जिस राष्ट्र में अपने मन-विचार से काम करने की आजादी न हो, उसे नष्ट हो जाना चाहिए: स्वामी विवेकानंद

पिछले कुछ दशकों में खासतौर से 90 के बाद चली धार्मिक कट्टरता की हवा ने विवेकानंद जैसे क्रांतिकारी, संन्यासी और मानवतावादी दार्शनिक को हिंदू पहचान के साथ जड़बद्ध कर दिया. और ध्यान रहे ये सब कुछ सायास, एक परियोजना के तहत किया गया था ताकि हिंदुत्व के खोखले दावे को अमली जामा पहनाने के लिए एक नायक की तलाश पूरी की जा सके.

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सुप्रीम कोर्ट की बनायी कमेटी के सारे सदस्य कृषि कानूनों का पहले ही समर्थन कर चुके हैं!

समिति वही राय देगी जो सरकार चाहती है। अब किसानों को आंदोलन खत्म करना होगा वर्ना लोग कहेंगे कि किसान सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं मानते। कुछ दिन के अंतराल के बाद नया कानून फिर लागू हो जाएगा

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बाबा लाल दास का प्रेत अयोध्या में आज भी मंडरा रहा है!

संत लाल दास वही शख्स थे जिन्होंने राम मंदिर-बाबरी विवाद के शांतिपूर्ण हल की बात की थी. वो इस मुद्दे के राजनीतिकरण के सख्त खिलाफ थे. जब तक वो जिंदा रहे परिषद, बीजेपी और आरएसएस की दाल अयोध्या में नहीं गल पायी.

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(फ्री) सेक्स विमर्श को यहां से देखो राष्ट्रवादियों!

यौन संतोष और आर्थिक फायदा – विवाह के ये दो अहम स्तंभ हैं. सैकड़ों सालों से ऐसा ही चला आ रहा है लेकिन अब स्थितियां अदृश्य रूप से बदल रही हैं.  दरअसल, उत्पादन संबध बदल रहे हैं इसीलिए. तेजी से पसरते हुए मध्यवर्ग का एक तबका फ्री सेक्स के विचार को सैद्धांतिक तौर पर भले ही न माने लेकिन इसकी व्यावहारिकता से शायद ही परहेज करेगा.

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