तिर्यक आसन: आधुनिक गुरु-शिष्य पुराण
शिष्य था। उसका अपराधीकरण रोकना मेरा फर्ज था। साथ ही सनसनी को सन्नाटे में भी डालना था। मैंने सोचा- सनसनी से मुक्ति पाने के लिए ये अपने अपराधीकरण के रास्ते पर काफी आगे बढ़ चुका है। इसे वापस नहीं लाया जा सकता। ये किया जा सकता है, इसका राजनैतिक अपराधीकरण करना होगा। इसे दिल्ली से बनारस लाना होगा। वाया लखनऊ।
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