बौद्ध धर्म की सामाजिक संलग्नता से सबक लेने का दौर
सभी धर्मों का उदय इस उद्देश्य से हुआ कि समाज को संतुलित व व्यवस्थित संस्था के रूप में रखने में मदद मिलेगी।
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सभी धर्मों का उदय इस उद्देश्य से हुआ कि समाज को संतुलित व व्यवस्थित संस्था के रूप में रखने में मदद मिलेगी।
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विदेश से आना तो फिर भी इस अखंड राष्ट्रवादी सरकार ने आसान कर दिया है लेकिन अपने ही देश में अपने ही घर लौटना सबसे ज़्यादा मुश्किल बना दिया गया है।
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सवाल है कि आख़िर राज्य के हर संसाधन में नागरिक होने के कारण अपनी हिस्सेदारी के एहसास में कमी मुसलमानों में किन वजहों से आयी है? इसके लिए कौन राजनीतिक शक्तियाँ ज़िम्मेदार हैं?
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ट्रोजन हॉर्स बनाये कौन? बन भी जाये तो हर खेमे में पलटू राम जैसे कई नेता हैं। फिर ये सारा खर्च उठाये कौन? वो भी तब, जब सारे धन का आभूषण पहने हाथी बैठा इठला रहा है।
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इस लेख में उन पांच प्रमुख एजेंडों की चर्चा है जिन्हें कोरोना वायरस के नाम पर साधा जा रहा है।
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स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, विपक्ष के प्रति उदासीनता, सरकारों का निरंकुश और तानाशाही रवैया तोड़ने का काम भी मीडिया ही करती है।
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डॉ. असगरी की दुर्दशा का किस्सा बरबस भारतीय जेल में बन्द एक दूसरे प्रोफेसर की उसी किस्म की स्थिति की तरफ ध्यान आकर्षित करता है, जिनका नाम है प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बडे
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हाल ही में जारी 180 देशों के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में भारत 142वें स्थान पर पहुँच गया है, जबकि बीते वर्ष भारत इस सूचकांक में 140वें स्थान पर था।
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देश की सभी सरकारों को चाहिए कि वे देश के सभी इंजन व इसके थक चुके कलपुर्जे, निजी हस्पतालों का फ़ौरन राष्ट्रीयकरण कर इस राष्ट्रीय आपदा के समय हुकूमत चुनाव प्रचार स्टाइल से बचकर टीम इण्डिया बनकर काम करें
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इन्हें इंसाफ की झलक भर दिखलाने का इकलौता तरीका यह है कि उच्च/सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करके सरकार को सड़क पर फंसे लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की जाए।
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