आर्टिकल 19: TRP की नपाई रोकने के पीछे Zee और BARC का बाप-बेटा कनेक्शन!

बार्क के इंडिया बोर्ड का चेयरमैन कौन है? उनका नाम है पुनीत गोयनका। पुनीत गोयनका ज़ी न्यूज के संस्थापक और एस्सेल समूह के मालिक सुभाष चंद्रा के सुपुत्र हैं। सुभाष चंद्रा को बीजेपी ने राज्यसभा का सांसद बनाया है। खबरों का डीएनए जांचने वाले सुधीर चौधरी, पुनीत गोयनका के चाचा-पापा-ताऊ के मुलाजिम हैं। कुछ समझ पा रहे हैं?

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तिर्यक आसन: प्रौढ़ों के सेटलमेंट और नवढ़ों के स्‍टार्ट-अप वाला ‘न्यू इंडिया’ वाया बनारस

अमुक धर्म खतरे में है भी एक व्यवसाय है। स्टार्ट-अप का एक रूप है। इस व्यवसाय के माध्यम से जो सेटल हुए हैं, जिनको रोजगार मिला है, उनकी ठीक-ठीक संख्या बता पाना मुश्किल है क्योंकि इस स्टार्ट-अप से सेटल होने वालों की संख्या स्थिर होने का नाम ही नहीं ले रही।

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बात बोलेगी: एक ‘सिविल सोसायटी’ के राज में दूसरे का ‘वध’ और तीसरे का मौन

अभी ये जो कानून आए हैं पंजीकृत नागरी समाज को नेस्तनाबूत करने के, वो आपको लग सकते हैं कि सरकार लायी है लेकिन असल बात ये है कि इन्हें यह अनसिविल सोसायटी लायी है ताकि सिविल सोसायटी का वध किया जा सके

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राग दरबारी: गोबरपट्टी के राजनीतिक टिप्पणीकार बिहार में ‘विकास की जाति’ को क्यों नहीं देखते?

किसका विकास हो रहा है मतलब किस जाति का विकास हो रहा है या फिर कह लीजिए कि विकास की जाति क्या है, इसे समझने का सबसे आसान तरीका यह जानना है कि किसके शासनकाल में किस जाति-समुदाय के लोगों की प्रतिमा लगायी जाती है; किसके नाम पर संस्थानों के नाम रखे जाते हैं; और किसके नाम पर सड़क का नामकरण हो रहा है।

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पॉलिटिकली Incorrect: बिजली और आयुध कर्मचारियों की फौरी जीत के आगे लटका शून्य

क्या ठेका कर्मचारियों के लिए हड़ताल का आह्वान कभी हुआ? क्या सबको समान सामाजिक सुरक्षा की बात यूनियनों के एजेंडे में कभी शामिल हुई? व्यवस्था परिवर्तन कभी मुद्दा बना? कर्मचारी यूनियनें इस पर ख़ामोश क्‍यों हैं?

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तन मन जन: कोरोना-काल में बढ़ता प्रदूषण जानलेवा तबाही की दस्तक है!

दिल्ली के अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी कहा है कि प्रदूषण यदि जरा भी बढ़ा तो फेफड़ों और श्वसन सम्बन्धी बीमारियों में बेतहाशा वृद्धि होगी और यह लोगों के लिए जानलेवा होगा।

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गाहे-बगाहे: या इलाही ये मुहल्ला क्या है!

उत्तर भारत का यह खास धार्मिक परिदृश्य है और हजारों की संख्या में ऐसे ही मंदिरों से ऐसे ही भजन प्रतिदिन छह-आठ घंटे बजाये जाते हैं। जबरन। और कोई भी ऐतराज करे तो दंगा करने के लिए तैयार बैठे धर्मप्राण।

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देशान्तर: विश्व सामाजिक मंच की पुनर्कल्पना मुमकिन है, असंभव नहीं!

इस दौर में फोरम के समक्ष कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जिसके ऊपर इसकी अंतरराष्‍ट्रीय परिषद् में बहसें जारी हैं। इस मुद्दे को लेकर मंच की परिषद् ने गत 6 महीनों में कई छोटी समितियां बनायी हैं और साथ ही दुनिया भर के जन आंदोलनों के साथ जून, सितम्बर और अक्टूबर में गोष्ठियां की हैं।

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दक्षिणावर्त: भाभी जी हाथरस में हैं, सत्य कहां है?

ये सारी जानकारी हम तक बुद्धू बक्सा पहुंचा रहा है। इस बीच एसआइटी की जांच अपनी गति से चल रही है जबकि प्रशासन अपनी मंथर गति के सहारे अपने छूटे कस-बल को पेंचदार बना रहा है।

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पंचतत्व: गंगाजल को गया तक ले जाना बिहार सरकार का विकट दृष्टिदोष है

खुद गंगा अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. अगर गर्मियों में उससे 50 एमसीएम पानी निकाल लिया जाएगा तो खुद इसके परितंत्र पर क्या असर पड़ेगा, इसका क्या कोई अध्ययन बिहार सरकार ने कराया है?

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