क्यूबा में हालिया प्रदर्शन और तख्तापलट की साजिशों का नया अध्याय

क्यूबा पिछले 30 साल के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने क्यूबा पर 200 से अधिक आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। अब वहां अर्थव्यवस्था की स्थिति अत्यधिक खराब है और नागरिकों के बीच असंतोष है।

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बुंदेलखंड का अमेज़न ‘प्रोजेक्ट बकस्‍वाहा’ और देशव्यापी विरोध की जरूरत

आज जब देश और दुनिया क्लाइमेट चेंज (मौसम में बदलाव) के रूप में अब तक का सबसे बड़ा पर्यावरणीय संकट झेल रहे हैं, प्रोजेक्ट बकस्‍वाहा जैसी परियोजनाओं का व्यापक देशव्यापी विरोध जरूरी है। साथ ही इसके बरअक्स हवा, पानी, जंगल और जानवरों को बचाने वाली परियोजना चलाये जाने की जरूरत है जो दरअसल इंसानों को बचाने की परियोजना होगी।

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पढ़ने-खेलने की उम्र में मजदूरी करने को अभिशप्त हैं कोरोना-काल की लाखों अभागी संतानें!

पिछले दो दशक में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बाल मजदूरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। दुनिया भर में बाल मजदूरों की संख्या 152 मिलियन से 160 मिलियन पर पहुँच चुकी है।

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उसने कहा था- “यह महाद्वीप एक दूसरे को काटने को दौड़ती हुई बिल्लियों का पिटारा है”!

धर्म को गुलेरी जी बराबर कर्मकाण्ड नहीं बल्कि आचार-विचार, लोक-कल्याण और जन-सेवा से जोड़ते रहे। इन बातों के अतिरिक्त गुलेरी जी के विचारों की आधुनिकता भी हमसे आज उनके पुनराविष्कार की मांग करती है।

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न्याय की अवधारणा, मानवाधिकार और विलंबित न्याय: संदर्भ BK-16

अदालती फैसलों में पांच-छह साल लगना तो सामान्य-सी बात है, पर यदि बीस-तीस साल में भी निपटारा न हो तो आम लोगों के लिए यह किसी नारकीय त्रासदी से कम नहीं है। वैसे तो न्याय का मौलिक सिद्धांत यह है कि ‘न्याय में विलंब होने का मतलब न्याय को नकारना है’।

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आजकल गाँवों में उद्योग लगाने के लिए लोगों को आपस बाँट कर जमीन कैसे ली जाती है?

इस सब के बावजूद इस तरह की घटनाएं हुई हैं जब प्रभावित लोगों ने अपने बीच किसी तरह के विभाजन नहीं होने दिया और लगातार मिलकर परियोजना का विरोध जारी रखा। इस तरह की असाधारण स्थिति असाधारण समाधान की मांग भी करती है।

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प्रदूषक कम्पनियों के खिलाफ जलवायु मुकदमे करना हुआ आसान, गुणारोपण विज्ञान पर नया शोध

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से कानूनी कार्रवाई का विषय बन रहा है। अब तक दुनिया भर में जलवायु संबंधी 1500 मुक़दमे दायर हुए हैं, जिसमें पिछले महीने का एक मामला भी शामिल है जहां एक डच अदालत ने शेल कंपनी को अपने उत्सर्जन में कटौती करने का आदेश दिया था।

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टीबी ने बढ़ाया आदिवासियों में कोरोना का खतरा, राष्ट्रीय औसत से भी अधिक आंकड़ा

भोपाल के एक चिकित्सा विषेशज्ञ नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहते हैं कि कोरोना और टीबी के लक्षण समान होने से भी गलफत हो जाती है। वे बतलाते हैं कि भारत में दुनिया के 26 फीसदी टीबी मरीज हैं जिनमें से अधिकांश आदिवासी अथवा खनन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। कोरोना की दोनों लहरों ने इन मरीजों के इलाज और संदिग्‍ध मरीजों की पहचान को बुरी तरह प्रभावित किया है।

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इस बार क्यों बदला-बदला सा है मॉनसून का मिजाज़?

NASA (नासा) के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज़ का कहना है कि सबसे गर्म वर्ष का पिछला रिकॉर्ड 2016 के नाम था जिस बाद 2020 सबसे गर्म वर्ष किया गया है। पिछले 30 वर्षों के रुझान स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि वैश्विक तापमान में वृद्धि ज़्यादातर मानव-प्रेरित गतिविधियों के कारण होती है जिससे जलवायु पैटर्न और वार्षिक मौसम प्रणाली बदलते हैं।

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महाविनाश को आमंत्रण है महाकाली पर बन रहा पंचेश्वर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट

2010 में एक अंतरराष्ट्रीय संस्था इंस्टीट्यूट फॉर एनवायर्नमेंटल साइंसेज (आइईएस) के लिए वैज्ञानिकों (मार्क एवरार्ड और गौरव कटारिया) के अध्ययन के अनुसार, यदि केवल महाकाली घाटी के पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं का आकलन किया जाए तो इस परियोजना की लागत, लाभ से कई गुना अधिक होगी। इस अध्ययन के अनुसार भारत और नेपाल को मिला कर घाटी के 80 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे, जिसमें मुख्यतः किसान, मजदूर, मछुआरे हैं।

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