मॉडल कंक्लूसिव लैंड टाइटल एक्ट व रूल्स: संघीय ढांचे के खिलाफ नीति आयोग की नयी पेशकश

जब लगभग 50 दिनों से बंद पड़े देश का ताला बेहद सतर्कता से खोला जा रहा था, राज्यों की सीमाएं अब भी अंतरराष्‍ट्रीय सीमाओं की मानिंद पेश आ रही थीं, सामान्य नागरिक आवाजाही और दैनंदिन कार्य-व्यापार अब भी राष्ट्रीय आपदा नियंत्रण कानून और राष्ट्रीय महामारी कानून के अंतर्गत थे, संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार इन दो क़ानूनों के अंतर्गत ही प्रयोग में लाये जा सकते थे, ऐन इसी समय 2 जून 2020 को नीति आयोग देश के सभी राज्यों को लैंड टाइटलिंग एक्ट का मसौदा भेजता है और उन्हें कहता है कि या तो इसी मसौदे को या इसकी तर्ज़ पर तैयार किए गए मसौदे को अंगीकार करें और उसका क्रियान्वयन करें। इस पत्र में ‘ना’ कहने की गुंजाइश राज्यों के पास नहीं थी।

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किसान आंदोलन: 100 दिन पूरे होने पर आज काला दिवस, KMP एक्सप्रेस वे जाम

मध्यप्रदेश के छतरपुर में 87 दिनों से किसानों का धरना चल रहा है। पुलिस व प्रशासन ने अब तक न टेंट लगाने की अनुमति दी व न हीं कोई अन्य सहायता प्रदान की। यहां 3 व 4 मार्च को महापंचायत आयोजित की गई जिसके बाद टेंट लगाने की अनुमति दे दी गयी है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश में और महापंचायत करने की योजना है।

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चमोली हादसे पर अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समूह के कुछ शुरुआती निष्कर्ष

एक उल्लेखनीय साझे प्रयास में पर्वतों पर ग्लेशियर और पेराफ्रॉस्ट से जुड़े खतरों को समझने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय वैज्ञानिकों के समूह ने उत्तराखंड में बीती 7 फरवरी को आयी आपदा के कारणों का आकलन किया है। उनके इस आकलन में तमाम महत्वपूर्ण बातें सामने आयीं हैं जो कि हमारी पर्वतीय आपदाओं के बारे में समझ को बढ़ाती हैं।

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डिजिटल मीडिया के गले में कानूनी फंदा डालकर ये सरकार डराना चाह रही है या खुद डरी हुई है?

जब सरकार यह कहती है कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के व्यापार का एक बड़ा भाग भारत से होता है और इन्हें भारत के कानून के मुताबिक चलना होगा तो क्या इसमें यह संकेत भी छिपा होता है कि इन प्लेटफॉर्म्स को सरकार के हितों का ध्यान रखना होगा और सत्ता विरोधी कंटेंट से दूरी बनानी होगी?

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IT Rules 2021: मणिपुर के पत्रकार को भेजा नोटिस वापस, भ्रम दूर करने के लिए केंद्र का राज्यों को पत्र

मणिपुर प्रशासन ने पत्रकार को भेजा गया नोटिस अगले ही दिन मंगलवार को वापस ले लिया। जाहिर है, यह नए आइटी नियमों के सम्‍मत ही था, जिसका स्‍पष्‍टीकरण राज्‍यों को भेजे पत्र में बुधवार को सूचना प्रसारण मंत्रालय को करना पड़ा है।

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मेरा मुखिया कैसा हो? पंचायत चुनावों के मुहाने पर खड़ी हिन्दी पट्टी से जमीनी आवाज़ें

पंचायत चुनावों को निचले दर्जे का समझना भूल हो सकती है। आखिर ये ग्रामीण समझ और ग्रामीण विकास का मामला है। इस बार लगता है कि बात कुछ और होगी क्योंकि ग्रामीण जनता पिछले चुनावों से काफी सबक ले चुकी है। इस बार वे ये नहीं चाहते कि कोई भी आए और मुखिया का पद संभाल ले। इस बार जनता चाहती है कि उनका मुखिया ऐसा हो जो साक्षर हो, जनता को समान दृष्टि से देखता हो, भेदभाव कम करता हो, स्थानीय स्तर पर रोज़गार और दूसरी योजनाओं के क्रियान्वयन में जनता की भागीदारी और सबसे अहम् ग्रामसभा और समितियों के संचालन और ग्रामीणों को आ रही समस्याओं के समाधान की पहल करने योग्य हो। लोग ऐसे ही प्रत्‍याशियों को अपना समर्थन देंगे।

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सौ दिन छूते किसान आंदोलन के बीच तीन कृषि कानूनों को फिर से समझने की एक कोशिश

यह एक संवैधानिक प्रश्न भी है। कारण है कि कृषि राज्य और केंद्र दोनों का विषय है और यह समवर्ती सूची में आता है। एपीएमसी कानून को पारित करना राज्यों का अधिकार है। इसलिए यह कानून तो असंवैधानिक भी हो सकता है।

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किसान आंदोलन: सौवें दिन KMP एक्सप्रेसवे की नाकाबंदी, 15 मार्च को निजीकरण विरोधी दिवस

SKM पूरे भारत में एक “MSP दिलाओ अभियान” शुरू करेगा। अभियान के तहत विभिन्न बाजारों में किसानों की फसलों की कीमत की वास्तविकता को दिखाया जाएगा, जो मोदी सरकार व एमएसपी के झूठे दावों और वादों को उजागर करेगा। यह अभियान दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा। पूरे देश में किसान भी इस अभियान में शामिल किए जाएंगे।

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किसान आंदोलन और हिसार के पेटवाड़ की हिम्मती महिलाएं

हरियाणा के पेटवाड़ गांव की सोनिया पेटवाड़, शांति देवी और अन्य महिलाएं अपने तरीक़े से किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं — टिकरी में राशन भेजने के साथ-साथ वे विरोध प्रदर्शनों में भाग भी लेती हैं

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छतरपुरः हिंदूवादी संगठन ने इप्टा के नाट्य मंचन पर रोक के लिए लिखा धमकीभरा पत्र

विहिप का आरोप है कि इप्टा द्वारा मंचित किए जाने वाले ये नाटक पूर्णतया हिन्दू संस्कृति व धर्म विरोधी हैं। संगठन ने इस कारण ही प्रशासन से इनके मंचन पर जल्द से जल्द रोक लगाने की मांग की है।

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