party’s Jantar Mantar Protest. This Is What We Saw.” India Today, 7 June 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xxii]Joshi, Mallica. “Anna to Delhi via Boston: The ‘Cockroach’ Who Sparked a Metamorphosis.” The Times of India, 26 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.
[xxiii]Frontline. “Abhijeet Dipke on Ambedkar’s Impact in His Life.” YouTube. Accessed 14 Aug. 2026.
[xxiv]Kumar, Avdhesh [@ImAvdheshkumar]. “20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एक बात लगातार ध्यान खींच रही थी। वो थी जय भीम के नारे…” X, 31 July 2026. Accessed 14 Aug. 2026.

