तेलंगाना सरकार की ‘कल्याण-लक्ष्मी/शादी-मुबारक’ योजना की सफलता और कुछ सवाल
भारतीय समाज में लड़की की शादी माता-पिता के लिए एक चुनौती होती है क्योंकि हमारे समाज में आज भी लड़की को एक बोझ के रूप में ही समझा जाता है। …
Read MoreJunputh
भारतीय समाज में लड़की की शादी माता-पिता के लिए एक चुनौती होती है क्योंकि हमारे समाज में आज भी लड़की को एक बोझ के रूप में ही समझा जाता है। …
Read More
इस ग़ज़ल को सबसे पहले संभवतः आबिदा परवीन ने ही गया था जो कि नसीर के मोहल्ले में रहती थीं और उनके नसीर से अच्छे ताल्लुकात थे। लेकिन यह ग़ज़ल लोगों, खास कर पाकिस्तानी अवाम की ज़बान पर तब चढ़ी जब यह मशहूर पाकिस्तानी टीवी ड्रामा हमसफ़र का टाइटल साउंड ट्रैक बना।
Read More
भारत की बेरोजगारी अथवा अर्द्धबेरोजगारी की समस्या का हल यह है कि रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाए। अमीर-गरीब के अंतर को कम करना पड़ेगा। ऐसा नहीं होना चाहिए कि हमारा एक पूंजीपति मुकेश अंबानी तो दुनिया के दस सबसे अमीर लोगों में शामिल हो जाए और आधी आबादी इतनी गरीबी में जीने को मजबूर हो कि अपने बच्चों का कुपोषण भी दूर न कर सके।
Read More
जिन मानवाधिकारों की कल्पना विश्व समुदाय द्वारा की गयी है उसका मूल आधार ही गुणवत्तापरक शिक्षा है और इसके अभाव में एक सशक्त स्वतंत्र जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। शिक्षा के अभाव में व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में गिरावट आती है जिसका प्रभाव कालान्तर में राष्ट्रीय स्तर पर परिलक्षित होता है। गुणवत्तापरक शिक्षा के अभाव का सबसे ज़्यादा असर गरीबी में जीवनयापन करने वाले लोगों पर ही पड़ रहा है जो सीधे सीधे उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
Read More
एक समाज के तौर पर या उसके प्रातिनिधिक सैंपल के तौर पर लालू के परिवार से ताकतवर, धनी और सामाजिक तौर पर सशक्त परिवार से बड़ा उदाहरण क्या होगा, प्रियंका वाड्रा से सशक्त व्यक्ति कौन होगा, लेकिन ये दोनों भी जब बढ़कर चुनाव करते हैं तो हिंदुत्व को गाली देने के तमाम आयामों के बावजूद मिसेज वाड्रा फिर से उसी हिंदुत्व की शरण जाती हैं, यहां तक कि ये भी कहती हैं कि वह 17 वर्ष की अवस्था से व्रत रख रही हैं और उन्हें किसी योगी आदित्यनाथ के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। तेजस्वी यादव जब प्रेम-विवाह करते हैं तो एक उदाहरण तो पेश करते हैं युवाओं के सामने, अंतर्धार्मिक विवाह कर,लेकिन फिर ढाक के तीन पात। वह रेचल को न केवल हिंदू बनाते हैं, बल्कि यादव ही बनाते हैं।
Read More
खूबसूरत समुद्री किनारोंवाला गोवा सभी को लुभाता है लेकिन कोरोना की कसक के बीच खराब आर्थिक हालात से लोग हैरान हैं। धंधा चौपट है, फिर भी चुनाव तो होना ही है, सो दुष्कर हालात में भी गोवा अपनी राजनीति के नये प्रतिमान गढ़ने की तरफ बढ़ रहा है।
Read More
मनावर से कांग्रेस विधायक और जसय के संस्थापक हीरालाल अलावा के अनुसार राज्य सरकार ने औपचारिकता के नाते जनप्रतिनिधियों से पेसा नियम पर सुझाव और आपत्तियां बुलायी तो थीं मगर उन्हें शामिल नहीं किया गया। भाजपा के आदिवासियों पर अचानक उमड़े प्रेम को वे राजनीति से प्रेरित बतलाते हैं।
Read More
संवैधानिक प्रजातंत्रों पर संकट विश्वव्यापी है- ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, पोलैंड, हंगरी, तुर्की और इजराइल इसके उदाहरण हैं, लेकिन इन देशों की तरह हमारे देश में न तो आपातकाल लगा है न ही सेना सड़कों पर गश्त कर रही है, न ही नागरिक अधिकारों को निलंबित रखा गया है बावजूद इसके हमारे संवैधानिक प्रजातंत्र पर संकट है।
Read More
क्या संविधान से हमें कुछ हासिल नहीं हुआ? जब हमारे साथ स्वतंत्र हुए देशों में लोकतंत्र असफल एवं अल्पस्थायी सिद्ध हुआ और हमारे लोकतंत्र ने सात दशकों की सफल यात्रा पूरी कर ली है तो इस कामयाबी के पीछे हमारे संविधान के उदार एवं समावेशी स्वरूप की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
Read More
2-3 दिसंबर, 1984 को घटित इस जघन्य कांड के पचीसवें वर्ष प्रकाश चन्द्रायन ने ‘राष्ट्रीय स्मृतिलोप’ शीर्षक से लंबी कविता रची और गोपाल नायडू ने एक मूर्तिशिल्प ‘भोपाल गैस काण्ड’ शीर्षक से रचा था। कविता 2017 में जारी हुई।
Read More