पचनद पर दीप पर्व: एक दिया शहीदों के नाम, एक दिया चंबल में शिक्षा के नाम


पचनद (जालौन): धार्मिक मान्यता के अनुसार चंबल नदी की पूजा तो नहीं होती, मगर पांच नदियों के संगमस्थल पचनद पर चंबल परिवार की तरफ से कई वर्षों से सभी नदियों की एक साथ सामाजिक उपासना व संवर्धन  की परंपरा शुरू की गई है। नदियों के पर्यावरणीय महत्व के मद्देनजर पांच नदियों के संगम पर दीप पर्व का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक संध्या के मुख्य अतिथि जंग-ए-आजादी आंदोलन के अमर बलिदानी बलदेव सिंह के वंशज जिलेदार सिंह रहे। अध्यक्षता प्रसिद्ध पर्यावरण प्रशांत विश्नोई ने की व सांस्कृतिक संध्या में लोकगायक सिद्दीक अली ने समा बांध दिया।

उपेक्षाओं के भंवर में फंसे यमुना-चंबल के बीहड़ों को पहचान दिलाने के क्रम में दीप पर्व के जरिये इसकी ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता को देश दुनिया के सामने लाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।

बीते वर्ष विश्व भर की 150 भाषाओं के गजल गायक और तीन बार गिनीज़ बुक में अपना नाम दर्ज कराने वाले डॉ. गजल श्रीनिवास ने पचनद पर स्वरनाद किया था। इससे चंबल तथा अन्य नदियों के संरक्षण के प्रति सचेतना पैदा करने की कोशिश की गई थी।

स्थानीय जलवायु व भौगोलिक परिस्थितियों की उपेक्षा से मुक्ति के लिए यहां की पहचान को वैश्विक राष्ट्रीय धरातल पर उतारने का यह छोटा सा कदम है। यमुना चंबल के बीहड़ों की जो पहचान आजादी से पूर्व और आजादी के बाद रही है उसे चंबल फाउंडेशन के जरिये नए कलेवर में दुनिया के सामने रखने का यह सामूहिक प्रयास है।

मान्यता है कि यमुना चंबल सहित तीन अन्य बरसाती नदियों का यह संगम पौराणिक व पर्यावरणीय महत्व का भी है। मान्यता है कि यहां तुलसीदास ने रामचरितमानस का एक अध्याय पूरा किया था जबकि पांडवकाल के द्वापरयुगीन अवशेष यहां आज भी मिलते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला ऐतिहासिक मेला पंचनद की विशिष्ट पहचान है। औरैया-इटावा और जालौन की सीमा के बीच यह स्थल पर्यावरणीय महत्व के लिए भी जाना जाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य को विकसित करने और सामाजिक एकजुटता के साथ पचनद को उन्नत स्वच्छ पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए दीप पर्व जैसा आयोजन उत्सव उल्लास के साथ सामूहिक मेल मिलाप का स्नेहिल संदेश देगा।

इस ऐतिहासिक अवसर के आयोजन में मुख्य रूप से वीरेंद्र सिंह सिंह सेंगर, विनोद सिंह गौतम, राम सुंदर यादव, अंकित कुमार, सल्ले मिश्रा, इं. शहाबुद्दीन, गजेंद्र सिंह, नन्दकुमार बौद्ध, पंचम सिंह, शीलेन्द्र प्रताप सिंह, सचिन चौधरी, सुदीप दिवोलिया, सौरभ धोलिया, भूरे दुबे आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।


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