शोपीस बन गए उज्‍ज्‍वला के सिलिंडर, लॉकडाउन में 31 लाख महिलाओं को नहीं मिला पैसा

सरकार कह रही है कि इनमें से 31 लाख महिलाओं को खाते में समस्या के कारण सरकारी मदद नहीं मिल सकी. सवाल ये है कि खाते ​की दिक्कत कोरोना काल में ही सामने कैसे आयी? क्योंकि इसके पहले उनके खातों में सब्सिडी की राशि तो पहुंचायी गयी थी.

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कोरोना से बचे तो बाढ़ ने लील लिया जीवन: बिहार से लेकर मध्‍यप्रदेश तक तबाही का आलम

एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 4 अगस्त तक बिहार में 19 लोगों की जान जा चुकी है और 63 लाख से ज्‍यादा लोग बाढ़ की चपेट में आये हैं. बिहार के 16 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में हैं.

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भूखे पेट, खाली खाता, सूनी थाली! मिड डे मील का राशन और पैसा बन गया ‘आपदा में अवसर’

सरकार का दावा है कि उसने तो बहुत पहले ही पके हुए मध्याह्न भोजन या फिर उसके बदले की राशि बच्चों के खाते में डाल दी है, पर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

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मौत के कगार पर हैं दिव्‍यांग व्‍यवस्‍था की सवा दो करोड़ सौतेली संतानें

सरकार ने अरबों के पैकेज की घोषणा की, राशन मुहैया करवाने का वादा किया, रोजगार का भरोसा दिलाया पर जब अच्छे-भले सामान्‍य लोगों को इन सबका फायदा नहीं मिल रहा तो भला दिव्यांगों के बारे में कौन सोचता है।

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28 फीसदी कवरेज वाले ‘आत्मनिर्भर भारत’ में राशन कार्ड होना भुखमरी से बचने की गारंटी नहीं है!

मोबाइलवाणी ने जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की और इस कोशिश को नाम दिया रोजी रोटी अधिकार अभियान। अभियान के तहत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के गांवों और शहरों में गरीब तबके के परिवारों से उनका हाल जाना।

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नाकाम मनरेगा और भूखे मजदूरों से बनेगा आत्मनिर्भर भारत? लॉकडाउन में चार राज्यों का एक सर्वे

अगर सरकार नामी उद्योगों को पैसा बांटने की बजाय मनरेगा में लगाये तो बिहार, झारखण्ड, छतीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जहां के गरीब लोग लौटकर आये हैं, उन्हें इस विकट स्थिति में अपने को गांवों में स्थापित करने में कुछ मदद इससे मिल सकेगी.

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भारत के गांवों में कैसे सफल होगी ऑनलाइन शिक्षा?

अगर सरकार की नीतियों की दिशा ये है कि डिजिटल एजुकेशन से काम चलाया जाएगा, तो इसके लिए तीन कदम उठाने होंगे. एक, देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन की सुविधा का विस्तार करना होगा और लैपटॉप या टैबलेट हर छात्र को मिल सके, ऐसी व्यवस्था करनी होगी. दो, छात्रों से भी पहले शिक्षकों को डिजिटल एजुकेशन के लिए तैयार करना होगा और उनकी ट्रेनिंग करानी होगी. तीन, डिजिटल एजुकेशन के लिए सिलेबस को बदलना होगा और नए टीचिंग मैटेरियल तैयार करने होंगे.

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