ऑनलाइन मीडिया मंचों के गले तक पहुंचा सरकारी निगरानी का फंदा, OTT भी जद में

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टीवी, मीडिया के प्रसारण पर नियंत्रण और कन्टेन्ट पर निगरानी के सम्बन्ध में जवाब मांगा था, जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया था कि ऑनलाइन माध्यमों का रेगुलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है.

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पचनद पर दीप पर्व: एक दिया शहीदों के नाम, एक दिया चंबल में शिक्षा के नाम

स्थानीय जलवायु व भौगोलिक परिस्थितियों की उपेक्षा से मुक्ति के लिए यहां की पहचान को वैश्विक राष्ट्रीय धरातल पर उतारने का यह छोटा सा कदम है। यमुना चंबल के बीहड़ों की जो पहचान आजादी से पूर्व और आजादी के बाद रही है उसे चंबल फाउंडेशन के जरिये नए कलेवर में दुनिया के सामने रखने का यह सामूहिक प्रयास है।

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उत्तर प्रदेश में मायावती राज और दलित उत्पीड़न

अब यह सामान्य अपेक्षा है कि जिस राज्य में सवर्ण मुख्यमंत्री के स्थान पर कोई दलित मुख्यमंत्री बनेगा वह दलित उत्पीड़न को रोकने के लिए वांछित इच्छाशक्ति दिखायेगा और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराएगा ताकि दलित उत्पीड़न कम हो सके. पर क्या वास्तव में ऐसा होता है?

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अंतिम नतीजा चाहे जो हो, यह जनादेश सिर्फ और सिर्फ नीतीश के खिलाफ है!

तेजस्वी अगर इस चुनाव के एकल विजेता हैं, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हार के सर्वाधिक उचित व्यक्तित्व। वैसे तो राजनीति में नैतिकता और शर्म नामक शब्द होते नहीं, लेकिन नीतीश को नतीजे देखते हुए खुद ही अब संन्यास ले लेना चाहिए, केंद्र की राजनीति चाहें तो करते रहें।

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फ़ैसल खान की गिरफ़्तारी साझा संस्कृति के नये नारे की जरूरत को रेखांकित करती है

भारत के अन्दर तेजी से बदलता यह घटनाक्रम दरअसल सदिच्छा रखने वाले तमाम लोगों- जो तहेदिल से सांप्रदायिक सद्भाव कायम करना चाहते हैं, जहां सभी धर्मों के तथा नास्तिकजन भी मेलजोल के भाव से रह सकें- के विश्वदृष्टिकोण की सीमाओं को भी उजागर करता है।

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बिहार: बनमनखी चीनी मिल के भव्य खंडहरों में छुपी है रोज़गार के चुनावी वादों की कड़वाहट

विडम्‍बना है कि जिस राज्‍य में कुछ दशक पहले तक सिर्फ चीनी से कई लाख लोगों को रोजगार मिलता था, आज वही रोजगार चुनावी वायदों और घोषणाओं में ढूंढा जा रहा है।

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COVID-19 से उपजे आर्थिक दबाव में पांच लाख से ज्यादा लड़कियां बाल विवाह के लिए मजबूर

सिविल सोसाइटी संगठनों की मदद से चलाये जा रहे वैश्विक प्रयासों द्वारा पिछले एक दशक में बाल विवाहों की संख्या में 15% तक की कमी अवश्य आयी है, लेकिन 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने लिए एक लंबा रास्ता तय करना अभी बाकी है।

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कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ किसानों के सफल चक्का जाम का व्यापक असर

गुरुवार को 500 से अधिक किसान संगठनों द्वारा “कॉर्पोरेट भगाओ-खेती-किसानी बचाओ-देश बचाओ” के केंद्रीय नारे पर देशव्यापी चक्का जाम का आह्वान किया गया था। माकपा सहित प्रदेश की पांचों वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता भी इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतरे।

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US चुनाव से ठीक पहले किया गया BECA समझौता कहीं हमारी स्वायत्तता से समझौता तो नहीं?

इस समझौते पर हस्ताक्षर तब हुए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में एक हफ्ते से भी कम समय रह गया है। क्या यह अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं होता कि हम इन चुनावों के परिणामों की प्रतीक्षा करते और इसके बाद इन समझौतों के लिए आगे बढ़ते? यह हड़बड़ी क्यों की गई?

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बदलाव के कगार पर बिहार: चुनाव के मुद्दे व संबंधित संदर्भ

आज के चुनावी परिदृश्य में एक तरफ जहां सुशासन बाबू अपने ही बनाये ताने-बाने में उलझे, अटके, फंसे पड़े दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक 31 साल का नौजवान नये जोश और उमंग से लबरेज पूरे वातावरण में ताजगी और बदलाव का समां बांध रहा है। एक से एक चुनावी रणकौशल के उस्ताद से लेकर तथाकथित चुनावी चाणक्य तक इस नौजवान की हुंकार के सामने बौने नज़र आ रहे हैं।

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