मई दिवस पर बाबासाहेब अम्बेडकर को याद करना क्यों ज़रूरी है

बाबासाहेब अम्बेडकर के द्वारा मज़दूरों के लिए किए गए योगदान को उनके सड़क से लेकर संसद तक के संघर्षो से ही नहीं बल्कि उनके राज्य विधायिका से लेकर संविधान सभा के संसदीय भाषणों से भी समझा जा सकता है।

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कोरोना और पूंजीवाद के दौर में काम और कामगार

भारत में पहली बार मजदूर दिवस पहली मई, 1923 को ‘मद्रास’ में ‘मलयपुरम सिंगरावेलु चेट्टियार’ के नेतृत्व में मनाया गया। एम. सिंगारवेलु ने उसी दिन मजदूर संघ के रूप में ‘लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान’ की स्थापना की। इस दिन भारत में पहली बार ‘लाल झंडा’ भी इस्तेमाल किया गया।

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काफ़िरोफोबिया: इस्लामोफ़ोबिया के आरोप के खिलाफ़ RSS की राजनीति का नया औज़ार

हिंदुत्व की ताकतों ने ‘हिन्दूफोबिया’ और ‘काफिरोफोबिया’ जैसे शब्द गढ़ लिए हैं जिनका इस्तेमाल वह एक “शस्त्र” की तरह कर रही हैं!

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वर्धाः खराब खाने की शिकायत पर विश्वविद्यालय ने छात्रा से लिया माफ़ीनामा, ABVP को उजागर कर दी पहचान

विश्वविद्यालय के करीब 200 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो लॉकडाउन की वजह से परिसर में ही फंस कर रह गये

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कोरोना से उपजे आर्थिक संकट पर राहुल गांधी और रघुराम राजन के बीच हुई पूरी बातचीत यहां पढ़ें

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस दौर में कुछ जानकारों के साथ कुछ विशिष्ट विषयों पर वीडियो चर्चा शुरू की है। इस कड़ी में उन्होंने विश्व के जानेमाने अर्थशास्त्री और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से आधे घंटे की बातचीत की जिसे विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर लाइव स्ट्रीम किया गया।

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समानता के विचार से इतना परहेज़ क्यों है सरकार, कि सुझाव देने वाले IRS अफ़सरों को ही मुजरिम बना दिया?

इस रिपोर्ट के आते ही वित्त मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ (CBDT) सकते में आ गये और आनन–फानन में इस रिपोर्ट से पल्ला झाड़ने लगे। मात्र चौबीस घंटे के अंदर रिपोर्ट जारी करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की दिशा में ठोस कदम उठा लिए गये।

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कोरोना संकट की आड़ में उपेक्षित अन्य गंभीर रोग

कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया के लिए एकदम नई चुनौती है इसलिए इसकी स्पष्टता तक बाकी स्वास्थ्य समस्याओं को लम्बे समय तक नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता।

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थर्मल गन को थर्मल स्कैनर बताकर हवा में गोली चलाती रही सरकार और कोरोना घुस आया!

भारत सरकार कहती है, जनवरी के मध्य से ही उसने एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जाँच करना शुरू कर दी थी। आश्चर्य की बात है कि 8 जनवरी से 23 मार्च तक 15 लाख यात्री भारतीय एयरपोर्ट पर उतरे लेकिन एक भी ऐसी खबर नहीं है कि एयरपोर्ट पर हुई जाँच में कोई कोरोना पॉजिटिव यात्री पाया गया हो!

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लॉकडाउन में फैलती मर्दवाद की महामारी से कैसे निपटें?

महिला आयोग के मुताबिक पहले चरण के लॉकडाउन के एक सप्ताह के भीतर ही उनके पास घरेलू हिंसा की कुल 527 शिकायतें दर्ज की गयी हैं

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खज़ाना खाली हो चुका है, क्या नौ लाख करोड़ रुपये की मुद्रा छापेगी सरकार?

अमेरिकी सरकार की एजेंसी USAID ने कहा है कि वह भारत को 2.9 मिलियन डॉलर देगी, वहीं वर्ल्ड बैंक ने मात्र 1 बिलियन डॉलर देने की बात्त कही है!

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