COVID-19 से लड़ने के लिए शून्य उत्सर्जन की सूची में दिल्ली समेत भारत के तीन शहर शामिल: UN

संयुक्त राष्ट्र के रेस टू जीरो अभियान की तर्ज़ पर यह शहर और उद्योग 2050 तक शून्य-कार्बन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने की दौड़ में हैं। रेस टू जीरो अभियान, 2040-50 के दशक में शून्य उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध स्थानीय सरकारों, व्यवसायों, निवेशकों और अन्य लोगों का सबसे बड़ा गठबंधन है।

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Article 21 पर यह संजीदा होने का वक्‍त है, ताकि दफ़न न होने पाएं बेगुनाहों को मिले ज़ख्‍म

अगर हम अपने करीब देखें तो ऐसे तमाम लोग मिल सकते हैं जो इसी तरह व्यवस्था के निर्मम हाथों का शिकार हुए- मामूली अपराधों में न्याय पाने के लिए उनका लम्बे समय तक जेलों में सड़ते रहना या फर्जी आरोपों के चलते लोगों का अपनी जिन्दगी के खूबसूरत वर्षों को जेल की सलाखों के पीछे दफना देना।

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तीनों कृषि विधेयक केवल किसानों पर ही नहीं, हमारी थाली पर भी सीधा हमला हैं!

विधेयक में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक अनाज व तेल के दाम पिछले साल के औसत मूल्य की तुलना में डेढ़ गुना व आलू-प्याज, सब्जी-फलों के दाम दोगुने से ज्यादा नहीं बढ़ेंगे, तब तक सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसका अर्थ है कि खाद्य वस्तुओं में महंगाई को 50-100% की दर से और अनियंत्रित ढंग से बढ़ाने की कानूनी इजाज़त दी जा रही है

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दिल्‍ली को झुग्‍गीमुक्‍त करने का केजरीवाल और मोदी का वादा क्‍या ऐसे पूरा होगा?

क्या देश को झुग्गीमुक्त बनाने का प्रयास झुग्गियों को तोड़ कर और लाखों लोगों को बेघर कर के किया जाएगा? क्या झुग्गी के मलबे के ढेर के साथ इन लाखों झुग्गीवासियों के वर्तमान और भविष्य को भी अंधकार की गोद में धकेल दिया जाएगा?

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काशी मथुरा बाकी है: धर्म की राजनीति के खिलाफ अगली बार क्‍या हिंदू खड़े होंगे?

हिन्दुओं की आस्था के अनुसार राम, शिव और कृष्ण सबसे प्रमुख देवता हैं. इस तरह धार्मिक दृष्टि से अयोध्या (राम), वाराणसी (शिव) और मथुरा (कृष्ण) आस्था के तीन केन्द्र हैं और इन्हें मुक्त कराना आवश्यक है

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जलवायु परिवर्तन हिमालय के भूगर्भीय जलस्तर को घटा रहा है: शोध

हाल में प्रकाशित अध्‍ययन में ग्‍लेशियरों के पिघलने की वजह से क्षेत्र की जल व्‍यवस्‍था पर पड़ने वाले प्रभावों और निहितार्थ को समझने की कोशिश की गयी है। खासकर नदी बेसिन तथा हिमालय क्षेत्र पर निर्भरता वाले भूजल पर। इस रिपोर्ट में एचकेएच क्षेत्र में ग्‍लेशियरों के पिघलने और भूगर्भीय तथा सतही जल में होने वाले बदलावों के बीच सम्‍बन्‍धों की पड़ताल की गयी है।

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क्या साढ़े तीन महीने में बिहार के हर घर तक नल से पानी पहुंचा पाएंगे नीतीश कुमार?

अब भी बिहार के ऐसे 16 ज़िले हैं जहां पानी की उपलब्धता का आंकड़ा 50 प्रतिशत से नीचे है। इनमें 6 ज़िले ऐसे हैं जहां ये आंकड़ा 40 प्रतिशत से नीचे है। चार ज़िले ऐसे हैं जहां ये आंकड़ा 30 प्रतिशत से नीचे है।

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कैमूर गोलीकांड: चुनाव के माहौल में माओवाद का हौव्‍वा खड़ा करना चाह रही है सरकार

कैमूर के अधौरा प्रखंड में अपने जल, जंगल और ज़मीन के हक़ के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों पर पुलिस द्वारा गोलियां बरसायी गयीं। 11 सितंबर 2020 को पुलिस और वन विभाग ने निहत्थे आदिवासियों पर गोलीचालन किया जिसमें 3 लोग घायल हो गये और कई को चोट आयी।

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बनारस: मुसहरों के घास खाने वाली पोस्‍ट लिखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता को अग्रिम बेल

सामाजिक कार्यकर्ता मंगला राजभर के पुलिस द्वारा खिलाफ दर्ज दोनों फर्जी मुक़दमे में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मिली अग्रिम जमानत

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छत्‍तीसगढ़: नीलाम होने वाली कोयला खदानों की लिस्‍ट बदलने के नाम पर धोखा हुआ है!

रिपोर्ट की मानें तो कोयला खदानों और इससे संबंधित गतिविधियों (ताप बिजली संयंत्र, वाशरी, राखड निपटान आदि) के कारण इस इलाके के अत्‍यधिक प्रदूषित होने के दस्‍तावेजी ढेरों प्रमाण उपलब्‍ध हैं और इस इलाके की 9 खदानों को नीलामी में शामिल करना राष्‍ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन है।

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