“अब कभी नहीं लौटेंगे, गांव में ही देखेंगे काम”: बनारस में छलका पुरबिया प्रवासियों का दर्द

वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र से गुजरने वाले वाराणसी-गाजीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर विगत रविवार से ही प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या दिख रही है

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इंदौर: आगरा-मुंबई हाइवे से प्रवासियों के महापलायन की कुछ स्याह दास्तानें

पिछले करीब डेढ़ महीने से खाली पड़ा प्रदेश का यह व्यस्ततम आगरा-मुंबई हाइवे आज पहले से भी अधिक चल रहा है।

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लॉकडाउन का बहीखाता: 50 दिन में हमारा एक-तिहाई समय आभासी दुनिया निगल गयी!

क्या एक स्मॉर्टफ़ोन मे आपकी ज़िंदगी सिमट गयी है? क्या यह डिवाइस आपसे ज्यादा स्मार्ट है?

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UP: लॉकडाउन ने तोड़ दी फूल उत्पादन की समूची आपूर्ति श्रृंखला और किसानों की कमर

तालाबंदी में पूरा समाज ठप हो गया, तो चेन टूट गयी। फूल खेतों में मुरझा गये। किसान तबाह हो गये।

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नागरिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए ज़रूरी है राज्य के साथ सही मुद्दों पर मोलभाव

मोलभाव करने के लिए हमें अपने हितों को समझना पड़ेगा, हमें समझना पड़ेगा कि राष्ट्रवाद, देशभक्ति, ईश्वर, अल्लाह, मंदिर, मस्जिद, सेना आदि के नाम पर हमें बरगलाया जा रहा है।

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कोरोना पर तो देर-सवेर विजय पा लेंगे, लेकिन नष्ट हो रही सामाजिक विरासत का क्या?

सोशल मीडिया पर नकारात्मक विचारों की अधिकता हमारी मूल सोच को प्रभावित कर समाज में दूषित मानसिकता को बढ़ावा देती है।

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मोहब्बत, इंसानियत और खुलूस के अधूरे सपने का नाम है कैफ़ी आज़मी

कैफ़ी का मानना था कि शायरी और कविता का इस्तेमाल समाज में बदलाव लाने वाले हथियार के रूप में होना चाहिए

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नफ़रत के ज़हर की नहीं, प्रेम की खुशबू की ज़रूरत है हमें…

बंधुत्व को बढ़ावा दिए बगैर हमारे देश में प्रजातंत्र जिंदा नहीं रह सकेगा. हमें यह भी याद रखना चाहिए कि अगर अल्पसंख्यकों का दानवीकरण रोका नहीं गया तो यह नफरत हमें किसी दिन हिंसा के ऐसे दावानल में झोंक देगी, जिसमें हमारा बुरी तरह से झुलसना अपरिहार्य होगा.

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मई के दूसरे हफ्ते तक एक-चौथाई शहरी आबादी बेरोज़गार, गांव भी होड़ में

अप्रैल के महीने के लिए बेरोजगारी की दर मार्च के अंत में 8.74% से 23.52% तक बढ़ गई, जो कोरोनावायरस के कारण राष्ट्रीय लॉकडाउन में केवल दो सप्ताह थी।

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लॉकडाउन गवाही दे रहा है कि व्यवस्था चलाने वाले मजदूरों की जान कितनी सस्ती है

नाकारा सरकार और अमानवीय प्रशासनिक अमले के लिए मजदूर अब भी सिर्फ एक संख्या ही रहेंगे। इसके बाद भी वह उनके लिए कुछ करने वाले नहीं हैं।

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