कांग्रेस के पास दूसरा विकल्प इतिहास बन जाने का है, लेकिन पहले विकल्प को आज़माए बगैर नहीं

सेवा दल को कांग्रेस पार्टी का शक्ति केंद्र बनाया जा सकता है जिसके संघ परिवार की तरह सैकड़ों आनुवंशिक संगठन हों जिसमें एक कांग्रेस भी शामिल हो. ऐसा तभी हो सकता है जब गाँधी परिवार सेवा दल का पावर सेंटर बने. इसके लिए लंबी सोच, सही नजरिये और ठोस रणनीति की जरूरत होगी.

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COVID-19 का नया हॉटस्पॉट बन रहा है UP, भयावह स्थिति में पहुँच चुकी है बेरोज़गारी

प्रदेश में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सरकार का जोर आंकड़ेबाजी प्रस्तुत करने और प्रोपैगैंडा पर है। चाहे स्वास्थ्य सेवाओं का मसला हो, बेकारी अथवा कानून व्यवस्था का सवाल हो, अगर इन सवालों पर प्रभावी ढंग निपटा नहीं गया तो चीजें नियंत्रण के बाहर जा सकती हैं।

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जनता के फैसले का अपहरण संवैधानिक लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है

सत्ता का खून बीजेपी के मुंह को लग चुका है। मध्यप्रदेश के बाद उसका अगला निशाना राजस्थान बना लेकिन यहाँ अशोक गहलोत ज़रा जीवट वाले निकले। उन्होंने बीजेपी के हथियार से ही बीजेपी को पटखनी दे दी।

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ऑक्सीटॉसिन की अतृप्त प्यास और उफनते राष्ट्रवाद का वैश्विक जज़्बात

दुनिया भर के नेता अपनी जनता को विश्वास दिलाने में लगे हैं कि वे दुश्मन की सारी जमीन जीत लाएंगे और अपनी एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। जनता जानती है कि जब युद्ध होते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, सड़क, पानी के लिए जो पैसा लगना चाहिए था वह युद्ध में खर्च होता है, मगर जनता दिल के हाथों मजबूर है।

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आपदा को अवसर में बदल चुके निजी अस्पतालों के चलते यूपी में बढ़ रहा है कोरोना का कहर!

सहारनपुर के देवबन्द इलाके के लोग मेरठ जाकर एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यह खेल काफी दिनों से चल रहा है। मरीज़ की रिपोर्ट अगर पॉज़िटिव आ जाती है तो वहाँ निगेटिव कर देते हैं और मरीज़ का इलाज शुरू कर देते हैं जिससे अब तक लगभग कई लोग अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं।

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पोर्टलैन्ड के आंदोलन से क्या “दलित लाइव्स मैटर” के लिए हम कुछ रोशनी ले सकते हैं?

ऑक्युपाइ की तरह पोर्टलैन्ड का यह विरोध भी दैहिक है, भौतिक है- अप्रत्यक्ष या परोक्ष (वर्चुअल) नहीं। भारत में भी जातिवाद, पूँजीवाद जैसी विकृतियों के खिलाफ जो भी अभिव्यक्ति होनी है वह प्रत्यक्ष और वास्तविक रूप से ज़ाहिर करनी होगी।

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आज फूलन देवी को क्यों याद किया जाना चाहिए

सड़ चुके भारतीय समाज में आज़ादी और इंसान और उसमें भी स्त्री होने की कीमत कैसे चुकायी जा सकती है और कितनी चुकानी पड़ सकती है, यह जानना हो तो आपको फूलन के पास जाना ही पड़ेगा। कोई दूसरा रास्ता आपके पास नहीं है।

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समकालीन राजनीतिक इतिहास पर हज़ार साल बाद एक क्लास में छात्र-रोबो संवाद

यदि रोबोटिक गुरु के स्थान पर कोई जीवित गुरु होता तो इस उत्तर से शायद हताश होता कि एक हजार साल बाद भी भारतीय जनता परिवर्तन के लिए चमत्कारों पर ही उम्मीद लगाए हुए है, लेकिन वह तो रोबोट था, उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बिल्कुल वैसे ही जैसे आज हम लोकतंत्र की धज्जियां उड़ते देखकर भी मौन हैं।

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आज़ाद जनतंत्र में सत्तर साल बाद भी वेल्लोर से विरमगाम तक श्मशान भूमि से वंचित हैं दलित

जब दलितों ने सार्वजनिक तालाब से पानी का उपयोग शुरू किया, ऊंची जाति के लोगों ने रफ्ता-रफ्ता इसके प्रयोग को बन्द किया क्योंकि उनका कहना था कि अब पानी अशुद्ध हो गया है। मामला वहीं तक नहीं रुका।

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पुलिस रिफॉर्म के आईने में विकास दूबे केस, मथुरा के पुलिसवालों को सज़ा और जूलियस रिबेरो की चिट्ठी

आज ही प्रतिष्ठित रिटायर्ड पुलिस अधिकारी जिन्हें सुपर कॉप कहा जाता है, जूलियस रिबेरो ने देश भर के आइपीएस अधिकारियों के नाम एक खुला पत्र लिख कर पुलीस हिरासत में हुई मौतों और फर्जी मुठभेड़ों पर ही नहीं बल्कि वर्तमान सियासी व्यवस्था पर भी दुःख और नाराजगी ज़ाहिर की हैI

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