परिवार नियोजन क्या अकेले महिलाओं का ही दायित्व है?

भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के मुताबिक, 40 प्रतिशत भारतीय पुरुषों का मानना है कि गर्भ निरोध का दायित्व महिलाओं पर है और पुरुषों को इसके बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए. शायद यही कारण है कि भारत में महिला नसबंदी सबसे ज्यादा लोकप्रिय गर्भनिरोधक विधि है और इसका उपयोग करने वालों की संख्या भी सबसे अधिक – 36 प्रतिशत – है जबकि पुरुष नसबंदी मात्र 0.3 प्रतिशत है.

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COVID-19 के दौरान महिला-हिंसा की समानांतर महामारी पर APCRSHR-10 में चर्चा

हाल ही में संपन्न हुए एपीसीआरएसएचआर10 (10वीं एशिया पैसिफिक कांफ्रेंस ऑन रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ एंड राइट्स) के दूसरे वर्चुअल सत्र में महिला-अधिकार पर काम करने वाली अनेक महिलाओं ने एशिया पैसिफिक में कोविड-काल के पश्चात जनमानस के अधिकारों और विकल्पों को गतिशीलता प्रदान करने के विषय पर चर्चा करते हुए एशिया पैसिफिक में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनके अधिकारों के संबंध में केवल खानापूर्ति की गई है.

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सतत विकास के लिए आयु-अनुकूल व्यापक यौनिक शिक्षा क्यों है ज़रूरी?

इस शिक्षा को आप कोई भी नाम दे सकते हैं- ‘लाइफ स्किल्स एजुकेशन’ या ‘हेल्थ एजुकेशन‘, या ‘कम्प्रेहेन्सिव सेक्सुएल्टी एजुकेशन (सीएसई – व्यापक यौनिक शिक्षा). महत्वपूर्ण बात यह है कि इस शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है: युवा वर्ग को अपनी व्यक्तिगत गरिमा तथा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए समुचित जानकारी उपलब्ध कराना तथा एक सकारात्मक सोच विकसित करके जेंडर समानता की ओर अग्रसर होना।

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