मॉनसून सत्र में प्रस्‍तावित तीन विधेयकों का विरोध और कंपनीराज के खात्‍मे की ज़रूरत

उस कार्यक्रम में सीबी सिंह ने उसी समय बहुत स्पष्ट रूप से कहा था कि इस देश में नई आर्थिक नीति आने के बाद सरकारों की योजना इन सरकारी मिलों को या सरकारी संस्थानों को पूरी तरह बेचने की है, इसे बचाना सहज कार्य नहीं है।

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धर्म, न्याय और बन्धुत्व की बात करने वाले एक वैदिक समाजवादी का जाना

धर्म के नाम पर सांप्रदायिकता और असहिष्णुता के खिलाफ लड़ाई में भी वे अग्रिम पंक्ति में डटे रहे. खासकर बहुसंख्यकवादी “हिंदुत्व” विचारधारा के खिलाफ उनका मानना था कि हिन्दुत्व की विचारधारा हिंदू धर्म का अपहरण करना चाहती है.

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गर्भधारण का आपातकाल बना लॉकडाउन, 14 देशों की 32 फीसद महिलाएं परिवार नियोजन में अक्षम

10वीं एशिया पैसिफिक कांफ्रेंस ऑन रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ एंड राइट्स के छठे वर्चुअल सत्र में आपातकालीन गर्भनिरोधक पर एशिया पेसिफिक संगठन (“एशिया पैसिफिक कंसॉर्शियम फॉर इमरजेंसी कंट्रासेप्शन”) के शुभारंभ के दौरान इन्हीं चिंताओं के संदर्भ में आपातकालीन गर्भनिरोधक की शोधकर्ता एवं ऑस्ट्रेलिया प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एंजेला डॉसन ने विचार रखे।

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पेट्रोलियम कंपनियों का निजीकरण हम सब के हितों के खिलाफ़ क्यों है?

नवंबर 2019 को केंद्र सरकार ने बी.पी.सी.एल. को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उस समय से देशभर में तमाम तेल कंपनियों – आयल एंड नेचुरल गैस कमीशन (ओ.एन.जी.सी.), इंडियन आयल कारपोरेशन (आई.ओ.सी.), हिन्दोस्तान पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड (एच.पी.सी.एल.), आयल इंडिया और बी.पी.सी.एल. की सभी मज़दूर यूनियनें इसका ज़ोरदार विरोध करती आ रही हैं।

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पहला सौर ऊर्जा शिखर सम्मेलन: अक्षय ऊर्जा से 2050 तक पैदा हो सकते हैं 50 लाख रोज़गार

इस अध्‍ययन को आज इंटरनेशनल सोलर अलायंस द्वारा आयोजित वर्ल्‍ड सोलर टेक्‍नॉलॉजी समिट में पेश किया गया। यह अध्‍ययन अपनी तरह का पहला मानकीकरण है जिसमें भविष्‍य की सबसे किफायती ऊर्जा प्रणाली का खाका तैयार करने के लिये भू-स्‍थानिक तथा घंटेवार मांग का विश्‍लेषण किया गया है।

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GDP के ऐतिहासिक पतन के बीच कृषि क्षेत्र में वृद्धि के क्या मायने हैं?

पिछले तीन दशकों में इस देश के किसानों ने लाखों की संख्या में आत्महत्या की है और दूसरी ओर देश के विकास में उद्योग और सेवा क्षेत्र का प्रतिशत बढ़ता गया है। चूँकि नब्बे के बाद मूलतः पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली देश में लागू करने की कोशिश की गई, इसलिए जब जब पूँजीवाद आर्थिक मंदी का शिकार हुआ है, तब उसके उत्पादन की श्रृंखला टूट गई है।

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कोरोना से बचे तो बाढ़ ने लील लिया जीवन: बिहार से लेकर मध्‍यप्रदेश तक तबाही का आलम

एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 4 अगस्त तक बिहार में 19 लोगों की जान जा चुकी है और 63 लाख से ज्‍यादा लोग बाढ़ की चपेट में आये हैं. बिहार के 16 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में हैं.

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क्या भारत का जनतंत्र फ़ेसबुक-ग्रस्त हो चुका है?

एक विशालकाय कम्पनी की सक्रियताओं को जानने के लिए जांच जरूरी ही है, लेकिन हमें लिबरल जनतंत्र के भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए, जिसकी तरफ प्रोफेसर डीबर्ट ने इशारा किया है।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और मुस्लिम समुदाय

मुसलमानों के प्रति केंद्र में सत्तारूढ़ दल का नजरिया पहले की सरकारों से अलग है. इसलिए 2014 के बाद से एक प्रकार से अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर मुसलामानों को सुनियोजित तरीके से बहिष्कृत करने के प्रयासों से जूझना पड़ रहा है.

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बस्तर: ‘देशद्रोहियों’ को छह लाख मुआवजा, समन पर NHRC में पेश नहीं हुए पूर्व IG कल्लूरी

बस्तर के तत्कालीन आइजी एसआरपी कल्लूरी की अगुवाई में ही बस्तर पुलिस द्वारा उनके पुतले जलाए गए थे और कल्लूरी द्वारा “अबकी बार बस्तर में घुसने पर पत्थरों से मारे जाने” की धमकी दी गयी थी।

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