फेक न्यूज़: जिसे लोगों ने सच समझ लिया और आग लग गयी…

हाल ही में यूएई सरकार ने कोरोना को लेकर फेक न्यूज़ फैलाने वाले लोगों पर शिकंजा कसते हुए आदेश दिया कि अगर कोई ऐसी भड़काऊ खबर फैलाता है, तो उसको 4 लाख का जुर्माना भरना होगा। वहीं कई अन्य देशों में जुर्माने के साथ कुछ साल की सजा भी निर्धारित की गयी है।

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सरकार के आश्‍वासन के बाद बुनकरों ने वापस लिया आंदोलन

बनारस के हज़ारों बुनकरों ने 1 सितंबर को शुरू किया अपना आंदोलन सरकार से समझौते के बाद वापस ले लिया है। उत्‍तर प्रदेश की सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान …

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समानता और न्याय के मूल्यों के खिलाफ है डिजिटल क्लास और ऑनलाइन परीक्षा

अभी देश भर में आयोजित हो रही प्रवेश परीक्षाओं के खिलाफ एक आंदोलन चल रहा है। यह आंदोलन डिजिटल माध्यमों पर चलाया जा रहा है जिसमें स्टूडेंट्स लाखों की संख्या में ट्वीट कर इन परीक्षाओं का विरोध कर रहे हैं।

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COVID-19: कथित कांस्पिरेसी थ्योरी किसके खिलाफ है?

इन प्रतिबंधों का विरोध करने वालों की राजनीति चाहे जो भी हो, लेकिन हमें यह तो देखना ही चाहिए कि यह किसके खिलाफ है। साथ ही यह भी समझने की कोशिश भी करनी चाहिए कि एक वैचारिक समूह के रूप में हम किसके पक्ष में खड़े हो रहे हैं।

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महामारी में इम्तिहान युवाओं की ज़िंदगी से खेलने के बराबर है

हाल ही में NTA द्वारा नीट परीक्षा अयोजित करवाने की पुष्टि की गयी। आज 32 लाख से भी अधिक कोरोना के मामले और 19 राज्यों में बाढ़ के बावजूद लिया गया यह फैसला छात्रों को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है।

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प्रणव मुखर्जी को याद करने के कुछ और भी कारण हैं!

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगी सभी गाड़ियां स्टार्ट कर दी गयी थीं, सब एलर्ट थे लेकिन जब धीरूभाई अंबानी राजीव गांधी के कमरे में दाखिल हुए तो बाहर निकलने में उन्हें 42 मिनट का वक्त लग गया। कहा जाता है कि यही वह मीटिंग थी जिसमें अंबानी ने राजीव गांधी को ‘सेट’ किया था, जिसकी व्यूह रचना प्रणव मुखर्जी ने की थी।

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UP के पंचायत चुनाव में दो बच्चे वाले प्रत्याशी का कानून हाशिये की नुमाइंदगी को कमज़ोर करेगा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा वर्ष 2003 में जनसंख्या नीति पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में यह निर्धारित किया गया था कि दो बच्चा नीति कई मायनों में प्रतिगामी है, जिनमें बच्चे का अधिकार व मानवाधिकार का उल्लंघन भी शामिल है।

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भूखे पेट, खाली खाता, सूनी थाली! मिड डे मील का राशन और पैसा बन गया ‘आपदा में अवसर’

सरकार का दावा है कि उसने तो बहुत पहले ही पके हुए मध्याह्न भोजन या फिर उसके बदले की राशि बच्चों के खाते में डाल दी है, पर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

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2012 से ही कांग्रेस को गिराकर मोदी को चढ़ा रही थीं आंखी दास: WSJ की नयी पड़ताल

2014 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा को बहुमत मिला, तो आंखी दास ने लिखा, ‘’भारत को राजकीय समाजवाद से आखिरकार पिंड छुड़ाने में तीस साल की ज़मीनी मेहनत लगी है।‘’

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भूखे-नंगे देश में पोषण पर क्विज़ और मीम?

पांच साल से कम आयु वर्ग के बच्चों की मौत में हम विश्व में पहले स्थान पर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ में पोषण पर क्विज़ और मीम प्रतियोगिता कराने में व्यस्त और खुद पर मंत्रमुग्ध हैं।

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