दक्षिणावर्त: सेकुलर खोल, बाइनरी बोल और अश्लीलताओं के बीच

हरेक घटना के पक्ष या विपक्ष में बैटिंग तो हो रही है, लेकिन किनारे बैठकर थोड़ी धूल बैठ जाने का इंतजार नहीं किया जा रहा है। राजनेताओं का तो समझ में आता है, लेकिन हम जैसे जो आम लोग हैं, उन्हें पंजाब पर राहुल गांधी को और हाथरस पर योगी आदित्यनाथ को घेरने में क्यों संकोच हो रहा है, यह समझ के बाहर है।

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दक्षिणावर्त: तनिष्क का ‘एकत्वम’ और विकृत अस्मिताओं का दोयम

मजहब या रिलीजन के बदले हम धर्म शब्द का प्रयोग कतई नहीं कर सकते। दूसरे, अब्राहमिक मजहबों के बरक्स जिस क्षण आप सनातन धर्म को खड़ा करते हैं, आप ठीक वही गलतियां करते हैं जो 200 वर्षों तक हमारे आका रहे अंग्रेज आक्रांताओं ने सोच समझ कर की।

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दक्षिणावर्त: भाभी जी हाथरस में हैं, सत्य कहां है?

ये सारी जानकारी हम तक बुद्धू बक्सा पहुंचा रहा है। इस बीच एसआइटी की जांच अपनी गति से चल रही है जबकि प्रशासन अपनी मंथर गति के सहारे अपने छूटे कस-बल को पेंचदार बना रहा है।

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दक्षिणावर्त: न्‍याय की चिता पहले ही जल चुकी है, अब केवल प्रहसन बाकी है

कल एक चैनल की अदाकारा ने जिस तरह हाथरस के एसडीएम को लाइव जलील किया या धमकी दी, वह कौन सी पत्रकारिता है? इसका अंजाम तो वही होना था, जो हुआ। दूसरा एंकर अपने स्टूडियो में चीखते-नाचते हुए जुगाड़-मीडिया को बेनकाब करेगा ही। इसमें नुकसान किसका हुआ? गर्भपात तो न्याय का ही हुआ न!

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दक्षिणावर्त: More Power to You, Anushka! (ये शीर्षक नहीं, डिसक्लेमर है)

हाल यह है कि हम पोस्ट-ट्रुथ के युग में जी रहे हैं, जहां लिखे हुए शब्दों पर ही भरोसा नहीं है। जिस वक्त कुछ भी लिखा या कहा जा रहा है, लोगों के दिमाग में यह बात आती है कि यह झूठ तो नहीं, फ़ेक तो नहीं?

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दक्षिणावर्त: बीजेपी आइटी सेल, नैरेटिव निर्माण और लेफ्ट का सरलीकरण

यदि भारत के सवा अरब मनुष्यों में से कोई भी अपनी आइडी से कुछ भी भाजपा के पक्ष में, वामपंथ के खिलाफ लिखता है, तो वह आइटी सेल का नहीं होता। इसी तरह भाजपा का विरोध करने वाला हरेक व्यक्ति ‘लिब्रांडू’, ‘वामी-कौमी’ या ‘सिकुलर’ नहीं होता।

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दक्षिणावर्त: त्र्यंबक का संज्ञाहरण

उसके दिमाग को पढ़ा जा रहा था। यह बात वह अपनी पत्नी और एकमात्र दोस्त से कई बार बता चुका था, लेकिन दोनों ने ही उसकी बात को हवा में उड़ा दिया था।

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दक्षिणावर्त: 12 करोड़ जिंदा प्रेतों का डूबता प्रदेश, जहां किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता!

बाढ़ में लोग चूड़ा, सत्तू और बिस्किट लेकर आनंदित हैं, अगर टी-शर्ट मिल जाए तो क्या ही अच्छा, सोने पर सुहागा। सरकार ने 6 हजार नकद का भी दांव चल दिया है। उज्ज्वला का सिलिंडर भी है ही।

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दक्षिणावर्त: आज़ादी के 73 वर्ष, कुछ मील के पत्थर और…

इस्लाम को भारतीयता के अनुकूल न ढालकर फिलहाल हमारे समय की दो बड़ी विचारधाराएं एक ही गलती कर रही हैं। यह गलती भारत को भारी पड़ने वाली है।

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दक्षिणावर्त: राम मंदिर बनने से कुछ नहीं बनने वाला, फिर भी बनने दीजिए!

अगर राम-मंदिर बन ही रहा है, तो भी समस्याएं रहेंगी, उनके साथ हमें जीना होगा, उनके निबटारे का प्रयास करना होगा, लेकिन देश में बहुसंख्यक आबादी के पुराने ज़ख्‍म पर मुकम्‍मल मरहम लगेगा और घाव दोबारा नहीं बहेगा।

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