साम्राज्यवाद के विरुद्ध अडिग चट्टान थे फिदेल कास्त्रो: 96वें जन्मदिन पर विशेष आयोजन

इन फिल्मों को हिंदी में डब करके हिंदी के दर्शकों को दिखाना भी बहुत ज़रूरी है ताकि नयी पीढ़ी के लोग हाड़-माँस के बने फिदेल कास्त्रो, चे गुएवारा, सल्वादोर अलेंदे, शेख मुजीबुर्रहमान आदि जैसे अजूबे करिश्माई व्यक्तित्वों को जान सकें और उनसे ये सीख सकें कि लोग ऐसे करिश्माई पैदा नहीं होते बल्कि असाधारण हालात साधारण लोगों को भी करिश्माई बना देते हैं।

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दो बच्चियों के खोने और मिलने से उपजे कुछ विचार

शहर में रहने वाले हर नागरिक को मानवीय गरिमा के साथ अपनी रोजी-रोटी कमाने का अवसर मुहैया करवाना भी सरकार की ज़िम्मेदारी है। धर्मार्थ भोजन बाँटना, प्याऊ खोलना अच्छे काम हैं लेकिन ऐसी व्यवस्था कायम करना जहाँ किसी को भीख माँगने की आवश्यकता महसूस ही न हो, इससे बड़ा जनहित का काम कोई नहीं।

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किसान आंदोलन के नेतृत्व को रचनात्मक तरह से अपनी शांतिपूर्ण छवि को वापस हासिल करना होगा

योगेंद्र यादव जैसे नेता तो इल्जाम लगाए जाने के पहले से ही गलती मानने और कृत्य की निंदा करने को तैयार बैठे थे जैसे चौरी-चौरा कांड हो गया हो और गाँधी जी की तर्ज पर इन्हें भी आंदोलन वापस लेने का ऐतिहासिक मौका मिला हो। जो हुआ, वैसा होना एक बड़ी चूक है लेकिन इतनी बड़ी भी नहीं कि आप सरकार द्वारा परोसी आंदोलन विरोधी हर खबर को सच मान लें और उसी रौ में बह जाएं।

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