भारत क्या है? राज्यों का संघ या एक राष्ट्र?

आधुनिक युग में सामान्य रूप से राष्ट्र शब्द इंग्लिश शब्द नेशन का हिंदी रूपांतर माना जाता है। राष्ट्र, राज्य, राष्ट्रीयता, संघ सब अलग-अलग शब्द हैं, उनके अलग-अलग अर्थ हैं और उनकी अलग-अलग व्याख्याएं हैं, यह सभी समानार्थी नहीं हैं। सामान्यतया राष्ट्र और राज्य को एक मान लिया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग हैं।

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संविधान में वर्णित स्वतंत्र नागरिक नये भारत में आखिर कैसे बन गया दया का पात्र लाभार्थी?

यह कैसे हो गया कि आजादी के 75 साल बाद भी देश के नागरिक दो जून की रोटी भी जुटा पाने में असमर्थ है? तो क्या यही आर्थिक रूप से असमर्थ नागरिक लाभार्थी में बदल दिए गए हैं? सवाल है कि क्या हमारे देश के स्वतन्त्र नागरिक अब लाभार्थी हो गए?

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विधानसभा चुनाव नतीजे: आर्थिक स्वतंत्रता के बिना क्या स्वतंत्र राजनीतिक निर्णय ले सकती है जनता?

संविधान निर्माताओं की आशंका और चेतवानी को ध्यान में रखते हुए देश के संसदीय चुनाव को इसी नजरिये से देखना चाहिए कि क्या आर्थिक रूप से विपन्न समाज राजनैतिक निर्णय लेने में स्वतंत्र है? या कुछ आर्थिक मदद करके उसकी राजनैतिक स्वतंत्रता को छीना अथवा प्रभावित किया जा सकता है?

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राज्य-विभाजन की ओर बढ़ते झारखंड के भाषा आंदोलन को अतीत के आईने में कैसे समझें

भाषा, क्षेत्रीयता, धर्म, संप्रदाय, जातिवाद, राजसत्ता के ऐसे हथियार हैं जिसका समय-समय पर प्रयोग करके सत्ताएं जनता की एकता को तोड़ती रहती हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में क्षेत्रीयता के नाम पर दूसरे प्रान्तों के मजदूरों के साथ क्या हुआ था? इस घटना को बीते अभी बहुत साल नहीं हुए।

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ओबीसी वोट की होड़ में कैसे दब गया जातिगत जनगणना का मुद्दा

राजनैतिक पार्टियों के लिए जाति जनगणना और आरक्षण महज एक चुनावी मुद्दे से ज्यादा कुछ भी नहीं है। जनता के जनहित के सभी मसले इन सभी राजनैतिक पार्टियों की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ रहे हैं।

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जनता के गुस्से के खिलाफ राजसत्ता का सेफ्टी वॉल्व है हिजाब प्रकरण!

देश में बढ़ती बेतहाशा महंगाई, पिछले दो वर्षों में कोविड के नाम पर खत्म किये गये रोजगार, बंद हो गए व्यवसाय, सरकारी संस्थानों को उद्योगपतियों को कौड़ी के मोल बेच दिया जाना, लोगों की गिरती आर्थिक दशा और गरीबी ने देश की जनता को संकट में डाल दिया है। उनका गुस्‍सा कभी भी फट सकता है जो सत्ताधारी के लिए संकट खड़ा कर सकता है। इसे शासक वर्ग जानता है।

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