भोपाल: 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले अनशन पर बैठीं गैस कांड पीड़ित औरतें
भोपाल में 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस हादसे से पीड़ित 10 महिलाओं ने हादसे से हुई मौतों और चोटों के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजे की माँग लेकर आज बिना पानी …
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भोपाल में 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस हादसे से पीड़ित 10 महिलाओं ने हादसे से हुई मौतों और चोटों के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजे की माँग लेकर आज बिना पानी …
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राजनीति के जिस दौर में न तो राजधर्म और न ही स्वधर्म की परवाह की जा रही हो, डॉ. पांडा को मिला यह पुरस्कार इस बात की तसदीक करता है कि स्वधर्म से ही राजधर्म को पूरा किया जा सकता है और राजधर्म ही स्वधर्म को अपनाने की संभावनाएं पैदा करता है।
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वरिष्ठ पत्रकार उज्जवल भट्टाचार्य ने कहा कि हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि वह कौन से कारण हैं जिससे आजादी के दौरान जो उर्दू अखबार मुख्यधारा के हुआ करते थे आज वह संकट में हैं। वरिष्ठ पत्रकार केडीएन राय ने कहा कि उर्दू न इंकलाब की भाषा है न ही बगावत की, ये मुहब्बत की भाषा है।
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विश्व हिंदू परिषद के अनुराग त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री को पत्र में निवेदन करते हुए कहा कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता और उसके पैकेजिंग के लिए कड़े नियम बनाये जाएं। जैसे पैकेट बंद खाद्य पदार्थ के सामने चेतावनी लेबल लगे ताकि उपभोक्ता को मालूम हो सके कि जो वो खाना खाने जा रहा है उससे उसे किन तत्वों की कितनी प्राप्ति होगी।
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कैदी को अस्पताल में हथकड़ी और पैरों में जंजीर बांध कर रखने के मामले में आयोग ने मुख्य सचिव को लिखा है कि यह ‘अमानवीय’ है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों व देश के कानून में वर्णित एक व्यक्ति के मानव अधिकारों का ‘घोर उल्लंघन’ करता है। इस मामले में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है।
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मंदुरी के निकट ग्राम जमुआ हरिराम (तहसील सगड़ी जनपद) में सरकार द्वारा जमीन कब्जाने और महिलाओं के साथ लाठीचार्ज के सवाल पर पिछले 26वें दिन से (यह रिपोर्ट लिखे जाने तक) धरना चल रहा है और इसमें सबसे अधिक महिलाएं शामिल हैं और आंदोलन का नेतृत्व भी कर रही हैं।
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पूर्वांचल किसान यूनियन के बैनर तले बेरोजगारी, महंगाई समेत किसानों, मजदूरों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर किसान मजदूर नौजवान अधिकार यात्रा का आगाज आजमगढ़ स्थित गांधी प्रतिमा से हुआ। तमाम युवा व अन्य संगठनों ने यात्रा का समर्थन किया है।
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सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे इंदौर इकाई के अध्यक्ष चुन्नीलाल वाधवानी ने अपने संबोधन में कहा कि तलवार के जोर पर कब्जा तो किया जा सकता है लेकिन क्रांतिकारी बदलाव नहीं। यह कार्य साहित्यकार कर सकता है। गांधी, भगत सिंह, अंबेडकर के बगैर भारत की कल्पना नहीं की जा सकती।
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भूमि अधिकार आन्दोलन 2015 में अपने गठन के साथ ही स्थानीय समुदायों– आदिवासी, दलित, मछुआरों और शहरी ग़रीबों के पास मौजूद संसाधनों की राज्य प्रायोजित लूट की मुखालफत करता रहा है और इस लूट के खिलाफ़ संगठित प्रतिरोधों के साथ खड़ा हुआ है।
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सामाजिक कार्यकर्ता रवि शेखर ने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। किसानी के संकट ने देश की किसानों-नौजवानों के सामने जीवन का संकट खड़ा कर दिया है।
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