माहवारी में पैदल चलती महिलाओं का दर्द क्या आपकी कल्पना के किसी कोने में है?

जरूरत है कि हम ‘पैडमैन’ जैसी फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर ताली बजाने को ही अपनी आखिरी जिम्मेदारी न समझ बैठें

Read More

किसानों-उद्यमियों का माल बिके और तुरंत मूल्य मिले, पैकेज में इसका इंतज़ाम नहीं है

कोरोना संकट में किसानों और उद्यमों के हाथ में नकद पैसा चाहिए। उनका माल बिके और मूल्य तुरंत मिले, इसकी व्यवस्था इस पैकेज में कहीं नहीं नज़र आती।

Read More

“कोरोना मने भूख से मरने की बीमारी”- दक्षिणी राजस्थान की आदिवासी औरतें ऐसा क्यों सोचती हैं?

हम यह देखने में चूक रहे हैं कि काम बंद नहीं हुआ है. बस अवैतनिक, अदृश्य और घर के भीतर महिलाओं द्वारा पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा काम किया जा रहा है

Read More

एक काला पहाड़ के पापों का बोझ भी सबको बांटना ही पड़ेगा…

जब हरेक राज्य का मुख्यमंत्री दावा कर रहा है कि उसने हालात को बिल्कुल संभाल लिया है, तो स्थिति इतनी बेकाबू क्यों है

Read More

60 दिन का लॉकडाउन बनाम 60 साल के पर्यावरणीय प्रोटोकॉलः कुछ नीतिगत सुझाव

60 दिनों में पर्यावरणीय स्थिति में जो सुधार देखने को मिला है वह 60 वर्षों में किये गये तमाम प्रयासों और जलवायु परिवर्तन के तमाम वैश्विक समझौतों के बावजूद नहीं हो सका था

Read More

एक महामारी से कैसे न लड़ें? मध्य प्रदेश के शिवराज ‘मॉडल’ में छुपा है जवाब

जब महामारी से बचाव के उपाय किये जाने थे तब मध्य प्रदेश में सरकार गिराने और बचाने का खेल खेला जा रहा था

Read More

गैर-मजदूर नागरिकों और अ-नागरिक मजदूरों से कुछ सवाल

जो दूसरों की नागरिकता के संदिग्ध होने की संभावना और उससे उनके च्युत कर दिए जाने की आशंका पर त्योहार मनाने की सोच रहे थे क्या वे अपने घरों को लौटते इन हजारों-लाखों सड़क पर रेंगते, घिसटते, भूखे प्यासे मजदूरों को इस देश का नागरिक मानते हैं या नहीं?

Read More

कोरोना महामारी में आख़िर मजदूरों की स्थिति इतनी बदतर क्यों हैं?

मजदूरों पर केंद्र या राज्य सरकारों की असफल, जनविरोधी नीतियों और प्रशासन की मार को रोक पाना फिलहाल असंभव है

Read More

घर लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए लैंड बैंक और भूमि का डिजिटलीकरण दो बाधाएं हैं

हमारे प्रवासी कामगारों को जीवनयापन करने के लिए अधिक से अधिक भूमि की आवश्यकता है, लेकिन यहां तो मौजूदा भूमि को भी भयावह तरीके से लूटा जा रहा है। ऐसे में प्रवासियों को उनका हक कैसे मिले?

Read More