पंजाब: ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ में मजीठिया की गिरफ़्तारी से राजनीति में उबाल

मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर राजनीतिक द्वेष के तहत विपक्षी आवाज़ों के दमन की कार्यशैली पर विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश में इस तरह की जबरदस्ती की कार्यवाही अनुचित है

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UP : स्कूल विलय के पीछे कम नामांकन दर की दलील और उसके मायने

स्कूलों के विलय का मुद्दा जितना चिंताजनक है उससे अधिक चिंता का विषय ये है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या (नामांकन) कम कैसे हुई। बच्चे गए कहां? क्या वे किसी प्राइवेट स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या ड्रॉपआउट हो गए? क्या इसके पीछे सरकारी/विभागीय फ़रमान भी जिम्मेदार है?

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UP : सरकारी स्कूलों का विलय कहीं शिक्षा का विसर्जन ना साबित हो जाए!

यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, यह हमारे बच्चों की नियति से जुड़ा निर्णय है। जिस दिन गाँव के बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए, उस दिन शहर की दीवारें भी नहीं बचेंगी। शिक्षा सबका हक है, न कि केवल उस बच्चे का जो कॉन्वेंट स्कूल जाता है।

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UP : सरकारी शिक्षा संस्थानों में पिछले दरवाजे से धार्मिक शिक्षा को घुसाने की कवायद और सवाल

अब लगने लगा है कि रफ्ता-रफ्ता ही सही संविधान के इस अहम प्रावधान को हल्का करने की कोशिश चुपचाप चल रही है और पिछले दरवाजे से सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा के लिए रास्ता सुगम किया जा रहा है।

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Attack of Mara, 10th century, Dunhuang

धम्म-बुद्ध और धर्म-युद्ध : अहिंसा की पीठ पर लदी हिंसा की चेष्टाएं

यह कहना कि भारत ने हमेशा बुद्ध के अहिंसक रूप से अपने समाज और जीवन को नियंत्रित किया है, यह तो सरासर गलत होगा।  एक ऐसा समाज जो वर्गीकरण, जाति-प्रथा और शोषण से ग्रस्त हो, जिसमें उसके संत-कवि एक बिना-ग़म  के “बेगमपुरा” की कल्पना करें, वह समाज और सभ्यता कभी भी संपूर्ण रूप से अहिंसक नहीं कहलायी जा सकती। 

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युद्ध और आतंकवाद : हथियारों के कारोबार के दो पहलू

इस दुनिया में ऐसा नहीं है कि आतंकवादियों के लिए हथियार कोई और बनाता है और युद्ध के हथियार कोई और बनाता है। हथियार का कारोबार चलता रहे इसके लिए जरूरी है कि युद्ध होते रहें और युद्ध होने के लिए जरूरी है एक वजह का होना जिसकी बिना के ऊपर युद्ध हों, और युद्ध के लिए आतंकवाद से बड़ी वजह और क्या हो सकती है?

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पहलगाम और ‘मुंबई मेरी जान’ के उस सीन का एक अदद पैगाम!

एक बार फिर, पहलगाम के बाद एक विषैला वातावरण, द्वेष से प्रदूषित माहौल, शक, संदेह का अंतर्प्रवाह और अंतर्भाव – यह खुद में सामाजिक सद्भाव और संतुलन के लिए अत्यंत हानिकारक है। खासकर, जब सत्ताधारी स्पष्ट रूप से ऐसे वातावरण के पनपने और फ़ैलने के रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं ले रहे हैं।

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होमियोपैथी दिवस: कहीं आप उपचार की सहज, सरल, सस्ती, प्रामाणिक विधि से महरूम न रह जाएं!

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी “ट्रेडिशनल मेडिसिन इन एशिया” नाम से एक मोनोग्राफ प्रकाशित कर होमियोपैथी एवं अन्य आयुष पद्धतियों की प्रासंगिकता को स्वीकार किया है। संगठन ने इस वर्ष (2025) विश्व स्वास्थ्य दिवस के संदेश के रूप में “स्वस्थ्य शुरुआत- आशापूर्ण भविष्य” की बात की है।

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आम आदमी पार्टीः दिल्ली की हार ने खड़े किए पंजाब में सवाल

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के पंजाब पर पड़ने वाले प्रभाव पर राजनीतिक विश्लेषकों और पंजाब के कई बुद्धिजीवियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

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यह किसान और जनता विरोधी बजट है!

अगर बजट में आम आदमी, किसान, मजदूर, महिला, युवा के लिए कुछ भी नहीं है, तो फिर कारपोरेट मीडिया इतनी उछलकूद क्यों कर रहा है? इसलिए कि इससे भारत के कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया गया है। मीडिया देश से नहीं, अपने मालिकों से वफादारी निभा रहा है।

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