लद्दाख में जनवादी आंदोलनों पर पुलिस दमन के ख़िलाफ़ PUDR की अपील
24 सितम्बर को लद्दाख में पुलिस कारवाई में चार प्रदर्शनकारियों की मृत्यु हुई, 50 से अधिक लोग घायल हुए और 70 से अधिक युवकों को गिरफ्तार किया गया था
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24 सितम्बर को लद्दाख में पुलिस कारवाई में चार प्रदर्शनकारियों की मृत्यु हुई, 50 से अधिक लोग घायल हुए और 70 से अधिक युवकों को गिरफ्तार किया गया था
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जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जबकि पूरा पश्चिमी हिमालय प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ चुका है, लद्दाख की आवाज को गंभीरता से सुनने की जरूरत हैl दो विरोधी पड़ोसियों से घिरे इस संवेदनशील क्षेत्र के मुद्दों को हल करने में सरकार की लापरवाही देश पर भारी पड़ सकती हैl
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किसानों ने कहा कि एयरपोर्ट के विस्तारीकरण से ग्राम वासियों का विकास नहीं, विनाश होगा। किसानों ने सालों पहले कह दिया कि जमीन नहीं देंगे और भारत सरकार के मंत्री ने भी कह दिया है कि कोई प्रस्ताव नहीं है तो किस आधार पर सर्वे की बात कही जा रही है।
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दिल्ली से पधारी प्रमुख अतिथि, लेखिका-कवयित्री एवं एक्टिविस्ट अनिता भारती ने अपनी प्रभावशाली कविताएँ सुनाईं और कहा कि कोई भी भाषा छोटी या बड़ी नहीं होती। उन्होंने बताया कि मराठी से हिंदी में दलित साहित्य का अनुवाद पढ़ने के बाद उन्हें नई जीवन-दृष्टि और शक्ति प्राप्त हुई।
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यह विधेयक विपक्ष की अनुपस्थिति में बीना किसी चर्चा के पारित किया गया है। इतने महत्वपूर्ण विधेयक, जो संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है, को बिना बहस के जल्दबाजी में पारित करना विधानसभा अध्यक्ष की अलोकतांत्रिक कार्यशैली को दर्शाता है।
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काशी की धरती और लोगों ने देर से सही, लेकिन अपने प्रिय गुरु दिवंगत अनिल चौधरी का सुव्यवस्थित, सुचिंतित और भव्य तर्पण किया। संयोग से, इस साल का पितृपक्ष कल से शुरू होने जा रहा है। इस मौके पर काशी और अनिल चौधरी को याद करने का केवल यह मंतव्य है कि उनकी आत्मा अब मुक्त होकर हजारों देहों के माध्यम से आने वाले समय में मुक्ति के सपनों को अपना स्वर दे।
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पीयूडीआर टीम ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को विभिन्न स्तरों पर अपनी अकर्मण्यता और निष्क्रियता के कारण वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार पाया। इसी निष्क्रियता के परिणामस्वरूप, सामाजिक तनाव और हिंसा की घटनाओं में वृद्धि; आजीविका कमाने के अवसरों में गिरावट; तथा, गरीबों के लिए सुरक्षात्मक कानूनों की उपेक्षा के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ हुई हैं।
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मानवाधिकार आयोग का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिका संस्थाओं के लिए एक नजीर है कि राज्यों को बसे कमजोर की रक्षा करनी चाहिए, उपेक्षा नहीं
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दर्शकों को मेघनाथ की दो लघु फिल्में और भी देखने को मिली जिनमें एक तो जन गीत का स्वरूप ले चुके गीत गांव छोड़ब नाहीं, जंगल छोड़ब नाहीं तथा दूसरी मुंडा जनजाति पर एनिमेशन फ़िल्म थी।
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सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महासचिव डॉक्टर संदीप पांडेय ने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन है जब आज़ादी की वर्षगांठ पर गांव के लोग स्कूल बचाने के लिए सम्मेलन कर रहे हैं। गुलाम भारत में सन् 1944 में जिस विद्यालय की नींव रखी गई थी, आज़ाद भारत में कहा जा रहा है कि उसका अस्तित्व ही नहीं है।
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