गाहे-बगाहे: वह आके ख्वाब में तस्कीने इज्तराब तो दे…
मेरे मन में एक सवाल उठता है कि अगर पचास फीसदी भारतीय शी जिनपिंग को पसंद करने लगेंगे तो क्या होगा? मोदी जी और उनके भक्त क्या सोचेंगे? उन्हें कैसा लगेगा?
Read MoreJunputh
मेरे मन में एक सवाल उठता है कि अगर पचास फीसदी भारतीय शी जिनपिंग को पसंद करने लगेंगे तो क्या होगा? मोदी जी और उनके भक्त क्या सोचेंगे? उन्हें कैसा लगेगा?
Read More
इस बात का कोई जवाब नहीं है कि विस्फोट कैसे हुआ, किसने किया, यह बारूद का ढेर क्यों और कैसे इतने समय तक इकट्ठा हुआ और जहाज़ किसका था और वहां क्यों था? मलबे का ढ़ेर अभी पूरी तरह साफ़ भी नहीं हुआ है, लेकिन लेबनान हमेशा की तरह एक अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक अखाड़ा बना हुआ है। इस सप्ताह का देशांतर लेबनान के राजनैतिक हालात और अक्टूबर से चल रहे आंदोलन के ऊपर, जिसे अक्टूबर क्रांति भी कहा जा रहा है।
Read More
उसके दिमाग को पढ़ा जा रहा था। यह बात वह अपनी पत्नी और एकमात्र दोस्त से कई बार बता चुका था, लेकिन दोनों ने ही उसकी बात को हवा में उड़ा दिया था।
Read More
देश के पांच राज्य ऐसे हैं, जो देश के कुल कचरा उत्पादन का आधा हिस्सा बनाते हैं पर उसे ट्रीट नहीं करते. महाराष्ट्र सबसे अधिक कचरा पैदा करता है पर उसका 40 फीसद से अधिक कचरा बगैर ट्रीटमेंट के पड़ा रहता है.
Read More
एमनेस्टी ने एक विस्तृत जांच के बाद जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें भारत की सबसे शानदार पुलिस माने जाने वाली दिल्ली पुलिस का रंग रूप बहुत घिनौना, बहुत डरावना और बहुत भयानक नजर आता है।
Read More
बनारस में बंदर भी हैं। कोई बंदर अगर छलाँग लगाते समय गिर जाए, तो उसे बंदरों के समूह से निष्कासित कर दिया जाता है। निर्वासित कर दिया जाता है। मुझे लगा, शायद तुमसे भी कोई चूक हुई हो, जिसके कारण तुम किसी समूह से खदेड़े गए हो।
Read More
मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी भी है जिसे घर में पालना जुर्म है पर यह बौद्धिक आतंक से भरी कानूनी जानकारी सोलह घंटों और छह परिधानों से सुसज्जित एक वीडियो के सामने खेत हो गयी। मोर को नयी पहचान मिली।
Read More
1990 में मंडल लगने से पहले पिछड़ा नेतृत्व का एक रुतबा था. मंडल लागू होने के बाद सवर्ण सत्ता को पिछड़ों से डर लगने लगा था, लेकिन 25 साल के भीतर पूरा का पूरा पिछड़ा नेतृत्व दीन-हीन अवस्था में पहुंच गया है.
Read More
वास्तविकता तो यह है कि देश के अन्य राज्यों में जहां कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा रही है वहीं पूर्वोत्तर के प्रदेशों में संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। सरकारी उपेक्षा के बाद अब वहां स्थानीय समुदायों ने इस महामारी से मुकाबला करने के लिए स्वयं पहल शुरू कर दी है।
Read More
पिछड़ों के बीच पैदा हुए महापुरुषों, उनके विचारों और उनके कृतित्व पर ब्राह्मणवाद जितनी बेरहमी से हमला करता है उससे कहीं ज्यादा घातक रूप में पिछड़े ही उन पर हमला करके उन्हें तबाह करते हैं। बक़ौल राजेंद्र यादव, उन्हें गुलामी में जितना आनंद आता है उससे कहीं अधिक आज़ादी से खतरा महसूस होता है।
Read More